×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बरसाना में लठमार होली की तैयारियां तेज, राधा रानी-ठाकुर जी के लिए बन रहीं खास पोशाकें

बरसाने की लठमार होली अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है, जो फाल्गुन मास में होली से पहले मनाई जाती है. इसमें बरसाना की महिलाएं (हुरियारिन) नंदगांव के पुरुषों (हुरियारे) को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं.

Author
19 Feb 2026
( Updated: 19 Feb 2026
02:20 PM )
बरसाना में लठमार होली की तैयारियां तेज, राधा रानी-ठाकुर जी के लिए बन रहीं खास पोशाकें
Advertisement

उत्तर प्रदेश के बरसाना में प्रसिद्ध लठमार होली की तैयारी जोरों पर है. गलियां रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा रही हैं, जबकि राधा रानी और ठाकुर जी के लिए खास पोशाकों का काम अंतिम चरण पर है. इस बीच वहां के स्थानीय दुकानदारों ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत की.

बरसाना में लठमार होली की धूम

दुकानदार महेश कुमार शर्मा ने बताया कि ठाकुर जी (श्री कृष्ण) को पोशाक बनाने में करीब 6 घंटे का समय लगता है. उन्होंने कहा, "इसमें राधा रानी और कान्हा जी दोनों के वस्त्र शामिल हैं. ये पोशाक घर पर ही कुशल कारीगरों से सिलवाए जाते हैं. हम इस काम को लगभग 30-35 साल से कर रहे हैं. इन वस्त्रों का साइज कई सालों से एक ही है."

लड्डू होली की खास तैयारियां

Advertisement

वहीं, दुकानदार संजीव अग्रवाल ने लड्डू होली की खास तैयारियों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को लड्डू होली के दिन राधा रानी, लड्डू गोपाल (श्री कृष्ण), और उनकी सखियों विशाखा और ललिता को नए वस्त्र धारण करवाए जाएंगे. ये पोशाकें बहुत बारीकी से तैयार की जाती हैं.

उन्होंने वस्त्रों की बारीकी पर कहा, "राधा रानी के वस्त्र में दरिया और कंचरी शामिल हैं. एक खास ओढ़नी भी बनाई गई है, जिसे राधा रानी और कन्हैया दोनों ओढ़ेंगे. श्रीकृष्ण के लिए जामा, दुपट्टा और पायजामा तैयार किया गया है. साथ ही उनकी सखियों विशाखा और ललिता के लिए भी अलग-अलग वस्त्र बनाए गए हैं. कुल मिलाकर इन वस्त्रों में 8 नग होते हैं. इस बार दिल्ली के अग्रवाल परिवार की ओर से ये खास कपड़े उपलब्ध करवाए गए हैं."

अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है लठमार होली

बता दें कि बरसाने की लठमार होली अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है, जो फाल्गुन मास में होली से पहले मनाई जाती है. इसमें बरसाना की महिलाएं (हुरियारिन) नंदगांव के पुरुषों (हुरियारे) को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं. यह पौराणिक मान्यता पर आधारित है कि श्री कृष्ण-राधा से होली खेलने बरसाना जाते थे, जहां उन्हें गोपी लाठियों से मारती थीं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें