'राष्ट्रहित सर्वोपरि...', शशि थरूर ने कांग्रेस से नाराजगी पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख पर कायम
शशि थरूर ने केरल कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हुई अहम बैठक में शामिल न होने को लेकर उठी सियासी अटकलों पर विराम लगा दिया. थरूर ने दो टूक कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के खिलाफ नहीं गया, लेकिन जब बात पार्टी और देश के हित की आएगी, भारत सर्वोपरि होगा.
Follow Us:
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के केरल से जुड़ी अहम पार्टी बैठकों में शामिल न होने को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई थीं. अब खुद थरूर ने इस पर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा है कि उन्होंने कभी भी पार्टी की लाइन के खिलाफ काम नहीं किया और ना ही उल्लंघन किया. उन्होंने दो टूक कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पर पार्टी लाइन से इतर उन्होंने बात की थी, जिस पर वो आज भी कायम हैं.
थरूर ने KLF में कहा कि मैं यह बहुत साफ़ शब्दों में कहना चाहता हूं कि अगर आप मेरे सार्वजनिक बयानों और रिकॉर्ड को देखें, तो मैंने कभी भी संसद में अपनी पार्टी के किसी भी आधिकारिक रुख का उल्लंघन नहीं किया है. उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ एक विषय ऐसा रहा है, जिस पर सैद्धांतिक आधार पर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आया और वह था ऑपरेशन सिंदूर. इस दौरा इस पर मेरा जो स्टैंड था वो बेहद साफ़ था. उन्होंने दो टूक कहा कि मैं सभी को बता देना चाहता हूं कि मैं बिनी किसी खेद के आज भी अपने बयान पर क़ायम हूं.
थरूर ने कार्यक्रम में कहा कि मैं यहां संविधान पर चर्चा करने आया था, न कि राजनीति पर, लेकिन फिर भी मैं बहुत साफ़ शब्दों में कहना चाहता हूं कि अगर आप मेरे किसी भी सार्वजनिक बयान या रिकॉर्ड देखें, तो आप पाएंगे कि मैंने कभी भी संसद में पार्टी की किसी भी आधिकारिक लाइन का उल्लंघन नहीं किया है.
उन्होंने आगे कहा कि सिद्धांत के स्तर पर जिस एकमात्र मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आया, वह ऑपरेशन सिंदूर था, जहां मैंने बेहद मज़बूती से अपना पक्ष रखा. और मैं आप सभी से स्पष्ट कहना चाहता हूं कि उस रुख को लेकर मुझे कोई पछतावा नहीं है. क्योंकि पहलगाम की घटना के बाद, एक पर्यवेक्षक और विश्लेषक के रूप में मैंने अपनी बात रखी थी, जैसे कि संसद में वकील हैं, डॉक्टर हैं, कारोबारी हैं और कुछ लेखक भी हैं, और मैं भी उनमें से एक हूं.
थरूर ने आगे कहा कि एक लेखक के तौर पर मैंने इंडियन एक्सप्रेस / नॉर्थ इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम लिखा था. मैंने उस लेख का शीर्षक रखा था,“हिट हार्ड, हिट स्मार्ट”, उस लेख में मैंने क्या कहा था? मैंने सबसे पहले यह कहा था कि यह पहलगाम हमला, बिना सज़ा या जवाब के नहीं छोड़ा जा सकता. इसका जवाब देना ज़रूरी है, एक ठोस और निर्णायक कार्रवाई होनी चाहिए यानी हमें प्रहार करना होगा.
भारत लंबे युद्ध में नहीं फंस सकता था: थरूर
थरूर ने ये भी इस दौरान कहा कि लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा था कि हम एक ऐसा देश हैं जिसका मुख्य फोकस विकास है. हम पाकिस्तान के साथ किसी लंबे और खिंचने वाले संघर्ष में नहीं फंसना चाहिए. मैंने यह भी कहा था कि भारत एक ऐसा देश है जो बाहरी निवेश पर निर्भर है, और निवेशकों को युद्ध क्षेत्र पसंद नहीं आते. इसलिए हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे भारत एक युद्ध क्षेत्र बन जाए.
पाकिस्तान को जवाब तो देना बनता था: थरूर
थरूर ने इस दौरान ये भी कहा कि, इसीलिए मैंने सुझाव दिया था कि केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाए, उनकी संख्या सीमित हो, और दुनिया को साफ़ संदेश दिया जाए कि हम केवल आतंकवाद पर हमला कर रहे हैं, पाकिस्तान पर नहीं. यह पाकिस्तान की आतंकवाद पर लगाम लगाने में असमर्थता और अनिच्छा है, जिसने हमें ऐसा करने के लिए मजबूर किया है. मैंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान को तनाव बढ़ाने का कोई और बहाना नहीं दिया जाना चाहिए.
