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‘तो इस्तीफा दे दो या…’ नमाज से जुड़ा क्या है वो मामला? जिस पर संभल के SP और DM को हाई कोर्ट से पड़ी फटकार

हाई कोर्ट ने क्लियर किया कि कितने लोग नमाज पढ़ेंगे ये प्रशासन तय नहीं कर सकता है. जस्टिस जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की.

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14 Mar 2026
( Updated: 14 Mar 2026
06:48 PM )
‘तो इस्तीफा दे दो या…’ नमाज से जुड़ा क्या है वो मामला? जिस पर संभल के SP और DM को हाई कोर्ट से पड़ी फटकार

Allahabad High Court on Sambhal Namaz Issue: संभल में रमजान के दौरान नमाज से रोके जाने का मामला कोर्ट पहुंच गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सख्त और साफ लहजे में कहा, नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती. 

संभल की मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासन के फैसले पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशासन के फैसले को रद्द करते हुए कहा, ‘अगर एसपी और डीएम कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर मांग लेना चाहिए.’ कोर्ट ने आगे कहा

‘अगर लोकल अथॉरिटी यानी SP और DM को लगता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. जिसकी वजह से वे जगह के अंदर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करना चाहते है या अगर उन्हें लगता है कि वे कानून का राज लागू करने में काबिल नहीं हैं तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर ट्रांसफर मांग लेना चाहिए.’

इस्तीफा दें या तो तबादला करवा लें- कोर्ट 

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने क्लियर किया कि कितने लोग नमाज पढ़ेंगे ये प्रशासन तय नहीं कर सकता है. जस्टिस जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की. बेंच ने कहा, मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती. अगर अधिकारी कानून-व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें या तो तबादला करवा लें. 

हाई कोर्ट ने अधिकारियों को बताया कानून 

कोर्ट ने कहा, राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे. वो यह सुनिश्चित करें कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सकें. बेंच ने आगे कहा, हाई कोर्ट यह पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का हस्तक्षेप केवल तभी जरूरी होता है और इजाजत तभी मांगी जानी चाहिए जब प्रार्थनाएं या धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों या सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहे हों.

संभल मस्जिद में नमाज से जुड़ी क्या थी याचिका? 

दरअसल, संभल में प्रशासन के नमाजियों को सीमित संख्या में प्रवेश देने के फैसले के खिलाफ मुनाजिर खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. याचिका में कहा गया था कि उन्हें गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है. मुनाजिर खान के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि यहां एक मस्जिद स्थित है. 

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उधर, राज्य सरकार ने कोर्ट में गाटा संख्या 291 के मालिकाना हक के बारे में बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में यह मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम पर दर्ज है, जो दोनों सुखी सिंह के बेटे हैं. उनके नाम पर दर्ज है. कोर्ट ने बताया गया कि उस जगह पर केवल 20 नमाजियों को ही अनुमति दी गई है. इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि परिसर के अंदर नमाज अदा करने के लिए ज्यादा लोग आ सकते हैं क्योंकि रमाजन का महीना है. इस पर राज्य की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उपासकों की संख्या को सीमित करने वाला ऐसा आदेश पारित किया गया है. जिसे अब सुनवाई में हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. 

16 मार्च को होगी अगली सुनवाई

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इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. UP सरकार ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है. वहीं,  याचिकाकर्ता ने भी नमाज अदा करने के स्थान को दर्शाने के लिए तस्वीर और राजस्व अभिलेख दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी है. हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत पहले ही एक मामले में कह चुकी है कि प्राइवेट प्रॉपर्टी पर पूजा या इबादत के लिए पूर्व अनुमति लेने की सरकार से कोई जरूरत नहीं है.

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