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'कांग्रेस को ही बैन कर दो...', RSS के लिए खुलकर समर्थन में खड़े हो गए पसमांदा मुस्लिम, पवन खेड़ा-खड़गे को तगड़ा घेरा

Priyank Kharge, Pawan Khera समेत तमाम कांग्रेसियों ने RSS पर सवाल उठाए, उसे बैन करने की मांग उठाई तो एक पसमांदा समाज के मुस्लिम एहसान खान भड़क गए. उन्होंने बंटवारे से लेकर इमरजेंसी तक, कांग्रेस की पोल खोलते हुए, कांग्रेस को ही बैन करने की मांग कर दी.

'कांग्रेस को ही बैन कर दो...', RSS के लिए खुलकर समर्थन में खड़े हो गए पसमांदा मुस्लिम, पवन खेड़ा-खड़गे को तगड़ा घेरा
Ehsan Khan/ Pasmanda Muslim/ Image: Screengrab/NMF
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बीते कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऊपर कांग्रेस और उसके नेताओं की ओर से बयानबाजी तेज हो गई है. चाहे वो केरल के सीएम वीडी सतीशन हों, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे हों या फिर पवन खेड़ा/दिग्विजय सिंह, इन सबने बीते कुछ दिनों पर अपने हमले का रुख RSS की ओर मोड़ दिया है. ऐसे में एक मुस्लिम एहसान खान ने जो कहा वो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जहां तक कांग्रेस की ओर से RSS पर बैन करने की बात की जा रही है, उस पर उन्होंने जो कहा है वो बात सुननी चाहिए.

'RSS को नहीं, कांग्रेस को ही बैन कर दो'

इस पर एहसान खान ने NMF News से बात करते हुए कहा कि शायद मैंने सुना है, शायद आपने सुना होगा. संघ के स्वयंसेवक एक गीत गाते हैं. चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है. हर बाला देवी की मूरत, बच्चा-बच्चा राम है. तो वो जो संघ है, वो तो अपने इस देश को, इस माटी को चंदन मानता है. इस देश के गांव को तपस्वियों की भूमि मानता है. योद्धा की भूमि मानता है और बालिका को तो देवी मानता है. और हर मानव को वो राम का अवतार मानता है. ऐसे संगठन को बैन करने की यह सोच कह सकते हैं. बैन तो उसे करना चाहिए कांग्रेस को जिसने देश तोड़ा था. देश के टुकड़े किसने किए थे? कांग्रेस ने किए थे और मुस्लिम लीग ने किए थे. आज कांग्रेस उस गठबंधन में है केरला में मुस्लिम लीग से. जिसने षड्यंत्र किया इस देश को तोड़ने के लिए. जिसने सबसे बड़ा नरसंहार कराया हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई का उसका नाम था मुस्लिम लीग. और जिसके कांधे पर रखकर देश तोड़ा था उनका नाम था कांग्रेस. जवाहरलाल नेहरू जी तत्काल... तत्कालीन प्रधानमंत्री जो देश के थे, देश तोड़ने का काम किया, तो बैन किसे करना चाहिए? बैन कांग्रेस को करना चाहिए और बैन मुस्लिम लीग को करना चाहिए.

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'संघ ना होता तो देश फिर से गुलाम हो जाता'

उन्होंने आगे कहा कि जिन स्वयंसेवकों ने अपनी जान की आहुति दी, जो स्वयंसेवक इस देश में, इस राष्ट्र में अपना योगदान देता है, चाहे आपातकाल हो, चाहे आपदा हो, चाहे कोई मुसीबत हो, चाहे कोरोना काल की महामारी हो. मैंने देखा है कि संघ के स्वयंसेवकों को अपनी जान के दांव पर लगाते हुए हॉस्पिटलों में, श्मशान घाटों में दाह संस्कार कर रहे थे और जिनके परिवारों ने छोड़ दिए थे लावारिस लोगों को, उनका इलाज करा रहे थे. वह स्वयंसेवक संघ है जो देश को आज 100 वर्ष दे दिए, इस देश को अपना सर्वस्व न्योछावर किया है. और स्वयंसेवक जो प्रचारक हैं, घर बार त्याग कर, धन त्याग कर, परिवार त्याग कर, अपने सभी को त्याग कर वो एक ऐसा वचन लेते हैं, इस देश की सेवा करते हैं. और देश के कोने-कोने में प्रचारक बैठे हुए हैं संघ के. तो यह कौन से लोग हैं जो संघ को बैन करना चाहते हैं? मैं तो कहता हूं अगर संघ ना होता तो देश गुलाम होकर होता.

