'अभी बहुत तमाशा होगा…', ओवैसी ने शरद पवार के संसदीय भविष्य पर उठाया बड़ा सवाल, पूछा- अब कैसे बनेंगे सांसद
राज्यसभा चुनावों से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शरद पवार के भविष्य पर सवाल उठाए हैं. ओवैसी ने कहा कि पवार के पास दोबारा राज्यसभा पहुंचने के लिए जरूरी विधायक नहीं हैं और आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है.
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देश में एक बार फिर राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बीच लोकसभा सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता शरद पवार (Sharad Pawar) के संसदीय भविष्य को लेकर बड़ा दावा कर सियासी माहौल गर्मा दिया है. ओवैसी ने कहा है कि शरद पवार के पास दोबारा राज्यसभा पहुंचने के लिए जरूरी विधायकों का आंकड़ा नहीं है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र में बीएमसी (BMC)समेत कई बड़े निकायों के चुनाव होने वाले हैं और पवार का राज्यसभा कार्यकाल मार्च में समाप्त हो रहा है.
ओवैसी का शरद पवार पर बड़ा बयान
अपने बयान में ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने सीधे तौर पर शरद पवार की राजनीतिक ताकत पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पवार साहब का राज्यसभा कार्यकाल मार्च तक है, लेकिन उसके बाद उनके पास दोबारा जाने की संख्या कहां है. उन्होंने गठबंधन की मजबूती पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नंबर चाहिए और वही सबसे बड़ी सच्चाई है. ओवैसी ने यह भी दावा किया कि आने वाले दिनों में इसे लेकर बड़ा राजनीतिक तमाशा देखने को मिलेगा. उनके इस बयान ने न सिर्फ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है.
कैसे निकलेगा कोई रास्ता?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो ओवैसी का यह बयान केवल शरद पवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए उन्होंने आने वाले राज्यसभा चुनावों की जटिल गणित की ओर इशारा किया है. महाराष्ट्र में विधानसभा की संख्या और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच किसी भी वरिष्ठ नेता का राज्यसभा पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा है. खासतौर पर तब, जब गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हों.
कई वरिष्ठ नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल
इन राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इस दौरान कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इनमें केंद्र सरकार के मंत्री और कई बड़े दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं. यदि ये नेता दोबारा राज्यसभा नहीं पहुंच पाते हैं, तो उनकी राजनीतिक भूमिका और सरकार में मौजूदगी पर सीधा असर पड़ सकता है. ऐसे में सभी दल अपनी रणनीति बेहद सावधानी से तय कर रहे हैं. जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल वर्मा और जॉर्ज कुरियन जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा रामदास अठावले, रामगोपाल यादव, प्रियंका चतुर्वेदी, उपेंद्र कुशवाहा, अभिषेक मनु सिंघवी, तिरुचि शिवा और पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी इस सूची में हैं. इतने बड़े नामों का एक साथ कार्यकाल खत्म होना इन चुनावों को और अहम बना देता है.
राज्यसभा की कितनी सीटों पर होंगे चुनाव?
आंकड़ों की बात करें तो 2026 में कुल 72 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इनमें अप्रैल में 37 सीटों पर, जून में 23 सीटों पर, जुलाई में एक सीट पर और नवंबर में 11 सीटों पर चुनाव होंगे. अप्रैल में जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें महाराष्ट्र के साथ असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य शामिल हैं. वहीं नवंबर में होने वाले चुनावों में उत्तर प्रदेश की 10 सीटें सबसे अहम मानी जा रही हैं.
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बताते चलें कि राज्यसभा चुनाव से पहले ओवैसी का बयान सियासी रणनीतियों को नई दिशा दे सकता है. आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि शरद पवार और अन्य दिग्गज नेता इस जटिल गणित को कैसे साधते हैं और संसद के ऊपरी सदन तक पहुंचने में सफल हो पाते हैं या नहीं.
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