भोजशाला विवाद पर साध्वी प्रज्ञा की दो टूक, ‘हिंदू धर्म में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं, हमें अपना स्वतंत्र मंदिर चाहिए’

बीजेपी नेता और पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला विवाद पर कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि, ‘अब हिंदू जाग चुका है, और अपने धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं करेगा’.

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23 Jan 2026
( Updated: 23 Jan 2026
02:01 PM )
भोजशाला विवाद पर साध्वी प्रज्ञा की दो टूक, ‘हिंदू धर्म में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं, हमें अपना स्वतंत्र मंदिर चाहिए’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला विवाद को लेकर कहा है कि यह मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है. यहां शांति से पूजा जारी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हिंदू अपने धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं करेगा. 

‘मैं कोर्ट का बहुत सम्मान करती हूं’- साध्वी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट का बहुत सम्मान करती हूं. यह एक संवैधानिक संस्था है. हालांकि, भोजशाला मामले में उसका फैसला अस्थायी है. सिर्फ एक व्यवस्था बनाई गई है, जिससे वे (मुस्लिम पक्ष) अपनी नमाज पढ़ सकें और हम अपने धर्म के अनुसार पूजा कर सकें.”

‘हिंदू समाज जाग चुका है’- साध्वी प्रज्ञा सिंह

साध्वी प्रज्ञा सिंह ने आगे कहा कि परतंत्र काल में सरस्वती मंदिर पर कुठाराघात हुआ था. आज भी उस मंदिर के साथ न्याय नहीं हुआ है. हिंदू समाज को हमेशा से दबाया और सताया गया है. पूर्व सांसद ने कहा कि आज हिंदू समाज जाग चुका है, जिसे अपने देवी-देवताओं या मंदिरों के अपमान का बदला नहीं लेना है, बल्कि उस दाग को हटाकर फिर से मंदिरों के वैभव को लौटाकर लाना है.

‘हमें अपना मंदिर स्वतंत्र चाहिए’

उन्होंने कहा, "यह मां सरस्वती का मंदिर था, जिस तरह से वर्तमान में उसे रखा जा रहा है. अब हिंदू प्रयास कर रहे हैं. मंदिर का स्थायी हल निकलना जरूरी है. हमें अपना मंदिर स्वतंत्र चाहिए. मुगल काल में जिस तरह मंदिरों के अपमान के लिए मस्जिदें खड़ी की गईं, वह अब स्वीकार नहीं होना चाहिए.”

‘कांग्रेस ने सनातन धर्म के ऊपर कुठाराघात किया’

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कभी इस मंदिर पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि हिंदुओं और सनातन धर्म के ऊपर कुठाराघात किया. दशकों से यही देखा गया है कि कभी भी हिंदुओं के साथ न्याय नहीं हुआ.

‘हिंदू धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं’

उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारी मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है. इसे बिना किसी रुकावट के रहना चाहिए, और यहां शांति से पूजा जारी रहनी चाहिए. किसी भी तरह की पाबंदी की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत आजाद है. हर किसी को अपनी पूजा पद्धति का पालन करने की आजादी है. उन्होंने कहा, "हिंदू धर्म में समुदायों और संप्रदायों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन हमने कभी भी हिंदू धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की है और न ही कभी करेंगे.”

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