“हम दो, हमारे दो दर्जन”, मुरादाबाद में AIMIM नेता शौकत अली का विवादित बयान

AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुरादाबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान जनसंख्या को लेकर विवादित बयान दिया है. मंच से नया नारा देते हुए उन्होंने कहा, “हम दो, हमारे दो दर्जन.” उन्होंने मुसलमानों से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की.

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09 Feb 2026
( Updated: 09 Feb 2026
04:46 PM )
“हम दो, हमारे दो दर्जन”, मुरादाबाद में AIMIM नेता शौकत अली का विवादित बयान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुरादाबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए जनसंख्या बढ़ाने को लेकर विवादित बयान दिया है.

AIMIM नेता ने मुसलमानों से की ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील

उन्होंने मंच से नया नारा देते हुए कहा, "हम दो, हमारे दो दर्जन." शौकत अली ने कहा कि उनके खुद के आठ बच्चे हैं और उनके बड़े भाई के 16 बच्चे हैं. उन्होंने मुसलमानों से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की.

उनका कहना था कि जब अल्लाह बच्चे दे रहा है तो उन्हें स्वीकार करना चाहिए और जब तक देता रहे, लेते रहना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग मुस्लिम आबादी बढ़ने से परेशान हैं, लेकिन आबादी बढ़ने से देश मजबूत होगा.

समाजवादी पार्टी पर हमला

इसके अलावा, शौकत अली ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर का नाम लेते हुए कहा कि वे मुरादाबाद में शराब बेचने का काम करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा वाले खुद शराब बेचते हैं और फिर एआईएमआईएम पर भाजपा की बी टीम होने का इल्जाम लगाते हैं.

मदरसे, मोब लिंचिंग और सुरक्षा का मुद्दा

शौकत अली ने मंच से मोब लिंचिंग और अन्य मुद्दों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अब हिंदू संगठनों की महिलाएं भी मुसलमानों के साथ बदतमीजी करने लगी हैं. मुरादाबाद में कई सौ मदरसे बंद कर दिए गए हैं और मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लड़कियों के सरेआम नकाब खींचे जाते हैं, गोश्त के नाम पर मोब लिंचिंग होती है, ट्रेन-बस में सफर भी सुरक्षित नहीं है, और दाढ़ी नोची जाती है.

यह बयान मुरादाबाद की जनसभा में दिए गए, जहां भीड़ को आकर्षित करने के लिए शौकत अली ने अपने पारिवारिक उदाहरण दिए. एआईएमआईएम के इस बयान से राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है. कई लोग इसे जनसंख्या नीति के खिलाफ बताते हैं, जबकि पार्टी समर्थक इसे धार्मिक और सामाजिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं.

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