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महादेव बैटिंग एप केस में CBI को बड़ी सफलता, किंगपिन सौरभ चंद्राकर अरेस्ट, ओमान से भारत लाया गया
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. CBI और ED ने सरकार के जरिए ओमान को सौरभ के प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा था.
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महादेव बैटिंग एप केस में CBI को बड़ी सफलता मिली है. इस अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को अरेस्ट कर लिया गया है. CBI उसे ओमान से प्रत्यर्पण कर भारत लेकर आई. बताया जा रहा है, CBI ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसे ओमान में पकड़ा है.
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब उसे रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. CBI के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. इसके आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे पकड़ लिया था. प्रत्यर्पण के बाद आरोपी की मेडिकल जांच कराई जाएगी और ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर ले जाया जाएगा.
ओमान भेजा गया था प्रस्ताव
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इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा. इसमें आरोपी के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी दिए गए थे. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं. इसके अलावा ED के मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की गई है.
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The Central Bureau of Investigation (CBI), in coordination with other Central Agencies, has successfully secured the extradition of Sourabh Chandrakar, the promoter of the Mahadev App illegal betting syndicate, from Oman (Pics Source: CBI) https://t.co/HgFzphJzy3
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">November 1, 2026
क्या है महादेव बैटिंग एप केस?
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महादेव बैटिंग ऐप केस एक बड़ा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है. महादेव ऐप (या महादेव ऑनलाइन बुक) एक अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म था. जो क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम्स (पोकर, तीन पत्ती) और अन्य खेलों पर सट्टा लगाता था.
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इस केस में मुख्य आरोपी छत्तीसगढ़ का सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल हैं. दोनों ने कथित तौर पर 2018-19 के आसपास ये नेटवर्क खड़ा किया और विदेश भाग गए थे. ED के अनुसार महादेव और इससे जुड़ी साइट्स (Skyexchange, Lotus365) से पिछले 7-10 साल में हजारों करोड़ की अवैध कमाई हुई. इसका पैसा म्यूल अकाउंट्स, हवाला और अन्य तरीकों से लॉन्ड्र किया जाता था. दुबई की लग्जरी प्रॉपर्टी (बुर्ज खलीफा सहित) और शेयर मार्केट में भी निवेश के आरोप हैं.