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जिस 'जिहादी' अब्दुल के लिए US सीनेट में मेटल डिटेक्टर लगाना चाह रहे थे ट्रंप, उसने रचा इतिहास, जीता चुनाव, जानें डिटेल
अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में अब्दुल-अल-सैयद ने सीनेट का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है. मिस्त्र मूल के अब्दुल की भारतीय मूल की पत्नी हैं. अब्दुल की जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि ट्रंप ने कभी उन्हें 'जिहादी' कहा था.
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मिशिगन ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद को अपना अगला सीनेटर चुना है. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा दिया. अब्दुल ने माना कि ये उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है.
मिशिगन से जीते अब्दुल-अल-सैयद
जीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने अपनी राय रखी. पेशे से चिकित्सक सैयद ने लिखा, "मिशिगन की सेवा करने के लिए अमेरिकी सीनेट जाना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है. मिशिगन, हमने वह कर दिखाया जिसे लोग कहते थे कि किया ही नहीं जा सकता. हम जीत गए. एक साथ मिलकर. अब असली काम शुरू होता है."
सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम!
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इस जीत के साथ ही वो अमेरिकी सीनेट तक पहुंचने वाले पहले मुस्लिम शख्स होंगे. चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें उनके धर्म को लेकर काफी टारगेट किया गया था. बुधवार रात को उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जो कहा, वो उसका जवाब था.
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कौन हैं अब्दुल-अल-सैयद?
अब्दुल-अल-सैयद एक अमेरिकी राजनेता, चिकित्सक और महामारी विज्ञानी हैं, जिन्होंने 2026 के मिशिगन सीनेट चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने का गौरव हासिल किया है. मिस्र के अप्रवासी परिवार में जन्मे अल-सैयद ने ऑक्सफोर्ड और कोलंबिया जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज से उच्च शिक्षा प्राप्त की है और वे डेट्राइट के स्वास्थ्य निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
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किन मुद्दों को उठाते रहे हैं अब्दुल-अल-सैयद?
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेता के रूप में उन्होंने 'यूनिवर्सल हेल्थकेयर' और सरकारी पारदर्शिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और कड़े मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोज़र्स को हराया. चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और अन्य रिपब्लिकन नेताओं ने उनकी मुस्लिम पहचान को लेकर उन पर तीखे हमले किए थे, जिसका अल-सैयद ने डटकर सामना किया और इस ऐतिहासिक जीत के साथ कड़ा पलटवार किया है.
भारत से भी है अब्दुल का खास संबंध?
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अमेरिकी सीनेट में इतिहास रचने वाले अल-सैयद का भारत से भी बेहद खास और गहरा नाता है. उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू एक मनोचिकित्सक हैं, जिनका परिवार कर्नाटक (मंगलुरु) से ताल्लुक रखता है और उनके दादा शमशुद्दीन मैसूर राज्य में वित्त उप-मंत्री रह चुके हैं. मिशिगन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान सारा से मिले अल-सैयद का भारतीय संस्कृति से इतना गहरा जुड़ाव है कि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है और 20 सालों में मैं इसमें पूरी तरह घुल-मिल गया हूं. सच कहूं तो शायद मैं अरबी होने से ज्यादा भारतीय हूं.”
ट्रंप ने अब्दुल को कभी कहा था जिहादी!
आपको बता दें कि ये अल-सैयद वही हैं जिन्हें ट्रंप ने जिहादी कहा था. उन्हें उनके धर्म को लेकर निशाना बनाया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें सीनेट में प्रवेश के लिए 'मेटल डिटेक्टर' से गुजरना होगा. हालांकि अल-सैयद ने इसका करारा पलटवार करते हुए कहा था कि उनके उन्होंने गैस और राशन की बढ़ती कीमतों जैसे असली मुद्दों पर बात करने के बजाय, सिर्फ समाज को बांटने और नफरत फैलाने का रास्ता चुना है.
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इसी बीच अपनी जीत से उत्साहित सैयद ने मंच से कहा, "मेरा नाम अब्दुल रहमान अल सैयद है और मिशिगन हमने जीत हासिल कर ली. मुझे खुशी है कि मैं आपके सामने बतौर सीनेटर इलेक्ट खड़ा हूं."
अब्दुल रहमान अल सैयद है पूरा नाम!
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उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "हम सभी जानते हैं कि मेरे नाम और मेरे धर्म की वजह से आपका पेट्रोल खरीदना महंगा नहीं हुआ है. न ही इसकी वजह से आप राशन खरीदने में परेशानी झेल रहे हैं और न ही आपको डॉक्टर के पास जाने में दिक्कत हो रही है."
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फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर निशाना साधते हुए अब्दुल ने कहा, "मुझे पता है कि आपको मेरा नाम बोलने में परेशानी होती है. इसलिए जनवरी में जब जेडी वेंस मुझे सीनेटर पद की शपथ दिलाएंगे, तो आप मुझे सीनेटर कहकर बुला सकते हैं." मुद्दों की बात करें तो अब्दुल ने चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सेवा सबके लिए उपलब्ध कराने, महंगाई कम करने और इजरायल को अमेरिकी सैन्य मदद बंद कराने पर जोर दिया था.