भारत-अमेरिका ट्रेड डील का काउंटडाउन शुरू, पीयूष गोयल ने बता दी साइनिंग की पूरी टाइमलाइन
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले 4-5 दिनों में संयुक्त बयान जारी हो सकता है, जिसके बाद अमेरिकी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटकर 18% होने की उम्मीद है.
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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक मुकाम पर पहुंच चुकी है. दोनों देशों के बीच हुए बड़े ट्रेड डील ऐलान के बाद अब एक संयुक्त बयान तैयार किया जा रहा है, जिसमें इस समझौते की पूरी रूपरेखा सामने आएगी. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ संकेत दिए हैं कि यह संयुक्त बयान अगले चार से पांच दिनों में या उससे पहले भी जारी हो सकता है. इसके बाद अमेरिका की ओर से एक अहम एग्जीक्यूटिव ऑर्डर आने की उम्मीद है, जिससे भारतीय सामानों पर लगने वाला भारी टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा.
यह वही हाई-प्रोफाइल ट्रेड डील है, जिसका ऐलान हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था. इस समझौते को लेकर भारत और अमेरिका के बीच करीब एक साल से बातचीत चल रही थी. अब जब बातचीत अपने अंतिम चरण में है, तो इसे भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है.
चार-पांच दिन में आएगा संयुक्त बयान
नई दिल्ली में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीयूष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुसार व्यापार समझौते की पहली किस्त लगभग तैयार है. उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान जारी होते ही आगे की पूरी प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी. मंत्री के अनुसार, इस बयान के आधार पर ही अमेरिका भारत पर लगाए गए कुल 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाने का फैसला करेगा. गौरतलब है कि अभी भारतीय उत्पादों पर अमेरिका ने 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ लगाया हुआ है. यह पेनल्टी टैरिफ रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया गया था. अब इस संयुक्त बयान के बाद कुल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना तय माना जा रहा है.
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से लागू होगा नया टैरिफ
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में टैरिफ से जुड़े फैसले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए लागू होते हैं. संयुक्त बयान जारी होने के लगभग दो दिन बाद अमेरिका की ओर से यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर आ सकता है. इसके साथ ही भारतीय सामानों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिल जाएगी. मंत्री ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर तेज़ रखा गया है, ताकि भारतीय निर्यातकों को जल्द से जल्द इसका फायदा मिल सके. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि इस ट्रेड डील पर औपचारिक हस्ताक्षर मार्च के मध्य तक नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच हो सकते हैं. इसके बाद यह समझौता कानूनी रूप ले लेगा.
30 अरब डॉलर के निर्यात को मिलेगा सीधा फायदा
इस टैरिफ कटौती का सबसे बड़ा फायदा भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को मिलने वाला है. जानकारों के अनुसार, करीब 30 अरब डॉलर से ज्यादा के भारतीय निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा. टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, लेदर प्रोडक्ट्स, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद और MSME से जुड़े सामान अमेरिकी बाजार में पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे. इन सेक्टरों में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं. ऐसे में निर्यात बढ़ने से न केवल कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. उद्योग जगत इसे भारतीय निर्यात के लिए संजीवनी मान रहा है.
राजेश अग्रवाल ने समझाई आगे की प्रक्रिया
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संयुक्त बयान को एक सामान्य लेकिन बेहद अहम प्रक्रिया बताया. उन्होंने कहा कि जब नेताओं के स्तर पर किसी डील पर सहमति बन जाती है, तो उसके बाद संयुक्त बयान जारी किया जाता है. यही बयान आगे चलकर कानूनी समझौते का आधार बनता है. अग्रवाल ने यह भी साफ किया कि भारत की ओर से टैरिफ में किसी भी तरह की कटौती तभी होगी, जब कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. भारत में टैरिफ व्यवस्था MFN सिस्टम के तहत चलती है, इसलिए यहां प्रक्रिया पूरी होने में थोड़ा समय लगता है. वहीं अमेरिका में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए फैसला जल्दी लागू किया जा सकता है.
भारत के हितों के साथ संतुलित समझौता
सूत्रों के मुताबिक, इस ट्रेड डील में भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी सुरक्षा की है. कृषि और डेयरी जैसे सेक्टरों में किसी तरह की जल्दबाज़ी नहीं की गई है. भारत ने साफ कर दिया है कि स्थानीय किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
बताते चलें कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को एक संतुलित, व्यावहारिक और दूरदर्शी समझौता माना जा रहा है. इससे जहां भारतीय निर्यात और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी, वहीं वैश्विक व्यापार मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी. आने वाले दिनों में जारी होने वाला संयुक्त बयान इस नए आर्थिक अध्याय की औपचारिक शुरुआत साबित हो सकता है.
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