उन्होंने आगे बताया कि यह सब मैंने स्पष्ट लिखा था, साफ-साफ अक्षरों में दर्ज है. आप चाहें तो गूगल कर सकते हैं, “हिट हार्ड, हिट स्मार्ट, शशि थरूर, इंडियन एक्सप्रेस”. अब आप मेरी हैरानी और सच कहूं तो खुशी की कल्पना कर सकते हैं कि लगभग दस दिन बाद भारत ने वही किया, जिसकी मैंने सिफ़ारिश की थी.
'ऑपरेशन सिंदूर की कैसे करता आलोचना?'
इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर सवाल उठाने वालों से पूछा कि, तो ऐसे में आप मुझसे यह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि मैं उसी कदम की आलोचना करूँ, जिसकी सिफ़ारिश मैंने खुद की थी? मैंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद भी उसका पूरा समर्थन किया.
दूसरी बात, जब सरकार ने (मिशन पाक बेनकाब के लिए) मुझे भेजा, तो सिर्फ़ मुझे ही नहीं, बल्कि कई अन्य दलों के नेताओं को भी बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों के तहत भेजा गया था. किसी कारणवश, मेरी पार्टी को मेरा वहां जाना पसंद नहीं आया.
जब बात भारत की सुरक्षा की हो, देश सबसे पहले: शशि थरूर
थरूर ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि आप उनसे पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों. लेकिन जैसा मैंने तब सार्वजनिक रूप से कहा था और आज फिर दोहराना चाहता हूं, नेहरू जी ने बहुत फेमस सवाल पूछा था, “अगर भारत मर जाए, तो कौन जिएगा?” जब भारत दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और दुनिया में उसकी प्रतिष्ठा का सवाल हो, तब भारत सबसे पहले आता है.
भारत सर्वोपरि होगा: थरूर
उन्होंने ये भी कहा कि राजनीतिक दल महत्वपूर्ण होते हैं. वे एक बेहतर भारत बनाने का माध्यम होते हैं. हम तरीकों को लेकर आपस में असहमत हो सकते हैं. लेकिन जब भी भारत के हितों की बात आएगी है, तो भारत सर्वोपरि होगा है. यही मेरा बहुत सरल और स्पष्ट जवाब है.
आपको बताएं कि यह बैठक शुक्रवार को पार्टी हाईकमान की ओर से बुलाई गई थी, जिसमें आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा होनी थी. बैठक की अध्यक्षता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने की. थरूर के बैठक में न आने के बाद मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और इसे केरल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा जाने लगा.
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि थरूर हाल ही में कोच्चि में हुई एक पार्टी बैठक में अपने साथ हुए व्यवहार से नाराज हैं. इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे. देखते ही देखते यह चर्चा पार्टी के भीतर कथित असंतोष की कहानी बन गई.
VIDEO | Responding to question from the audience at Kerala Literature Festival in Kozhikode, Congress MP Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) said:
— Press Trust of India (@PTI_News) January 24, 2026
"I have at no stage violated any of the Congress’ positions in Parliament; the only issue on which there has been public disagreement on… pic.twitter.com/ALATWmTNGc
पार्टी से नाराज नहीं हैं थरूर!
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पार्टी के अंदरूनी मामलों को सार्वजनिक मंच पर नहीं लाना चाहते. उन्होंने कहा, "जो भी मुझे कहना था, मैंने पार्टी नेतृत्व को बता दिया है. इसे सार्वजनिक रूप से कहना सही नहीं है." थरूर ने यह भी कहा कि मीडिया में कई तरह की बातें चलती रहती हैं, लेकिन हर बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि वह पार्टी की हालिया गतिविधियों से नाराज हैं या नहीं.
कांग्रेस की बैठक से दूरी पर थरूर ने तोड़ी चुप्पी!
दिल्ली की बैठक में शामिल न हो पाने की वजह बताते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी थी. उन्होंने कहा कि उनके पास पहले से तय कार्यक्रम थे और समय की कमी के चलते दिल्ली से कोझिकोड आना-जाना संभव नहीं था.
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कोझिकोड में एक साहित्यिक महोत्सव में अपनी नई किताब के विमोचन के लिए मौजूद थे. उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्हें राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भी हिस्सा नहीं ले पाने का अफसोस रहा था.
यह भी पढ़ें
थरूर ने कहा, "एक बार मैं जयपुर साहित्य महोत्सव में नहीं जा सका था, इसलिए इस बार मैं इस कार्यक्रम को छोड़ना नहीं चाहता था." इस बीच, कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने भी थरूर का समर्थन करते हुए कहा कि वह सिर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक मजबूत साहित्यिक व्यक्तित्व भी हैं, इसलिए उनकी व्यस्तताओं को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए.
टिप्पणियाँ 0
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें