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'RSS के लोग अच्छे हैं...', संघ के पीछे पड़े रहने वाले कांग्रेसी मंत्री ने अब की तारीफ, मार्च निकालने की इजाजत दी
RSS को बैन करने का दावा करने वाले कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस बार नरम रुख अपनाते हुए चौंका दिया है. उन्होंने कहा, RSS के लोग अच्छे हैं.
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कर्नाटक की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सत्ताधारी कांग्रेस के बीच बयानबाजी से अक्सर सियासी पारा हाई रहता है. कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष प्रियांक खड़गे RSS की फंडिंग से लेकर कानूनी अस्मिता पर सवाल उठाते रहते हैं, लेकिन इस बार प्रियांक खड़गे ने संघ की तारीफ की है.
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग 'अच्छे' हैं. दरअसल, RSS ने कर्नाटक में मार्च निकालने के लिए परमिशन मांगी थी. जिसे लेकर सरकार में तनातनी थी. अब कांग्रेस ने राज्य में संघ को मार्च की परमिशन दे दी है. प्रियांक खड़गे ने कहा, RSS ने प्रदेशभर में मार्च के लिए पूरी डिटेल राज्य सरकार को दे दी है.
प्रियांक खड़गे ने अपनाया नरम रुख
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बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि सरकार को पहले यह जानकारी नहीं थी कि 'मार्च' कौन आयोजित कर रहा है, लेकिन RSS ने अब अपनी शाखाओं में शामिल लोगों के नामों सहित सभी आवश्यक जानकारी दे दी है.
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उन्होंने कहा कि आप (मीडिया) ने हमें यह कहकर डरा दिया था कि वे अनुमति नहीं मांगेंगे या जानकारी नहीं देंगे. RSS के लोग बहुत अच्छे हैं. जहां भी उन्होंने मार्च निकाले हैं, उन्होंने जानकारी दी है और अनुमति भी मांगी है. कुछ जगहों पर अनुमति नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सहयोग किया.
मीडिया पर निशाना साधते हुए खड़गे ने आरोप लगाया कि संगठन द्वारा सभी आवश्यकताओं का पालन करने के बावजूद, मीडिया RSS के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि RSS की ओर सेदी गई जानकारी से सरकार को यह जानने में मदद मिली है कि उसकी प्रत्येक शाखा से कौन-कौन जुड़ा हुआ है.
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फंड को लेकर कसा तंज
हालांकि तारीफ के साथ प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर RSS की फंडिंग को लेकर निशाना साध. उन्होंने कहा, RSS अपना रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं और अपने फंड का विवरण भी सार्वजनिक कर सकते हैं, जिसमें यह भी शामिल होगा कि पैसा देश के भीतर से आ रहा है या विदेश से, सब कुछ पारदर्शी हो जाएगा.
खड़गे ने आगे कहा कि RSS ने पूरे कर्नाटक में अनुमति मांगी थी और अपने आवेदनों को पुलिस विभाग को मात्र सूचना देने के रूप में नहीं बताया था. खड़गे ने कहा कि उन्होंने इसे सही तरीके से किया है. उनके आवेदनों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वे केवल पुलिस विभाग को सूचना दे रहे हैं. उन्होंने पूरे कर्नाटक में अनुमति मांगी है, वे बदल गए हैं. वे सौ वर्षों से इसी तरह काम करते आ रहे हैं, और उन्हें भी कुछ समय चाहिए.
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विजयदशमी मार्च पर हुआ था विवाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयदशमी मार्ग मार्च (पथ संचालन) से जुड़ा विवाद मुख्य रूप से कानूनी अनुमतियों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध पर केंद्रित है. यह मुद्दा तब और बढ़ गया जब कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि RSS को अपने मार्ग मानचित्रों के बारे में अधिकारियों को केवल ‘सूचित’ करने के बजाय औपचारिक पुलिस अनुमति प्राप्त करनी होगी.
खड़गे ने आंतरिक पत्र साझा किए जिनमें RSS ने स्थानीय पुलिस को रसद समन्वय के लिए ‘सूचित’ किया था. गृह विभाग ने तर्क दिया कि चूंकि इन जुलूसों में सैकड़ों मार्गों पर दो लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल होते हैं, इसलिए यातायात, सुरक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के सुचारू प्रबंधन के लिए पुलिस को पूर्व औपचारिक आवेदन की आवश्यकता होती है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित करने वाले कानून RSS पर भी समान रूप से लागू होते हैं.
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इससे पहले कई मौकों पर प्रियांक खड़गे RSS की फंडिंग और अस्तित्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने संघ को ‘शैतान’ तक कह डाला था. उन्होंने संगठन की फंडिंग, कानूनी स्थिति और संवैधानिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हुए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए थे, लेकिन इस बार मंत्री प्रियांक खड़गे के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं.
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प्रियांक खड़गे ने कर्नाटक में सार्वजनिक जगहों पर RSS की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग भी की थी. इसके बाद कैबिनेट ने 18 अक्टूबर 2025 को फैसला किया था कि सार्वजनिक जगहों, सड़कों और सरकारी परिसरों में बिना परमिशन के पथ संचलन या शाखा नहीं लगाई जा सकेगी. हालांकि बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ बेंच ने राज्य सरकार के आदेश पर स्टे लगा दिया था
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