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CM योगी के नेतृत्व में यूपी का साइबर डिफेंस हुआ मजबूत, 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव से तोड़ी गई डिजिटल जालसाजों की रीढ़

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजी साइबर क्राइम विनोद कुमार सिंह ने प्रदेश के पुलिस कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया है. इसके अलावा जवानों को साइबर अपराध से मुकाबले के लिए नई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

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03 Oct 2026
( Updated: 03 Oct 2026
01:52 PM )
CM योगी के नेतृत्व में यूपी का साइबर डिफेंस हुआ मजबूत, 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव से तोड़ी गई डिजिटल जालसाजों की रीढ़
Image Credit: NMF Input
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साइबर ठगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई को तकनीक के जरिए मजबूत किया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साइबर अपराध की रोकथाम के साथ ही ठगी के बाद धनराशि को रोकने और वापस कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. सितंबर में साइबर फ्रॉड की रकम फ्रीज कराने की प्रदेश की दर 34 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 31 प्रतिशत से अधिक है. साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के माध्यम से रियल टाइम रूटिंग के जरिये डाइवर्ट की गई रकम को फ्रीज और रिकवर कराने की कार्रवाई की जा रही है. कई मामलों में तय समय सीमा के भीतर 100 प्रतिशत तक रिकवरी दर्ज की गई है.

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प्रदेश में साइबर अपराध से बचाव के लिए 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव भी चलाए गए हैं. इन अभियानों के माध्यम से लोगों को फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी, फर्जी अप्रूवल और साइबर ठगी के दूसरे तरीकों के प्रति जागरूक किया गया. सिनेमा हॉल से लेकर रेलवे स्टेशन तक विभिन्न स्थानों पर लोगों को डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतने और किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता जांचने की जानकारी दी गई.

रियल टाइम ट्रैकिंग से रकम रोकने की कोशिश

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साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी की रकम रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम को रोकने की कार्रवाई शुरू की जाती है. रियल टाइम रूटिंग और डेटा शेयरिंग के जरिये डाइवर्ट किए गए फंड को फ्रीज कराने और उसे वापस कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है. इससे ठगी के बाद रकम के तेजी से दूसरे खातों में जाने की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है.

डीजी साइबर क्राइम ने जवानों को अत्याधुनिक तकनीक से किया लैस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजी साइबर क्राइम विनोद कुमार सिंह ने प्रदेश के पुलिस कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया है. इसके अलावा जवानों को साइबर अपराध से मुकाबले के लिए नई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. एआई-डीपफेक, म्यूल अकाउंट और साइबर अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

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गोल्डन आवर में शिकायत जरूरी

एसपी साइबर क्राइम राजेश यादव ने बताया कि साइबर फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण है. पहले एक घंटे के भीतर शिकायत करने पर रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी और फर्जी अप्रूवल समेत कई तरीकों से साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं. ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय उसकी प्रामाणिकता की जांच करना और सतर्क रहना जरूरी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रदेश में मजबूत व्यवस्था की गई है. हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क है. वहीं लखनऊ में 1930 कॉल सेंटर और साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर संचालित किया जा रहा है. शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम रोकने की कार्रवाई की जाती है.

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सिर्फ पुलिस नहीं, समाज की भागीदारी भी जरूरी

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साइबर अपराध की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती. इसलिए इससे मुकाबले के लिए पुलिस और बैंकों के साथ स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, यूथ एवं स्पोर्ट्स क्लब और स्थानीय संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है. जागरूकता और त्वरित शिकायत के जरिये साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है.

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