वीडियो बना प्रेम बाईसा का काल! सर्दी जुकाम का इंजेक्शन और 3 मिनट में मौत, साध्वी मामले में कौनसा सच छुपा रहे पिता?

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के 3 दिन बाद भी कई सवाल बने हुए हैं. इंजेक्शन लगाने के बाद 30 सेकेंड में बाईसा की हालत बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, मुंह और नाक से कफ निकलने लगा. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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31 Jan 2026
( Updated: 31 Jan 2026
12:44 PM )
वीडियो बना प्रेम बाईसा का काल! सर्दी जुकाम का इंजेक्शन और 3 मिनट में मौत, साध्वी मामले में कौनसा सच छुपा रहे पिता?

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत अब सामान्य मामला नहीं रह गया है. धीरे-धीरे सवाल गहराते जा रहे हैं गुत्थी रहस्य बनती जा रही है. इंजेक्शन लगने के कुछ मिनट बाद मौत और फिर 3 घंटे बाद सोशल मीडिया पोस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए. इस मामले में एक वीडियो की भी काफी चर्चा हो रही है. जो प्रेम बाईसा की मौत से पहले वायरल हुआ था. 

28 जनवरी को कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. 30 जनवरी को बालोतरा के परेऊ गांव में आश्रम में संत परंपरा के अनुसार समाधि दी गई. प्रेम बाईसा का जाना उनके अनुयायियों के लिए बड़ा झटका है. अंतिम विदाई में भी उनके शिष्य, साधक और अनुयायी बड़ी संख्या में मौजूद रहे. इस दौरान सबकी आंखें नम थीं, पल बेहद भावुक कर देने वाला था, लेकिन मन में एक सवाल बार-बार उठ रहा आखिर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई? क्योंकि जो बताया जा रहा है, जो पोस्ट में लिखा है कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. 

प्रेम बाईसा के साथ क्या हुआ था? 

23 साल की साध्वी प्रेम बाईसा पिता वीरमनाथ के साथ जोधपुर में ही रहती थीं. एक सत्संग कार्यक्रम के बाद प्रेम बाईसा पिता के साथ 27 जनवरी की रात अजमेर से जोधपुर लौटी थी. 28 जनवरी की सुबह प्रेम बाईसा को गले में खराश और जुकाम की समस्या होने लगी. हल्का-हल्का बुखार भी था. चूंकि 31 जनवरी को प्रेम बाईसा के अजमेर और चंडीगढ़ में दो बड़े कार्यक्रम होने वाले थे इसलिए उन्होंने दवाई के लिए कंपाउंडर को बुलाया, कंपाउंडर का नाम देवीलाल सिंह था. प्रेम बाईसा और उनके पिता देवीलाल को पहले से जानते थे, पहले भी वह इलाज के लिए आ चुका है.

एक इंजेक्शन और 3 मिनट में मौत 

प्रेम बाईसा को मामूली सर्दी जुकाम ही था लेकिन कंपाउंडर ने दवाईयां देने की बजाय इंजेक्शन लगाया. इंजेक्शन लगाने के बाद 30 सेकेंड में बाईसा की हालत बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, मुंह और नाक से कफ निकलने लगा. ये देख पिता वीरमनाथ बुरी तरह डर गए, भागते हुए अस्पताल ले जाने लगे लेकिन घर के गेट पर ही प्रेम बाईसा बेहोश होकर गिर गईं और अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने प्रेम बाईसा को मृत घोषित कर दिया. ये सब कुछ महज कुछ मिनट के अंदर हुआ. 

मौत के 3 घंटे बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट 

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ आया. प्रेम बाईसा की मौत के 3 घंटे बाद सोशल मीडिया पर उनकी ID से एक पोस्ट किया गया. जिसमें उन्होंने न्याय की बात कही थी. इस पोस्ट में लिखा था, 

‘पूज्य सभी संतों को प्रणाम... मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जिया दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म से नहीं है.  आज अंतिमश्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान , विश्व योग गुरुओं और पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा मैंने आदि गुरू शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा, अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है, मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.’

पोस्ट को लेकर सवाल उठे तो पिता वीरमनाथ सामने आए उन्होंने बताया कि बाईसा को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने ही ये पोस्ट किया था. हालांकि पिता की सफाई के बाद भी सवाल थमें नहीं, आखिर पिता ने बेटी के जाने के महज 3 घंटे बाद ही ये पोस्ट क्यों किया? 

