कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचल... राहुल गांधी के कार्यक्रम से खफा शशि थरूर, बड़ी बैठक से बना सकते हैं दूरी
कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी के भीतर चर्चा में हैं. बेबाक बयानबाज़ी के लिए पहचाने जाने वाले थरूर के कांग्रेस से रिश्तों में खटास के संकेत मिल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, हालिया पार्टी कार्यक्रम में अपेक्षित सम्मान न मिलने से वह नाराज हैं और एक बड़ी बैठक से दूरी बना सकते हैं.
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. देश और विदेश से जुड़े मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाले थरूर का अंदाज हमेशा से अलग रहा है. यही साफगोई कई बार उन्हें अपनी ही पार्टी के निशाने पर भी ले आती है. अब एक बार फिर कांग्रेस और शशि थरूर के रिश्तों में खटास बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि शशि थरूर कांग्रेस की एक बड़ी बैठक से दूरी बना सकते हैं. हालांकि, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. चर्चा यह है कि हाल के एक पार्टी कार्यक्रम में उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला, जिससे वह नाराज हैं. इससे पहले भी वह कई मौकों पर कांग्रेस की बैठकों में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन हर बार उन्होंने यही कहा कि वह पार्टी लाइन से अलग नहीं हैं.
राहुल गांधी ने थरूर किए गए थे नजरअंदाज
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की 19 जनवरी को कोच्चि यात्रा के दौरान थरूर को नजरअंदाज किया गया. उस दिन केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महापंचायत आयोजित की गई थी. सूत्र बताते हैं कि कार्यक्रम के दौरान थरूर को मंच पर काफी पीछे की ओर स्थान दिया गया, जबकि वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं. माना जा रहा है कि यही बात उन्हें खटक गई.
राहुल गांधी ने थरूर का नहीं किया जिक्र
वहीं दूसरी तरफ एक अलग न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट में भी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कार्यक्रम से पहले थरूर को यह जानकारी दे दी गई थी कि राहुल गांधी ही विस्तार से संबोधन देंगे और अन्य नेताओं को अपनी बात संक्षेप में रखनी होगी. पार्टी निर्देशों का पालन करते हुए थरूर ने अपना भाषण समय से पहले ही खत्म कर दिया. इसके बावजूद, कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कई नेताओं का नाम लिया, लेकिन शशि थरूर का उल्लेख नहीं किया गया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस जैसे बड़े दल में सम्मान और संवाद की भूमिका बेहद अहम होती है. शशि थरूर जैसे वरिष्ठ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले नेता की अनदेखी पार्टी के भीतर असहजता पैदा कर सकती है. हालांकि, थरूर ने सार्वजनिक रूप से इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है. उनका यही रुख अटकलों को और हवा दे रहा है.
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बहरहाल, सवाल यही है कि क्या यह नाराजगी अस्थायी है या फिर कांग्रेस के भीतर एक नई दरार की शुरुआत. आने वाले दिनों में पार्टी की बैठकों और थरूर की मौजूदगी या गैरमौजूदगी इस सियासी कहानी की दिशा तय कर सकती है.
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