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CJI सूर्यकांत ने दागी बिल्डरों का जिक्र कर RERA को जमकर फटकारा, कहा- ऐसी संस्था को खत्म कर देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कहा कि राज्यों को RERA के गठन पर दोबारा विचार करना चाहिए, क्योंकि यह संस्था कथित तौर पर दागी बिल्डरों को ही लाभ पहुंचा रही है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि RERA से लाभ पाने वाले लोग निराश हैं.

Justice Suryakant (File Photo)

देश की सर्वोच्च अदालत में गुरुवार को हुई सुनवाई ने रियल एस्टेट क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब सभी राज्यों को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी Real Estate Regulatory Authority (RERA) के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए. अदालत की टिप्पणी ने न केवल राज्यों की सरकारों बल्कि घर खरीदने की उम्मीद लगाए बैठे लाखों लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है.

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने तीखी टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि जिन लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए RERA बनाया गया था, वही लोग आज पूरी तरह निराश और हताश नजर आ रहे हैं. पीठ ने यहां तक कह दिया कि अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो भी उसे कोई आपत्ति नहीं होगी. यह बयान अपने आप में बेहद अहम माना जा रहा है.

CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार 

सीजीआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संस्था (RERA) कथित रूप से दागी बिल्डरों को राहत पहुंचाने के अलावा कोई प्रभावी काम करती नजर नहीं आ रही है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़े तो इस संस्था को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है और इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. साथ ही उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब सभी राज्यों को इस प्राधिकरण के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए.

किस मामले पर हुई सुनवाई?

मामला हिमाचल प्रदेश RERA कार्यालय के स्थानांतरण से जुड़ा है. राज्य सरकार ने कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था. सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह कदम शिमला शहर में बढ़ती भीड़भाड़ को कम करने के लिए उठाया गया है और यह पूरी तरह प्रशासनिक फैसला है. लेकिन इस निर्णय को चुनौती देते हुए मामला पहले हिमाचल हाई कोर्ट पहुंचा. उच्च न्यायालय ने जून 2025 की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी और 30 दिसंबर 2025 को भी अपने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया.

SC ने किसे जारी किया नोटिस?

अब सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के 30 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही राज्य सरकार और अन्य पक्षों की याचिकाओं पर नोटिस जारी कर दिया गया है. सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि RERA जिन परियोजनाओं को देखता है, उनमें से लगभग 90 प्रतिशत शिमला, सोलन, परवानू और सिरमौर जिलों में स्थित हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं. लंबित शिकायतों में से करीब 92 प्रतिशत भी इन्हीं जिलों से जुड़ी हैं, जबकि धर्मशाला में केवल 20 परियोजनाएं हैं.

RERA का क्या है मुख्य उद्धेश्य?

अदालत की सख्त टिप्पणी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या RERA अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है. RERA की स्थापना वर्ष 2016 में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों को समय पर न्याय दिलाने के लिए की गई थी. लेकिन अगर सर्वोच्च अदालत को ही इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने पड़ रहे हैं, तो यह संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है.

बताते चलें कि अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यों की सरकारें इस टिप्पणी को किस रूप में लेती हैं. क्या RERA में व्यापक सुधार होंगे या इसकी संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आने वाले दिनों में यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है. घर खरीदने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए यह सुनवाई उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आई है.

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