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योगी सरकार का फैसला, UP में पुरानी रजिस्ट्रियों के डिजिटाइजेशन के लिए 6 माह का समय बढ़ा
UP: पुरानी रजिस्ट्रियों के डिजिटाइजेशन से ज़मीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में कूटरचना और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी. साथ ही सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे, जिससे भविष्य में विवादों की संभावना भी कम होगी और लोगों को अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से मिल सकेंगे.
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Old Registries Digitization: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के उप निबंधक कार्यालयों में मौजूद पुरानी रजिस्ट्रियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम तेज़ कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि इस प्रक्रिया को अगले छह महीनों के भीतर पूरा कराया जाएगा. इसके तहत वर्ष 2002 से 2017 के बीच पंजीकृत सभी विलेखों की स्कैनिंग और इंडेक्सिंग का काम पूरा किया जाएगा, ताकि ज़मीन और संपत्ति से जुड़े पुराने रिकॉर्ड आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हो सकें.
परियोजना की अवधि छह महीने और बढ़ी
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कैबिनेट बैठक में इस बात को भी मंजूरी दी गई कि इस डिजिटाइजेशन परियोजना की अवधि को अगले छह महीनों तक बढ़ाया जाए. यह परियोजना पहले से ही अपने अंतिम चरण में है और सरकार ने साफ किया है कि इसके लिए किसी अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं पड़ेगी. बचा हुआ काम पहले से स्वीकृत धनराशि में ही पूरा किया जाएगा.
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95 करोड़ से शुरू हुई योजना, अब अंतिम दौर में
इस योजना को सबसे पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी. बाद में कुछ व्यावहारिक कारणों से काम में देरी हुई, जिसके चलते जुलाई 2024 में परियोजना की अवधि बढ़ाई गई और इसकी कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई. वित्तीय वर्ष 2024–25 के अंत तक 109.05 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं. अब जो काम बचा है, वह उपलब्ध बजट में ही पूरा किया जाएगा.
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प्रदेश में लगभग पूरा हो चुका है डिजिटाइजेशन का काम
प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99 प्रतिशत से अधिक और स्कैनिंग का करीब 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. अधिकांश जिलों में यह काम शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है हालांकि एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज जैसे कुछ जिलों में थोड़ा-बहुत काम अभी बाकी है, जिसे अगले छह महीनों में पूरा कर लिया जाएगा.
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दो स्तर पर हो रही है दस्तावेजों की जांच
डिजिटाइजेशन के काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने दो स्तर पर जांच और सत्यापन की व्यवस्था की है. पहले स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा दस्तावेजों की जांच की जाती है. इसके बाद दूसरे स्तर पर मंडलों और वृत्तों के उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा दोबारा सत्यापन किया जाता है. यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक सभी दस्तावेजों का शत-प्रतिशत सत्यापन पूरा नहीं हो जाता.
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फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक, रिकॉर्ड होंगे सुरक्षित
पुरानी रजिस्ट्रियों के डिजिटाइजेशन से ज़मीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में कूटरचना और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी. साथ ही सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे, जिससे भविष्य में विवादों की संभावना भी कम होगी और लोगों को अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से मिल सकेंगे.
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