'देश की जनता ने समझ गई है कि हमारे हितैषी कौन'

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कांग्रेस की नीतियों ने, कांग्रेस की रणनीतियों ने, कांग्रेस के राजनेताओं ने इस देश को तोड़ने की बात की. सबसे ज्यादा जो नरसंहार हुआ है, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कांग्रेस समय में हुआ है. चाहे मुजफ्फरनगर हो, चाहे मलियाना हो, चाहे मुरादाबाद हो, चाहे दिल्ली हो, चाहे कश्मीर में बिलकुल. हिंदुओं का नरसंहार हो. यह कौन सी कांग्रेस है जिसने देश को बर्बाद करके और उस मुहाने पर छोड़ दिया कि जहां पर एक नारा था कांग्रेस का. आधी रोटी खाएंगे इंदिरा जी को लाएंगे. वो आधी रोटी छीन ली बेचारों से गरीबों से. आज भी मजदूर परेशान था. उसके पास में ना कोई योजना थी. तो कितनी योजना दी उन 70, 65, 60 सालों में बता दें. और कांग्रेस दिशा विहीन है अब तो उसको नकार दिया है देश की जनता ने. और अब तो बोलने का अधिकार भी क्या छीन लोगे? बोलने दो उनको जो बोलना है बोलने दो. देश की जनता ने समझ गई है कि हमारे हितैषी कौन हैं.

'हम खुशनसीब कि हमारे पास संघ जैसा संगठन'

और मैं तो कहता हूं बड़ा खुशनसीब है कि दुनिया में हमारे पास एक ऐसा संगठन है जिसका नाम संघ के स्वयंसेवक हैं, जिसका नाम आरएसएस है. जो देश को और देश के ताने-बाने को एक साथ रखना चाहता है. मैं खुद शाखा में जाता रहा हूं. मैंने देखा है कि ना हिंदू देखते हैं, ना मुसलमान देखते हैं, ना सिख देखते हैं. उनके लिए सब इंसान हैं. सब भारतीय हैं. सब भारतीय हैं. तो मैंने कहा ना एक जो संगीत गाथा है, चंदन है इस देश की माटी. इस देश की माटी को चंदन मानते हैं. हर गांव को तपोभूमि मानते हैं. तो वो कैसे इस देश?

NMF News के सवाल कि आप (एहसान खान) कह रहे हैं कि RSS इस देश की मिट्टी को चंदन मानती, लेकिन कांग्रेस मानती है कि जहर बोने का काम जो है आरएसएस करती है. नफरत फैलाने का काम जो है आरएसएस करती है. हिंदुओं के नाम पर वो भड़काने का काम करती है. उनकी सुरक्षा के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ वो सारा काम करती है. आप ऐसे देख रहे हैं?

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'इंदिरा गांधी ने संघ को क्यों किया था रिपब्लिक डे पर आमंत्रित?'

इस पर एहसान ने कहा कि समूची कांग्रेस से कहना चाहता हूं मैं कि स्वर्गीय इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री जी ने संघ के स्वयंसेवकों को 26 जनवरी की परेड में क्यों बुलाया था? अगर इतना ही संगठन खराब था तो फिर दुनिया को क्यों दिखाया था कि हमारे पास एक ऐसा संगठन है जिसके पास कोई बही खाता नहीं है. जिसके पास कोई भी लेखाजोखा नहीं है और वो देश की सेवा करता है. चाहे स्कूल के माध्यम से हो, चाहे मजदूरों के माध्यम से हो, चाहे महिलाओं के माध्यम से हो. वो देश में विभिन्न संगठन चलाते हैं और देश की सेवा करते हैं.

