Advertisement

Loading Ad...

मामूली दुख के 250, ज्यादा के 500 और रोने के लिए देने होंगे इतने पैसे, मुंबई के शख्स ने खोला दुख बांटने का गजब धंधा

पैसें दें और तफ्सील से अपना दुख बताएं, जी भरकर बातें करें और कंधे पर सिर रखकर चाहे दहाड़े मारकर रोएं. क्योंकि एक शख्स ने दुख बांटने का गजब धंधा खोला है. जिसका दिलचस्प Video वायरल हो रहा है.

Loading Ad...

Mumbai Juhu Beach Video Viral: माना जमाना स्टार्टअप का है, माना जमाना इनोवेशन और न्यू आईडियाज का है, माना जमाना टैलेंट से कमाने का है, लेकिन क्या किसी का दुख बांटना भी बिजनेस बन सकता है? इसके लिए करना कुछ नहीं है, बस उन लोगों को सहारा बनना है जो अकेले हों, जो अपनी बातें शेयर करने के लिए साथी ढूंढ रहे हों. ये अनोखा धंधा शुरू किया है मुंबई के एक शख्स ने जो जुहू बीच पर बैठकर लोगों का हमदर्द बनता है और ये काम बकायदा पूरी शिद्दत से प्रोफेशनली करता है. 

मुंबई के जुहू बीच में तख्ती, बोर्ड लगाए बैठा एक शख्स सबका ध्यान खींच रहा है. इस तख्ती पर लोगों का दुख और परेशानियां सुनने के लिए रेट लिस्ट लगी है. जिसमें मामूली दुख, बड़ा दुख और रोने के हिसाब से अलग-अलग रेट्स लिखी हैं. मामले को समझने के लिए ये वीडियो देखें. जिसमें शख्स ने अपने दुख बांटने के धंधे की पूरी डिटेल तफ्सील से बताई है. 

देखें Video

Loading Ad...

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जुहू बीच के किनारे पर एक शख्स बोर्ड लगाकर बैठा है, बोर्ड पर साफ लिखा है मामूली दुख सुनने के लिए 250 रुपये, बड़ा दुख सुनने के लिए 500 रुपये और साथ बैठकर रोने के लिए 1000 रुपये. वीडियो बनाने वाला शख्स उससे पूछता है, क्या सच में आपके पास लोग अपना दुख लेकर आते हैं? इस पर वह जवाब देते हुए कहता है, वह लोगों की बात बिना जजमेंट के सुनता है और उन्हें समझाने की कोशिश करता है. 

Loading Ad...

दुख सुनने वाला शख्स कहता है, आज के समय में लोग अकेलेपन और तनाव से जूझ रहे हैं, ऐसे में सिर्फ किसी ऐसे इंसान की जरूरत होती है जो उसकी बात सुन सके. शख्स के इस स्टार्टअप को देख लोग हैरान हैं. मानों जैसे आज के युवाओं की उसने दुखती रग पर हाथ रख लिया हो. 

यह भी पढ़ें- जब गांव की मां ने थामा हाथ… विदेशी महिला को मिला ऐसा प्यार, इंटरनेट पर छा गया वीडियो

Loading Ad...

शख्स के इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं. कुछ इसे मजेदार स्टार्टअप आइडिया बता रहे हैं तो कुछ आज के समय की हकीकत बता रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, भाई का ये स्टार्टअप बहुत आगे तक जाएगा. दूसरे ने लिखा, जुहू बीच का सबसे यूनिक स्टार्टअप. वहीं, एक और यूजर लिखता है, हर चीज का बिजनेस बन सकता है गम हो या खुशी. तो एक शख्स ने तो इस धंधे की फीस को कम बता दिया. यानी शख्स के मुताबिक दुख बांटने के पैसे तो ज्यादा लगने चाहिए. 

कितना बदल गया इंसान… 

कहने को तो शख्स अपना धंधा चला रहा है. शायह वह प्रोफेशनली ही सोचे, लेकिन इस स्टार्टअप ने समाज की हकीकत को भी बयां कर दिया. वो गाना है ना, ‘देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान.’

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

इंसान इतना बदल गया कि उसके पास दुख सुनने, बांटने, समझने के लिए कोई साथी-संगी ही नहीं है. वह कभी सोशल मीडिया तो कभी बाहर अपना हमदर्द ढूंढ रहा है. परिवार, दोस्तों के बीच भी इंसान इतना क्यों अकेला हो गया कि किसी को सहारा बनाने के लिए पैसे देने पड़ें. इसकी वजह क्या समय की कमी है या समय होते हुए भी कोई किसी को सुनने के लिए तैयार नहीं. ये ही वजह है कि ऐसे धंधों का उदय हुआ है. जुहू बीच पर बैठे शख्स का ये कदम यूनिक होने के साथ-साथ समाज की कड़वी सच्चाई है. जहां दुख सुनना धंधा बन गया और लोग शख्स के पास अपना दुखड़ा लेकर भी आ रहे हैं. 

Loading Ad...
Loading Ad...