महाराष्ट्र में घुसपैठ को जड़ से खत्म करने की तैयारी, CM फडणवीस के एंटी टेरर सेल ने कसी बांग्लादेशियों की नकेल!

मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या को जड़ से खत्म करने की तैयारी है. सीएम फडणवीस के आदेश पर पुलिस और एंटी टेरर सेल ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है. इसी कड़ी में 30 बांग्लादेशियों को डिपोर्ट करने की तैयारी है!

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09 Feb 2026
( Updated: 09 Feb 2026
07:25 PM )
महाराष्ट्र में घुसपैठ को जड़ से खत्म करने की तैयारी, CM फडणवीस के एंटी टेरर सेल ने कसी बांग्लादेशियों की नकेल!
CM Fadnavis (File Photo)

मुंबई पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान तेज करते हुए बीते कुछ दिनों में बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है. इस विशेष अभियान के तहत मुंबई के अलग-अलग इलाकों से कुल 30 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है, जो लंबे समय से फर्जी पहचान पत्रों और दस्तावेजों के सहारे शहर में रह रहे थे. पुलिस ने सभी को डिटेन कर उनके खिलाफ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है.

मुंबई में 30 घुसपैठियों को डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू

पुलिस जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए कई बांग्लादेशी नागरिकों ने फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य भारतीय पहचान दस्तावेज बनवाकर मुंबई में नौकरी, घर और व्यवसाय हासिल किए थे. इनमें से कई मामलों में एजेंटों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों की भूमिका भी सामने आई है. खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर इन लोगों को पकड़ा. पूछताछ के बाद उनकी बांग्लादेशी नागरिकता की पुष्टि हुई है. इसके बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) और अन्य संबंधित एजेंसियों के समन्वय से डिपोर्टेशन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है. बांग्लादेश उच्चायोग को भी इसकी सूचना दी गई है.

नकली दस्तावेज गैंग का भंडाफोड़

इसी अभियान के दौरान मुंबई पुलिस ने फर्जी राशन कार्ड बनाने वाले एक बड़े नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया है. दिंडोशी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नकली राशन कार्ड बनाने वाले गिरोह से जुड़े एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान सुजल दयाल (21) के रूप में हुई है, जो विरार इलाके का रहने वाला है. उसके कब्जे से पुलिस ने 350 नकली राशन कार्ड, प्रिंटर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं. ये राशन कार्ड देखने में बिल्कुल असली जैसे थे और इनका इस्तेमाल पहचान साबित करने व सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए किया जा रहा था.

किन इलाकों में कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए नकली राशन कार्डों पर वसई, विरार, मीरा-भायंदर, नालासोपारा, दहिसर, बोरीवली, मलाड और कांदिवली जैसे इलाकों के पते दर्ज हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क बड़े स्तर पर सक्रिय था. पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसके पिता पहले यह अवैध काम करते थे और उनकी मृत्यु के बाद उसने इस धंधे को संभाल लिया. पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में अवैध विदेशी नागरिकों, खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों, ने पहचान स्थापित करने के लिए इसी नेटवर्क से फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं. आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 12 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. मामले की गहन जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है.

मुंबई में एंटी टेरर सेल की धरपकड़ तेज!

वहीं बीते दिनों मुंबई पुलिस की कुरार इकाई को भी बड़ी सफलता मिली. मलाड पूर्व के पठानवाड़ी इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे वहां रह रहे थे. एंटी-टेरर सेल (ATC) को सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से इलाके में रहकर छोटे-मोटे व्यवसाय कर रहे हैं. इसके बाद 2 से 6 फरवरी के बीच कुरार पुलिस और एटीसी की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी की.

कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए चारों संदिग्धों ने पूछताछ में खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया. उनके पास से बांग्लादेश का नेशनल आईडी कार्ड, नागरिकता प्रमाणपत्र और स्थायी निवास से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जांच में यह भी सामने आया कि ये सभी लोग बिना वैध दस्तावेजों के भारत में दाखिल हुए थे और लंबे समय से मलाड पूर्व में रह रहे थे. पुलिस ने इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और संबंधित प्राधिकरणों से रिस्ट्रिक्शन ऑर्डर लेकर सभी को बांग्लादेश डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

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डीसीपी महेश चिमटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजीव तावड़े की निगरानी में चलाए जा रहे इस अभियान को मुंबई पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा.

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