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हरियाणा सरकार ने किया बड़ा फैसला, RTI में देरी पर लगे दंड की वसूली होगी सीधे पेंशन/सैलरी से

Haryana: हरियाणा सरकार ने RTI अधिनियम के दंड की वसूली के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक कदम उठाया है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को समय पर सूचना मिलेगी.

Image Source: Social Media

Haryana: हरियाणा सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने यह निर्देश जारी किए हैं कि हरियाणा सूचना का अधिकार आयोग द्वारा लगाए गए दंड की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित की जाए. मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इसके लिए सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड और निगम के मुख्य प्रशासकों, प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे हैं.
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के अंतर्गत यदि किसी जन सूचना अधिकारी (S.P.I.O.) द्वारा जानकारी देने में विलंब होता है, तो आयोग उन्हें 250 रुपए प्रति दिन की दर से दंड लगाता है. यह दंड अधिकतम 25,000 रुपए प्रति मामले तक लगाया जा सकता है. वर्तमान में विभिन्न विभागों से जुड़े S.P.I.O. पर कुल 2,94,87,000 रुपए से अधिक का लंबित दंड है.

मासिक किस्तों में वसूली का नियम

सरकार ने दंड की वसूली को आसान बनाने के लिए एकमुश्त वसूली के बजाय मासिक किस्तों में वसूली की व्यवस्था की है. इसका उद्देश्य यह है कि अधिकारियों पर अचानक अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े. अब यह राशि उनके वेतन या पेंशन से काटी जाएगी.

वसूली की दर इस प्रकार तय की गई है:

क्लास-ए अधिकारी: सेवा के दौरान 10,000 रुपए प्रति माह, सेवानिवृत्त होने पर 5,000 रुपए प्रति माह
क्लास-बी अधिकारी: सेवा के दौरान 7,000 रुपए प्रति माह, सेवानिवृत्त होने पर 3,500 रुपए प्रति माह
इस तरह, लंबित दंड की राशि धीरे-धीरे वसूली जाएगी, जिससे अधिकारी अपने वित्तीय बोझ को संभाल सकेंगे.

वसूली की प्रक्रिया

वसूली की जिम्मेदारी संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के आहरण एवं वितरण अधिकारी (D.D.O.) को दी गई है. D.D.O. मासिक वेतन या पेंशन से तय राशि काटकर इसे आयोग के खाते में जमा करेगा. इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि लंबित दंड समय पर वसूला जाए और RTI अधिनियम के तहत जवाबदेही कायम रहे.
सरकार का उद्देश्य है कि अब किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी से ढिलाई न हो और जनता को सूचना समय पर मिले. मासिक किस्तों की व्यवस्था से अधिकारियों पर अचानक भारी आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, और वे अपनी सेवा या पेंशन के हिसाब से भुगतान कर सकेंगे.

क्यों जरूरी है यह कदम 

सूचना का अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य जनता तक सटीक और समय पर जानकारी पहुंचाना है. कई बार अधिकारी जानकारी देने में देरी करते हैं, जिससे आयोग उन्हें दंड लगाता है. हालांकि, लंबित राशि की वसूली का सही तरीका न होने के कारण यह पैसा सरकार के पास नहीं पहुंच पाता था.
मासिक किस्तों की नई व्यवस्था से यह समस्या खत्म होगी.इससे न केवल लंबित दंड समय पर वसूला जाएगा, बल्कि अधिकारी भी अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार इसे चुका पाएंगे.

क्या इससे जनता को फायदा होगा?

अधिकारी समय पर जानकारी देंगे क्योंकि विलंब पर दंड कटेगा.
लंबित राशि की सही वसूली से RTI प्रक्रिया मजबूत होगी.
सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ेगी और सूचना के अधिकार का सही पालन होगा.

हरियाणा सरकार ने RTI अधिनियम के दंड की वसूली के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक कदम उठाया है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को समय पर सूचना मिलेगी.

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