पोस्टमार्टम से पहले आश्रम क्यों ले जाया गया? 

ये मामला इसलिए भी पेचीदा हो जाता है क्योंकि अस्पताल वालों ने प्रेम बाईसा का शव दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी,  ताकि पोस्टमार्टम, विसरा और बाकी प्रक्रिया पूरी हो सके, लेकिन पिता वीरमनाथ शव को सीधे आश्रम लेकर गए. इसके कुछ घंटों बाद पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम करवाया गया. 

पिता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, वे आश्रम में पूरे सम्मान के साथ अंतिम दर्शन करवाने के बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाना चाहते थे. 

पिता ने क्या आरोप लगाए? 

कुछ दिन पहले प्रेम बाईसा का एक वीडियो सामने आया था. जो 2025 में वायरल हुआ था लेकिन कई साल पहले का बताया जा रहा है. वीडियो में प्रेम बाईसा आश्रम के अपने कमरे में लेटी हैं. अचानक वह उठती हैं और भागकर संत वेश में आए शख्स को गले लगाती हैं. इस दौरान वहां एक महिला भी मौजूद थी. हालांकि इस वीडियो पर प्रेम बाईसा ने खुद भी प्रतिक्रिया दी थी.  साध्वी ने कहा था, वह शख्स उनके गुरु (पिता) ही थे. उस वक्त वह डिप्रेशन में थीं और पिता को गले लगा रही थी, लेकिन आश्रम में ही किसी ने ये वीडियो लीक कर दिया वो भी गलत जानकारी के साथ. प्रेम बाईसा ने यह भी आरोप लगाया था कि उनसे वीडियो लीक करने की धमकी देते हुए 20 लाख रुपए भी मांगे गए थे. 

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद उठते ये सवाल

  • तबीयत खराब थी तो पहले ही अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
  • प्रेम बाईसा को निजी कंपाउंडर ने किस दवा का इंजेक्शन दिया?
  • मौत के चार घंटे बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट क्यों?
  • क्या पिता ने साध्वी का ही सुसाइड नोट पोस्ट किया था? 
  • पोस्ट में अग्निपरीक्षा क्यों लिखा?
  • गले की खराश ठीक करने वाले इंजेक्शन ने कैसे ली जान? 
  • पिता या कंपाउंडर कौन छुपा रहा असली बात? 
  • पोस्टमार्टम से पहले शव को आश्रम क्यों ले जाया गया? 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जांच में जुट गई है. आश्रम के कुछ कमरों को सील किया गया है, मौके पर FSL की टीम भी बुलाई गई जो अहम साक्ष्य खंगाल रही है. वहीं, विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है. पुलिस ने इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवीलाल को हिरासत में ले लिया है. 

कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा? 

प्रेम बाईसा का जन्म राजस्थान के बालोतरा (तब बाड़मेर जिले में था) के परेऊ गांव में हुआ था. प्रेम बाईसा के माता-पिता दोनों ही शुरू से धार्मिक थे. दोनों एक-एक महीने तक उपवास रखते थे. एक दिन दोनों सांसरिक जीवन को त्याग बेटी प्रेम बाईसा के साथ हरिद्वार चले गए और फिर जोधपुर आकर रहने लगे. जब प्रेम बाईसा 5 साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया. पिता ने ही पाल पोस कर बड़ा किया. 

मां के नक्श ए कदम पर चलते हुए प्रेम बाईसा ने कम उम्र में ही कथा वाचन और धर्म कर्म के काज करना शुरू कर दिया था. मात्र 12 साल की उम्र से ही धार्मिक प्रवचन और कथा सुनाना शुरू कर दिया था. वह अपने पिता को ही गुरु मानती थीं. वह भजन भी गाया करती थीं. कई धार्मिक कथाएं की और जल्द ही दूर-दूर तक उनकी कथा और वचनों के बारे में बात होने लगीं. उन्होंने भागवत कथा, ‘नानी बाई को मायरो’ समेत देशभर में कई कथाएं की. बड़े धार्मिक आयोजनों में उन्हें बुलाया जाने लगा. इसके साथ ही वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही थीं. वे नाथ संप्रदाय से जुड़ी थीं और सनातन धर्म, भक्ति, नशा मुक्ति जैसे विषयों पर कथा करती थीं. उन्होंने मथुरा में धीरेंद्र शास्त्री की सनातन पदयात्रा में भी हिस्सा लिया था. 

 

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