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दिल्ली में अब नीति आयोग की तर्ज पर बनेगा DITI, रेखा गुप्ता सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान, जानें क्या बदलेगा

दिल्ली सरकार ने नीति आयोग की तर्ज पर दिल्ली इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (DITI) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. योजना विभाग ने इसे कैबिनेट मंजूरी के लिए भेज दिया है. इसे दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग की जगह नई व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है.

Image Source: IANS
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दिल्ली में विकास को लेकर सरकार अब एक नई संस्थागत व्यवस्था की ओर बढ़ रही है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने नीति आयोग की तर्ज पर दिल्ली इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (DITI) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. योजना विभाग की ओर से प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है. इस नई व्यवस्था के जरिए दिल्ली से जुड़े विकास के फैसलों में सिर्फ योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि आंकड़ों, शोध और विशेषज्ञों की राय पर भी ज्यादा जोर देने की तैयारी है.

दरअसल, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में DITI बनाने की घोषणा की थी. सरकार ने इसके लिए इस वित्त वर्ष में 59 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है. जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य दिल्ली के लिए लंबी अवधि की विकास रणनीति तैयार करना और अलग-अलग सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को बेहतर बनाना है. इसके तहत ‘Vision Delhi 2047’ जैसे दीर्घकालिक विकास दस्तावेज पर भी काम किया जा सकता है.

पुरानी व्यवस्था की जगह नई संस्थागत व्यवस्था

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जानकारी देते चलें कि DITI को दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग की जगह तैयार की जा रही नई व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है. दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग का गठन 2015 में किया गया था. इसका मकसद सरकार को नीतिगत सलाह देना, देश-दुनिया की बेहतर योजनाओं का अध्ययन करना और विकास से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देना था. साल 2024 में तत्कालीन उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आयोग के गैर-सरकारी सदस्यों को हटाने और इसे अस्थायी रूप से भंग करने को मंजूरी दी थी. नियुक्तियों, सदस्यों के वेतन और आयोग के कामकाज को लेकर उपराज्यपाल कार्यालय और तत्कालीन दिल्ली सरकार के बीच मतभेद भी सामने आए थे.

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डेटा और रिसर्च पर रहेगा जोर

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प्रस्तावित DITI का सबसे अहम पहलू इसका डेटा और रिसर्च आधारित कामकाज होगा. संस्था नीतिगत शोध, विश्लेषण और प्रभाव आकलन के जरिए विभागों को योजनाएं तैयार करने में मदद करेगी. साथ ही सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी, उनके असर की समीक्षा और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी भूमिका निभाएगी. सरकार ने इसके लिए आठ प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की है. इनमें अर्थव्यवस्था और वित्त, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा, शहरी विकास एवं बुनियादी ढांचा, सतत विकास लक्ष्य और आईटी एवं डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं.

इस आयोग की CM रेखा गुप्ता होंगी अध्यक्ष

प्रस्ताव के मुताबिक मुख्यमंत्री DITI की अध्यक्ष होंगी, जबकि उपाध्यक्ष की नियुक्ति मुख्यमंत्री करेंगी. सभी मंत्री, मुख्य सचिव, डीडीए के उपाध्यक्ष, नगर निगम आयुक्त और एनडीएमसी के अध्यक्ष इसके सदस्य होंगे. योजना विभाग के प्रशासनिक सचिव को सदस्य सचिव बनाया जाएगा. जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया जा सकेगा. वहीं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति बनाई जाएगी, जो योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने का काम करेगी.

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बताते चलें कि इस तरह DITI का प्रस्ताव सिर्फ एक नई संस्था बनाने तक सीमित नहीं है. इसका बड़ा उद्देश्य दिल्ली के विकास से जुड़े फैसलों को ज्यादा व्यवस्थित, शोध आधारित और लंबे समय की जरूरतों के अनुरूप बनाने की कोशिश है. हालांकि अंतिम तस्वीर कैबिनेट की मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी.

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