Waqf Bill पर अपने ही पुराने बयान पर बुरे फंसे Lalu Yadav, BJP ने बुरी तरह घेरा !

Waqf Act में संशोधन करने के लिए मोदी सरकार बिल लायी तो तेजस्वी यादव इसके विरोध में उतर गये, यहां तक कि खुद लालू यादव बीमार होने के बावजूद वक्फ बिल विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंच गये, तो वहीं इसी बीच अब अपने पुराने बयान को लेकर लालू यादव बुरी तरह से फंस गये हैं

Waqf Bill पर अपने ही पुराने बयान पर बुरे फंसे Lalu Yadav, BJP ने बुरी तरह घेरा !

आजादी के बाद लंबे समय तक देश की कमान संभालने वाले जवाहरलाल नेहरू ने ही साल 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट कानून बनाया। इसके बाद सत्ता बदलती गई और संशोधन दर संशोधन होते रहे। ऐसा ही एक संशोधन मोदी सरकार करने जा रही है, जिस पर मुस्लिमों के साथ-साथ विपक्ष भी बवाल काट रहा है। यहां तक कि बिहार में मुस्लिम यादव वोट बैंक की राजनीति करने वाले तेजस्वी यादव ने भी ऐलान कर दिया है कि हम वक्फ संशोधन बिल का विरोध करेंगे।

तेजस्वी यादव का कहना है कि जिस वक्फ बोर्ड के नाम पर मुसलमानों ने भारत की आठ लाख एकड़ भूमि में फैली 8 लाख 72 हजार 292 से भी ज्यादा रजिस्टर्ड वक्फ की अचल संपत्तियों पर कब्जा जमाया हुआ है, उसी वक्फ बोर्ड में संशोधन करने के लिए मोदी सरकार ने बिल लाया है। तेजस्वी यादव इसके विरोध में उतर गए हैं। यहां तक कि खुद लालू यादव, बीमार होने के बावजूद वक्फ बिल विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे।

इसी बीच अब अपने पुराने बयान को लेकर लालू यादव बुरी तरह से फंस गए हैं। लालू यादव आज भले ही वक्फ संशोधन बिल का विरोध कर रहे हों, एक वक्त ऐसा भी था जब साल 2010 में तत्कालीन मनमोहन सरकार वक्फ संशोधन बिल लेकर आई थी। उस वक्त यही लालू यादव बतौर सांसद देश की संसद में अपनी बात रखी थी। और उस भाषण में खुद लालू यादव कह रहे थे कि कानून बहुत कड़ा बनाना चाहिए क्योंकि चाहे सरकारी हो या प्राइम लैंड, सारी जमीनें हड़प ली गई हैं।

मोदी सरकार ने जैसे ही 2 अप्रैल को संसद के पटल पर वक्फ संशोधन बिल पर रखा, सोशल मीडिया पर लालू यादव का यही पुराना बयान वायरल होने लगा। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने खुद 15 साल पुरानी वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "लालू यादव जी ने 2010 में संसद में स्वीकार किया था कि वक्फ बोर्ड में जमीन कब्जे के नाम पर भारी लूट-पाट चल रहा है।"

दिल्ली बीजेपी नेता वैशाली पोद्दार ने भी लालू यादव की पुरानी वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि, "लालू यादव ने 2010 में संसद में वक्फ बोर्ड पर जमीन घोटाले और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि कैसे वक्फ की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं और इसमें भ्रष्टाचारियों की मिलीभगत है। आज वही मांग बीजेपी पूरी कर रही है, तो सारे सेक्युलर और भ्रष्टाचारी नेता रो रहे हैं।"

बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने भी लालू यादव पर हल्ला बोलते हुए कहा, "यही है तुष्टीकरण की राजनीति। 2010 में लालू जी संसद में स्वयं कह रहे हैं कि वक्फ को लेकर कठोर कानून बनना चाहिए। संपत्ति अधिग्रहण और दुरुपयोग की हेरफेर किसी से छिपी नहीं है। लेकिन आज इन्हीं लालू जी की पार्टी वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध कर रही है। कारण केवल एक है - तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति। इन्हें न बिहार से कोई लेना-देना है और न ही देश से।"

15 साल पहले तत्कालीन सांसद लालू यादव खुद वक्फ बोर्ड के खिलाफ भड़ास निकालते हुए इस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाया करते थे और सख्त से सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। आज जब मोदी सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए वक्फ एक्ट में संशोधन करने जा रही है, तो खुद लालू यादव विरोध कर रहे हैं। क्योंकि लालू परिवार भी ये बात अच्छी तरह से जानता है कि अगर वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया तो मुस्लिम वोट बैंक छिटक जाएगा। यही वजह है कि कभी वक्फ बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले लालू यादव आज वक्फ संशोधन बिल का ही विरोध करने पर उतर आए हैं। यह राजनीति नहीं तो और क्या है?

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