बद्रीनाथ-केदारनाथ सहित चारधाम के मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन! कांग्रेस-मौलाना ने उठाए सवाल, समर्थन में उतरी VHP
उत्तराखंड में चार धाम और कई मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगा दिया गया है. एक ओर जहां विपक्षी पार्टियां इसको लेकर हमलावर हैं, वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी पहली बार खुलकर बड़ी बात कह दी है. वहीं कांग्रेस के बयान पर संत समाज भी भड़क गया है.
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उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगा दिया गया है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के अनुसार, सदियों पुराने मंदिरों में सिर्फ हिंदुओं की एंट्री होगी. यह प्रस्तावित पाबंदी समिति द्वारा संचालित सभी मंदिरों पर लागू होगी, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं. यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि बोर्ड की बैठक से पास होने के बाद यह फैसला लागू कर दिया जाएगा.
सिख, जैन, बौद्धों पर मंदिर समिति ने कर दिया रुख साफ!
हालांकि उत्तराखंड चार धामों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर मचे बवाल के बीच बीकेटीसी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. बीकेटीसी के अनुसार हिंदुओं के साथ-साथ सिख, बौद्ध और जैन समाज के श्रद्धालुओं को भी यथावत एंट्री दी जाएगी. वहीं वक्फ बोर्ड के चीफ शादाब शम्स ने भी मंदिर समिति के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जिनमें आस्था नहीं, उनका वहां क्या काम?
बीते दिनों मंदिर समिति के फैसले की पुष्टि करते हुए बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले को लागू करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा.
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसको लेकर कहा कि चार धाम यात्रा के प्रबंधन में मुख्य भूमिका मंदिर समितियों की है, जबकि सरकार की भूमिका केवल सहयोगी की है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी हितधारकों की बात सुनी जाएगी.
23 अप्रैल को फिर से खुलेगा बद्रीनाथ मंदिर
बद्रीनाथ मंदिर सर्दियों के मौसम में छह महीने बंद रहने के बाद 23 अप्रैल को फिर से खुलेगा. केदारनाथ मंदिर के फिर से खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के मौके पर घोषित की जाएगी. चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं. इन दोनों तीर्थस्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व के साथ फिर से खुलने वाले हैं.
लंबे समय से चली आ रही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की मांग
आपको बता दें कि यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर चल रही एक बड़ी बहस के बीच आई है. इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी को ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ घोषित करने वाले पोस्टर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर दिखाई दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया.
बीते दिनों हर की पौड़ी में लगे थे ‘हिंदू क्षेत्र’ वाले पोस्टर
इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से ‘हिंदू क्षेत्र’ बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई. श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र.” हालांकि, संगठन ने दावा किया कि इस कदम का मकसद सिर्फ लोगों को जानकारी देना है और इसका कोई गलत इरादा नहीं है.
खास बात यह है कि हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग काफी समय से उठ रही है, खासकर अगले साल होने वाले अर्धकुंभ मेले को देखते हुए.
चारधाम में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध का VHP ने किया स्वागत
आपको बता दें कि उत्तराखंड के चारधाम तीर्थों, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लग रहे प्रतिबंधों को लेकर तेज हो रहे विवादों के बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है और मांग की है कि भारत के सभी पवित्र हिंदू तीर्थों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित हो. वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने प्रेस वक्तव्य में कहा कि यह कदम धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी है.
सभी हिंदू तीर्थों पर लागू हो बैन: VHP
डॉ. जैन ने कहा, “गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर नियंत्रण के निर्णय का वीएचपी स्वागत करता है. केवल इन तीन स्थानों पर ही नहीं, देश के सभी हिंदू तीर्थों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए.” उन्होंने अयोध्या में हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक जिहादी द्वारा पवित्रता भंग करने का प्रयास अक्षम्य अपराध है.
वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा इस प्रतिबंध का विरोध करने पर डॉ. जैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “मदनी जी सद्भाव की बात करते हैं, लेकिन विष वमन करते हैं. सद्भाव तब बनेगा, जब वे मक्का में हनुमान चालीसा पढ़ने की हिम्मत दिखाएं. अयोध्या हमारे लिए उतना ही पवित्र है, जितना मक्का उनके लिए. जब मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश नहीं, तो हमारे तीर्थों में कैसे?”
कट्टरता फैलाती जमीयत उलेमा-ए-हिंद: VHP
डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद खिलाफत आंदोलन से जन्मी है और हमेशा मुस्लिम समाज में कट्टरता फैलाती रही है. उन्होंने देवबंद को आतंकवादियों का जन्मस्थान बताते हुए कहा कि जमीयत वहाबी विचारधारा का पोषण करती है.
VHP ने सौंपी मॉब लिंचिंग में मारे गए हिंदुओं की सूची
उन्होंने मंदिरों पर हमले, शोभायात्राओं पर पथराव और महिलाओं पर अत्याचार के उदाहरण देते हुए कहा कि जिहादी तत्वों द्वारा हिंदुओं पर हमले आम हैं, लेकिन मॉब लिंचिंग हिंदुओं का स्वभाव नहीं, बल्कि जिहादी स्वभाव है. उन्होंने पिछले साल से जुड़ी 187 हिंदुओं की सूची का हवाला दिया, जिन्हें भीड़ ने मार डाला, और इस साल बाड़मेर के खेताराम भील, भीलवाड़ा के सीताराम, बरेली के तेजाराम और गुजरात के जयंती भाटी जैसे मामलों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जल्द ही सैकड़ों हिंदुओं की मॉब लिंचिंग की सूची जारी की जाएगी.
पूरी दुनिया जिहादी उन्माद से पीड़ित: VHP प्रवक्ता
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डॉ. जैन ने कहा कि पूरी दुनिया जिहादी उन्माद से पीड़ित है. अमेरिका और ब्रिटेन में भी ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगते हैं, फिर सद्भाव की बात की जाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जमीयत आतंकवादी घटनाओं के आरोपियों के केस लड़ती है और फिर सद्भाव की बात करती है. उन्होंने कहा, “भारत हिंदू राष्ट्र है, इसलिए सभी धर्मों के लोग यहां रह पाते हैं. मुस्लिम देशों में भी आपस में इतना सौहार्द नहीं, जितना हिंदू समाज में है. अपनी भावनाओं की कद्र करें, अपमान न करें.”
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