Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

पीलीभीत में दीपोत्सव को लेकर बोले CM योगी, कहा- अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप प्रदेश की समृद्धि-विकास का बनता है कारण

पीलीभीत में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में सीएम योगी ने कहा कि आस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत, इसी से एकता के सूत्र में देश बंधा है.

Image Source-UPPRD
Loading Ad...

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप पूरे उत्तर प्रदेश की समृद्धि और विकास का कारण बनता है. दीपोत्सव में जलने वाले दीप केवल भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति को जीवंत नहीं करते, बल्कि प्रदेश की प्रगति, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य का भी प्रतीक हैं. आस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत है. इसी आस्था ने विविधताओं से भरे देश को एकता के सूत्र में बांध रखा है. मुख्यमंत्री मंगलवार को जनपद पीलीभीत के निरानपुर गांव में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे. इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना की, विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया. साथ ही उन्होंने पवित्र व्यास पीठ पर विराजमान श्री राम कथा के व्यास पूज्य संत अंजनी शरण जी को वस्त्र और फल भेंटकर सम्मानित किया और श्रद्धापूर्वक रामकथा का श्रवण किया. 

आस्था ने विविधताओं से भरे भारत को एकता के सूत्र में बांधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में करीब 200 देश हैं. सबकी अपनी विशेषताएं, पहचान, चुनौतियां और उपलब्धियां हैं. कहीं हजारों की आबादी है तो कहीं लाखों और करोड़ों में जनसंख्या है. 50 करोड़ से अधिक आबादी वाले देशों में भारत और चीन शामिल हैं. यूरोप एक दिखाई देता है, लेकिन वहां भी अलग-अलग राजनीतिक इकाइयों वाले अनेक देश हैं. इसके विपरीत भारत में उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक रूप-रंग, बोली और भाषा की विविधता होने के बावजूद पूरा देश एक भाव और एक भंगिमा के साथ एकता के सूत्र में बंधा है. इस एकता के पीछे हमारी आस्था है. यही आस्था आज इतनी बड़ी संख्या में लोगों को श्रीराम कथा के आयोजन में एकत्र कर रही है और यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है.

Loading Ad...

Loading Ad...

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का वाचन पांच हजार वर्ष पूर्व शुकतीर्थ में हुआ था. इतने लंबे समय बाद भी देश और दुनिया में जहां कहीं सनातन धर्मावलंबी रहते हैं, वहां उसी श्रद्धा और पवित्र भाव से हजारों-लाखों लोग कथा श्रवण के लिए जुटते हैं. श्रीराम कथा के आयोजन के पीछे भी हजारों वर्षों की परंपरा है. शारदीय नवरात्र के बाद गांव-गांव में रामलीलाओं का आयोजन होता है. गोस्वामी तुलसीदास जी ने गुलामी के कालखंड में जिस रामलीला परंपरा को आगे बढ़ाया, वह आज भी उसी उत्साह से जारी है. गांव के कलाकार इसमें भागीदारी करते हैं. पंडित राधेश्याम रामायणी के रामलीला संवादों ने इस परंपरा को नई ऊंचाई दी. मांगलिक और शुभ कार्यों में अखंड रामायण का पाठ भी हमारी इसी आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है.

पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में साकार हुआ राम मंदिर का संकल्प

Loading Ad...

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच सौ वर्षों तक रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए आस्था बिना रुके, बिना डिगे और बिना पीछे हटे संघर्ष करती रही. अंततः जब पूरा भारत एक स्वर में खड़ा हुआ तो अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ. उन्होंने दो नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और सैकड़ों रामभक्त घायल हुए थे. उस समय अयोध्या में जय श्रीराम बोलने और रामभक्तों के आने तक पर प्रतिबंध था. बुनियादी सुविधाओं का अभाव था. संकरी गलियां, गंदगी, खराब सड़कें और अव्यवस्थाएं थीं. अयोध्या वायु सेवा से नहीं जुड़ी थी और रेलवे की सिंगल लाइन थी.

उन्होंने कहा कि कल अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों की बैठक के लिए जाने के दौरान उन्होंने वहां का बदला हुआ स्वरूप देखा. प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. पर्व और त्योहारों पर यह संख्या पांच लाख से लेकर 50 लाख तक पहुंच जाती है. आज अयोध्या में चारों दिशाओं से चार लेन की सड़कें, बेहतर रेल सुविधाएं और हवाई सेवा उपलब्ध है. अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है. पिछली सरकारों ने जहां समस्याएं दीं, वहीं रामभक्तों की सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान की व्यवस्था की. उन्होंने कहा कि पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, आज उन पर पुष्पवर्षा होती है. पहले सवाल था कि रामलला टेंट से कब निकलेंगे, आज भव्य मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं.

Loading Ad...

सकारात्मकता से आती है श्रद्धा और आस्था, यहीं से खुलता है विकास का मार्ग

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामकथा का वास्तविक उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना है. मंदिर जाने और धार्मिक आयोजनों से जुड़ने का उद्देश्य मन की नकारात्मकता को समाप्त करना है. शास्त्रों में कहा गया है- श्रद्धावान लभते ज्ञानम्. श्रद्धा और आस्था से ही ज्ञान प्राप्त होता है.

