हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश, ठेका कर्मचारियों को नियमित करे हरियाणा सरकार
Haryana: राज्य में काम कर रहे ठेका कर्मचारियों को नियमित यानी पक्का करने को कहा गया है. यह फैसला सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसी को लेकर राज्य के कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है और उन्होंने इस आदेश को लागू कराने के लिए 12 फरवरी को आंदोलन करने का फैसला लिया है.
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा सरकार को दिए गए उस आदेश को लागू करना आसान नहीं दिख रहा है, जिसमें राज्य में काम कर रहे ठेका कर्मचारियों को नियमित यानी पक्का करने को कहा गया है. यह फैसला सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसी को लेकर राज्य के कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है और उन्होंने इस आदेश को लागू कराने के लिए 12 फरवरी को आंदोलन करने का फैसला लिया है.
कर्मचारी संगठनों का आरोप: सरकार बचना चाहती है आदेश से
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि हरियाणा सरकार हाईकोर्ट में जवाब देने और अवमानना से बचने के लिए एक अलग रास्ता अपना रही है.संगठनों का कहना है कि सरकार ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की बजाय उन्हें हरियाणा कौशल रोजगार निगम के पोर्टल पर पंजीकरण कराने में लगी हुई है. इससे ऐसा लगता है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश को पूरी तरह लागू नहीं करना चाहती, बल्कि सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी कर रही है.
हाईकोर्ट का साफ आदेश क्या है
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर 2025 तक ठेका कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश हरियाणा सरकार को दिया है, यह फैसला 41 सिविल रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए सुनाया गया. कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों को पहले बनी नियमितीकरण की नीतियों के तहत पक्का होना चाहिए था, लेकिन किसी कारणवश वे रह गए, उन्हें भी अब नियमित किया जाए.
10 साल की सेवा पूरी करने वालों को भी नियमित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि जो ठेका कर्मचारी 31 दिसंबर 2025 तक 10 साल की सेवा पूरी कर चुके होंगे, उन्हें भी नियमित किया जाना चाहिए, भले ही वे पुरानी पॉलिसियों में शामिल न रहे हों. कोर्ट ने कहा कि अगर इन कर्मचारियों के पद स्वीकृत नहीं हैं, तो सरकार नए पद स्वीकृत करे और उन्हें पक्का करे.
बकाया वेतन ब्याज सहित देने का आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जिन कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, उन्हें उस साल से पूरा वेतन दिया जाए, जिस साल से वे नियमित होने के पात्र थे. इसके साथ ही इस बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत ब्याज भी देने को कहा गया है. यह आदेश ठेका कर्मचारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सरकार को मिला आठ सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने अपने फैसले को लागू करने के लिए हरियाणा सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया है. यह समय फरवरी के अंत में पूरा हो रहा है. इसी बीच सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने 19 जनवरी को पूरे राज्य में प्रदर्शन कर सरकार से हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग की थी.
जॉब सिक्योरिटी बनाम नियमितीकरण का विवाद
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा का कहना है कि सरकार हाईकोर्ट के फैसले को सही ढंग से लागू करने के बजाय एक नया रास्ता निकाल रही है. सरकार हरियाणा कौशल रोजगार निगम में काम कर रहे करीब 1.20 लाख कर्मचारियों में से पांच साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को 58 साल तक जॉब सिक्योरिटी देने की योजना पर काम कर रही है.
दस्तावेज अपलोड करने की तारीख बढ़ी
हरियाणा सरकार ने आदेश जारी कर पहले 31 जनवरी तक कर्मचारियों को अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने को कहा था. बाद में यह तारीख बढ़ाकर 20 फरवरी कर दी गई. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे साफ लगता है कि सरकार नियमितीकरण के बजाय जॉब सिक्योरिटी देकर बीच का रास्ता अपनाना चाहती है.
सरकार के सामने दो ही रास्ते
सुभाष लांबा के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार के पास सिर्फ दो विकल्प है, पहला, कोर्ट के फैसले को पूरी तरह लागू किया जाए। दूसरा, फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाए. लेकिन सरकार इन दोनों के बजाय तीसरा रास्ता अपनाने की कोशिश कर रही है, जिसे कर्मचारी संगठन स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं.
12 फरवरी को हड़ताल का ऐलान
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 12 फरवरी को हड़ताल करने का निर्णय लिया है. संगठन के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने साफ कहा है कि सरकार जॉब सिक्योरिटी की जगह हाईकोर्ट के फैसले को शब्दशः लागू करे. उनका कहना है कि जब कोर्ट ने नियमितीकरण का आदेश दिया है, तो उससे कम कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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