भारत के DPI का पूरी दुनिया में बजा डंका, इन देशों में लाइव हुआ UPI, डिजिलॉकर को लेकर कई देशों ने किया समझौता
भारत के DPI ने पूरी दुनिया में झंडे गाड़ दिए हैं. करीब 8 देशों में ये ना सिर्फ लाइव हो गया है बल्कि इंडिया स्टैक' और डीपीआई मॉडल को साझा करने के लिए दुनिया के 23 देशों के साथ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं. ये भारत की नई उड़ान की कहानी कहते हैं.
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भारत का 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) का पूरी दुनिया में डंका बज रहा है. जिस UPI को लेकर कभी भारत की मुख्य विपक्षी कांग्रेस सवाल उठा रही थी, जिसपर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम हंसते नजर आए थे, वो अब भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में धमाल मचा रहा है. ये अब केवल देश में, शहरी इलाकों, पढ़-लिखे लोगों तक ही नहीं बल्कि अल्ट्रा ग्रामीण, रिमोट एरियाज से लेकर कई दक्षिण, पूर्व एशिया के देशों के साथ तरक्की पसंद देशों में सफलता की नई कहानी लिख रहा है.
भारत के UPI का बजा दुनिया में डंका!
जिस मास्टरकार्ड, वीजा, अमेरिकन एक्सपप्रेस पर दुनिया की ना चाहते हुए निर्भरता थी, बाजार पर इनकी मोनोपॉली थी, वहां अब भारत के रूपे कार्ड के अलावा यूपीआई की भी धमक सुनाई दे रही है. यूपीआई अब वैश्विक कूटनीति और तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व का एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है.
आठ से अधिक देशों में लाइव हुआ भारत का UPI
दरअसल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आठ से अधिक देशों में लाइव हो चुका है, इनमें यूएई, सिंगापुर, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, कतर और मॉरीशस का नाम शामिल है. यह डिजिटल पेमेंट में भारत की लीडरशिप को दिखाता है. यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को संसद में दी गई.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के DPI की बढ़ी स्वीकार्यता
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में दी जानकारी में बताया कि यूपीआई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकृति से रेमिटेंस को बढ़ावा मिल रहा है, वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है.
भारत के साथ 23 देशों ने किया MoUs
इसके अलावा, सरकार ने भारत स्टैक/डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को साझा करने या उस पर सहयोग के लिए 23 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू)/समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इनका उद्देश्य मुख्य रूप से भारत के डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स के अपनाने को बढ़ावा देना है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा आदान-प्रदान और सेवा वितरण प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है. ये भारत स्टैक ढांचे के तहत भारत की व्यापक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कूटनीति के अनुरूप हैं.
डिजिलॉकर को लेकर भी कई देशों की दिलचस्पी!
डिजिलॉकर के लिए क्यूबा, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात और लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (एलपीडीआर) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसके अलावा, सरकार ने भारत के डीपीआई की सफलता को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए कदम उठाए हैं.
इंडिया स्टैक ग्लोबल क्या है?
इंडिया स्टैक ग्लोबल भारत के डीपीआई को प्रदर्शित करता है और मित्र देशों द्वारा इसे अपनाने में सहायता प्रदान करता है. यह पोर्टल 18 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करता है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारत की जी20 अध्यक्षता (2023) के दौरान शुरू किया गया ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी एक वैश्विक ज्ञान मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें भारत ने डीपीआई समाधानों की सबसे अधिक संख्या में योगदान दिया है.”
प्रमुख डीपीआई और डिजिटल समाधानों में आधार, यूपीआई, कोविन, एपीआई सेतु, डिजिलॉकर, आरोग्य सेतु, जीईएम, उमंग, दीक्षा, ई-संजीवनी और पीएम गतिशक्ति आदि शामिल हैं.
इस बीच, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में यूपीआई लेनदेन की संख्या में 28 प्रतिशत की वृद्धि (साल-दर-साल) दर्ज की गई और यह 21.70 अरब तक पहुंच गई. साथ ही, लेनदेन राशि में भी 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई और यह 28.33 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई.
जनवरी में UPI लेनदेन में 28% की जबरदस्त बढ़ोतरी
आपको बता दें कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए जनवरी में ट्रांजैक्शन की संख्या में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जनवरी में कुल 21.70 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. इसके साथ ही ट्रांजैक्शन की कुल राशि में भी 21 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ यह 28.33 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई. रविवार को जारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है. एनपीसीआई के मुताबिक, महीने के हिसाब से भी यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या और रकम में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. जनवरी में यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ता रहा.
जनवरी में हर दिन करीब 70 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन
जनवरी महीने में रोजाना औसतन 91,403 करोड़ रुपए का यूपीआई ट्रांजैक्शन हुआ, जो दिसंबर के 90,217 करोड़ रुपए के मुकाबले ज्यादा है. जनवरी में रोजाना औसतन 70 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 69.8 करोड़ था. वहीं दिसंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 21.63 अरब रही थी. वहीं ट्रांजैक्शन की राशि 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी.
IMPS में भी हुई बढ़ोतरी
इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सेवा (IMPS) के जरिए दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ. यह पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा था और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक रहा. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ एक्टिव यूपीआई क्यूआर कोड हो चुके हैं, जो जुलाई 2024 के मुकाबले 21 प्रतिशत ज्यादा है.
क्यूआर कोड के कारण भारत में लेनदेन क्रांति
वर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, ट्रांसपोर्ट केंद्रों और ग्रामीण बाजारों में क्यूआर कोड की आसान उपलब्धता ने 'स्कैन और पे' को पूरे देश में आम भुगतान तरीका बना दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्ति से दुकानदार को किए जाने वाले (पीटूएम) भुगतान, व्यक्ति से व्यक्ति (पीटूपी) भुगतान की तुलना में ज्यादा रहे. इससे रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई की मजबूत पकड़ दिखती है. पीटूएम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर 37.46 अरब तक पहुंच गए, जबकि पीटूपी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए.
औसतन हर ट्रांजैक्शन की राशि घटकर 1,262 रुपए रह गई, जो पहले 1,363 रुपए थी. इससे साफ है कि लोग अब यात्रा, खाना, दवाइयों और छोटे स्थानीय कारोबार में यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) सभी लोगों तक सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है. इससे शहर और गांव के बीच की दूरी कम हुई है और भारत दुनिया में एक मजबूत डिजिटल देश के रूप में उभर रहा है.
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