उन्होंने कहा कि जहां नकारात्मकता होती है, वहां अराजकता, विध्वंस, अव्यवस्था, अशांति और असंतोष पैदा होता है. इसके विपरीत सकारात्मकता के साथ श्रद्धा, आस्था और प्रकाश आता है. यही सकारात्मक भाव विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है तथा लोगों के जीवन में खुशहाली लाता है.

Loading Ad...

बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ मिलना ही रामराज्य की वास्तविक अवधारणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत एक नए स्वरूप में आगे बढ़ रहा है. वर्ष 2017 से पहले जो धन इधर-उधर बर्बाद होता था, आज उसका उपयोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास के साथ गरीबों के कल्याण की योजनाओं में हो रहा है. उन्होंने कहा कि पहले लोगों को राशन, बिजली, अच्छी सड़कें और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता था. आयोजनों से पहले उपद्रव और दंगे शुरू हो जाते थे. आज प्रदेश में कर्फ्यू, दंगा और अराजकता नहीं है. गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है. नौजवानों को नौकरी, किसानों को किसान सम्मान निधि और बेटियों व व्यापारियों को सुरक्षा मिल रही है. उन्होंने कहा कि यही रामराज्य की अवधारणा है, जिसमें शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक पहुंचे. 

Loading Ad...

तुष्टिकरण से आतंकवाद बढ़ा, संतुष्टिकरण से मजबूत हुआ एक भारत-श्रेष्ठ भारत

मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टिकरण का भाव अनास्था और अराजकता को बढ़ावा देता है. देश जब तुष्टिकरण के रास्ते पर चला तो आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद बढ़ा. इसके विपरीत संतुष्टिकरण के भाव के साथ बिना भेदभाव प्रत्येक नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचने से देश आगे बढ़ा है. यही भाव आज एक भारत-श्रेष्ठ भारत की आधारशिला बन रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के साथ काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों का भी अभूतपूर्व विकास हो रहा है. काशी विश्वनाथ धाम में पहले जहां दस श्रद्धालु एक साथ दर्शन नहीं कर पाते थे, आज वहां 50 हजार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकते हैं. मथुरा-वृंदावन सज-संवर रहा है. मां विंध्यवासिनी धाम में सुविधाओं का विस्तार हुआ है. लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है और बरेली फिर से नाथ नगरी के रूप में अपनी पहचान बना रही है. यह विकास की अभिनव यात्रा है, जिसकी शुरुआत आस्था से होती है.

Loading Ad...

महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया को दिया प्रभु श्रीराम के आदर्शों का संदेश

उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख करते हुए कहा कि राम से दुनिया का पहला संवाद महर्षि वाल्मीकि ने कराया. उन्होंने आदि रामायण की रचना कर संस्कृत में दुनिया की पहली रामायण लिखी. आज दुनिया की कोई ऐसी भाषा नहीं है, जिसमें रामायण न लिखी गई हो, लेकिन इसका मूल आधार महर्षि वाल्मीकि हैं. उन्होंने श्रीराम को धर्म का साक्षात स्वरूप बताते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि का कथन 'रामो विग्रहवान धर्मः' आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है. जीवन में जब भी कोई चुनौती या समस्या आती है तो श्रीराम के आदर्श उसके समाधान का मार्ग दिखाते हैं. पुत्र, शिष्य, गुरु, पति, भाई और समाज के महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में मर्यादित आचरण की प्रेरणा प्रभु श्रीराम से मिलती है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भक्ति का भाव देखना हो तो मथुरा-वृंदावन जाइए, जहां श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं और वहां का रज-कण भी कृष्णमय है. जीवन की मर्यादा का आदर्श अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के चरित्र में दिखाई देता है.

Loading Ad...

ये भी पढ़ें: ‘पाकिस्तान के चमचों को मत बुलाइए’, दीया मिर्जा के दीवाली पर पटाखे ना फोड़ने की अपील पर भड़की कोएना मित्रा, एक्ट्रेस को लगाई लताड़

महंत योगी शांतिनाथ जी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक फक्कड़ और निराले संत थे. उनका जीवन सहज और अपनी ही मस्ती में रहने वाला था. अच्छे कार्यों में भी वे सहयोगी बनते थे. जीवन नश्वर है और अंततः सभी को इसे स्वीकार करना पड़ता है. उनके शरीर शांत होने के बाद यहां समाधि दी गई. 

ये भी पढ़ें: भारत से पंगा लेकर तिल-तिल मर रहा पाकिस्तान! पुलवामा के बाद बैन से निकला दिवाला, लगा $40 अरब का फटका, 69% बढ़ा आयात

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

इस अवसर पर शक्तिपीठ देवीपाटन के महंत मिथिलेश महाराज, श्री हनुमान गढ़ी मंदिर अयोध्या धाम से विराजमान महंत राजूदास, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और प्रभारी मंत्री पीलीभीत सरदार बलदेव सिंह औलख, मंत्री संजय गंगवार, आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉक्टर सुधीर गुप्ता, सहसंयोजक संजीव प्रताप सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक बिसलपुर विवेक वर्मा, पूरणपुर के विधायक बाबूराम पासवान, बरखेड़ा के विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत प्रशासक पीलीभीत दलजीत कौर, पूज्य संत जन और भक्तजन उपस्थित रहे.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...