छत्तीसगढ़: अब न डर, न दहशत.., बस्तर के 47 गांवों में पहली बार लहराया राष्ट्रीय ध्वज, ‘राष्ट्रीय गान’ से गूंज उठा पूरा गांव
Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका जो दशकों से नक्सल प्रभावित रहा, उन गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा झंडा फहराया गया. इसे इन गांवों में लोकतंत्र की नई सुबह के तौर पर देखा जा रहा है.
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छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा फहराया गया. ये लोकतंत्र के लिए एक नई सुबह की तरह था, क्योंकि दशकों से इलाका वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था. लेकिन इस बार बस्तर के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के लगभग 47 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया. यह मौका बस्तर में लोकतंत्र की बहाली और सामाजिक बदलाव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ.
बस्तर में लोकतंत्र की नई सुबह
छत्तीसगढ़ सदन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपनाई गई समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर माओवाद विरोधी अभियान और स्थानीय समुदायों से बढ़ते सहयोग के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है. इन प्रयासों के तहत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी प्रशासनिक और सुरक्षा उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए 59 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं. पिछले साल 53 गांवों में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया था और इस साल 47 और गांव लोकतांत्रिक परंपरा में शामिल हुए हैं.
स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
इन गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया और स्थानीय निवासियों ने गणतंत्र दिवस समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लिया. कभी राष्ट्रीय समारोहों के लिए अत्यधिक संवेदनशील और दुर्गम माने जाने वाले क्षेत्रों में ग्रामीण स्वेच्छा से लोकतांत्रिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं, जो शासन और कानून के शासन में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.
Milestone 🇮🇳
— Shalu Awasthi شالو اوستھی (@Shalu_official) January 26, 2026
छत्तीसगढ़ बस्तर इलाके के 47 ऐसे गांव,जहां पर पहली बार तिरंगा लहराया गया है#RepublicDay #RepublicDay2026 pic.twitter.com/148pagU2CD
गांवों में हो रहा है सकारात्मक परिवर्तन
वर्तमान में पूरे बस्तर क्षेत्र में 100 से अधिक सुरक्षा शिविर कार्यरत हैं. सुरक्षा को मजबूत करने के अलावा, उनकी उपस्थिति ने विकास गतिविधियों का मार्ग भी प्रशस्त किया है. सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार नेटवर्क और बैंकिंग सेवाएं जैसी बुनियादी सुविधाएं धीरे-धीरे दूरदराज और पहले से उपेक्षित गांवों तक पहुंच रही हैं. माओवाद प्रभावित जगरगुंडा क्षेत्र में हाल ही में बैंकिंग सेवाओं की बहाली इस सकारात्मक परिवर्तन का एक उल्लेखनीय उदाहरण है.
मजबूत लोकतंत्र का प्रतीक बन रहे हैं ये गांव
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुताबिक बस्तर को लगातार हिंसा के साये से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा में जोड़ा जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार क्षेत्र में शांति, विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है. 26 जनवरी को इन 47 गांवों में फहराया गया तिरंगा बस्तर के लिए शांति, लोकतंत्र और एक नई शुरुआत का एक शक्तिशाली प्रतीक है.
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