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ज्योति मल्होत्रा जासूसी केस: पाकिस्तान कनेक्शन और आतंकी साजिश का पर्दाफाश
हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप गहराता जा रहा है. पुलिस ने उसके पास से तीन मोबाइल और एक लैपटॉप जब्त किया है जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. डिलीट किए गए चैट्स और दानिश नाम के पाकिस्तानी अधिकारी से बातचीत ने जांच एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है.
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हरियाणा की चर्चित यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को लेकर देशभर में सनसनी फैल गई है. उन पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोप हैं. इस मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. जांच एजेंसियों की टीमों द्वारा की जा रही पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, ज्योति के पास से 3 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया है. ये सभी डिवाइस फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि उसमें से डिलीट की गई जानकारियों को रिकवर किया जा सके.
मोबाइल से डिलीट किए गए चैट्स पर शक
पुलिस को शक है कि ज्योति ने पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात रहे अधिकारी दानिश से हुई बातचीत के कुछ चैट्स जानबूझकर डिलीट किए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर वह कौन-सी जानकारी थी जिसे वह छिपाना चाहती थी. सूत्रों की मानें तो नवंबर 2023 से मार्च 2025 तक ज्योति और दानिश के बीच लगातार संपर्क में रहने के साक्ष्य मिले हैं. विशेष रूप से दो अहम घटनाओं—‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 'ब्लैकआउट फेज'—से जुड़े चैट्स डिलीट किए गए हैं, जिनका सीधा संबंध भारत की सुरक्षा व्यवस्था से बताया जा रहा है.
ज्योति ने अपने पाकिस्तान दौरों को धार्मिक पर्यटन और अल्पसंख्यक पहुंच गतिविधियों का नाम दिया था. लेकिन ट्रैवल एजेंट्स और वीज़ा दस्तावेज बताते हैं कि उसकी यात्राएं पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर तक पहुंच चुकी थीं. यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर आतंकवादी संगठनों के सक्रिय गढ़ के रूप में जाना जाता है. इससे यह आशंका और भी गहरी हो जाती है कि ज्योति की गतिविधियां सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इनका मकसद देशविरोधी सूचनाएं पहुंचाना भी हो सकता है.
ISI के लिए डिजिटल एसेट बनी?
जांच में यह भी सामने आया है कि ज्योति की मुलाकात पाकिस्तान के दानिश नामक अधिकारी से हरकीरत नाम के एक एजेंट के जरिए करवाई गई थी. बाद में वह प्रो-पाकिस्तान विचारधारा को बढ़ावा देने लगी और डिजिटल माध्यम से देश के विरुद्ध कंटेंट प्रसारित करने लगी. जांच एजेंसियों ने हरकीरत से भी पूछताछ की है और उसके 2 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं. इन फोनों को भी डाटा रिकवरी के लिए फोरेंसिक जांच में शामिल किया गया है. पुलिस को शक है कि हरकीरत ही ISI से जुड़ा एजेंट हो सकता है जो भारत में डिजिटल प्रचार का नेटवर्क संचालित करता था.
सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस केस पर टिकी हुई है. यह मामला न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर किस हद तक देश की संवेदनशील जानकारी के लिए खतरा बन सकते हैं. आने वाले दिनों में यदि फोरेंसिक जांच से डिलीट किए गए डेटा और संपर्कों की पुष्टि हो जाती है, तो यह मामला देशद्रोह और आतंकवाद के समर्थन की गंभीर धाराओं में बदल सकता है. सरकार और जांच एजेंसियां इस केस को एक उदाहरण के तौर पर देख रही हैं कि डिजिटल युग में देश की सुरक्षा के लिए सतर्कता कितनी जरूरी है.
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