ना उनके पास कोई रजिस्टर है, ना उनके पास में कोई बही खाता है, ना ही उनके पास में कोई ऐसा लिखित में है कि ये हमारे हैं. जो आएगा वो स्वयंसेवक है. स्वयंसेवक का मतलब यह है कि अगर हम रास्ते में पत्थर को हटा रहे हैं. हमने स्वयं से सेवा की है. उसे स्वयंसेवक कहते हैं. अगर रास्ते में कोई दुर्घटना हो गई है. उसकी मदद कर दी उसे स्वयंसेवक कहते हैं. अगर रास्ते में प्यासा है, पानी पिला दिया स्वयंसेवक कहते हैं. अगर यात्रा में जाने वाले व्यक्ति को ट्रेन में कोई मुसीबत आ गई, कोई आपदा आ गई, उसकी मदद करना उसे स्वयंसेवक कहते हैं. हम सब स्वयंसेवक हैं.

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'RSS जोड़ रही, कांग्रेस तोड़ रही'

स्वयंसेवक इस देश की नीव है. अगर स्वयंसेवक ना होता तो ये महल नहीं बनता. ये वट वृक्ष नहीं बनता. आज देश दुनिया में अपना तिरंगा नहीं फहरा रहा होता. ये स्वयंसेवकों की मेहनत है. ये स्वयंसेवक का बलिदान है. उनकी कुर्बानियां हैं. जो आज हिंदुस्तान दुनिया में महाशक्ति बन के खड़ा हुआ है. क्योंकि आज का जो हिंदुस्तान का जनमानस वो जग गया है. वो कारोबार भी कर रहा है. वो व्यापार भी कर रहा है. वो इस देश के ताने-बाने को जोड़ रहा है. और कांग्रेस ने तोड़ा है. चाहे देश तोड़ा हो, चाहे जाति तोड़ी हो.

'क्या कसूर था बेचारे सिखों का?'

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1984 में क्या कसूर था उन बेचारे सिखों का. निहत्थे सिखों का जो घर में सो रहे थे. जिनको मार दिया, जिनकी बहन बेटियां लूट, बलात्कार किया, जिनके घर जला दिए गए, जिनके कारोबार फूंक दिए. क्या कसूर था? उन सिखों का क्या कसूर था? बताएं, जवाब दे कांग्रेस ना. आज वो कांग्रेस कहती है कि आरएसएस बैन कर दो. मैं कहता हूं देश का मुसलमान कि अब देश के नागरिक, देश की कानून व्यवस्था और देश की सरकार अब कांग्रेस को बैन कर दे. देश तोड़ा, सिखों को मरवाया, हिंदुओं को मरवाया और हिंदू मुस्लिम दंगा करवाया. मैं तो कहता हूं ऐसी सरकारें ऐसी पार्टियां जो विचारधारा ही विदेश की हो उसे बंद करना चाहिए.

लेकिन ये भी उनका मजाक उड़ा रहे हैं. अभी नए नवेले जो है राज्यसभा सांसद बने हैं बड़ी मेहनत के बाद से पवन खेड़ा जी, उन्होंने तो यहां तक कहा कि ये हिंदुओं की सुरक्षा की बात करते हैं. देश सुरक्षा की बात करते हैं और खुद ही जेड प्लस सिक्योरिटी लेकर चलते हैं. कैसा ये दोगलापन है ये?

पवन खेड़ा जी वही तो थे जो छुप गए थे बीच में. अभी कुछ कहा था किसी के बारे में. वो छुप गए थे. भाग गए थे. दुबक गए थे. कोई नजर नहीं आए थे. यह वही खेड़ा है. तो राहुल गांधी जी कितनी सिक्योरिटी लेकर घूमते हैं. सोनिया गांधी तो ना प्रधानमंत्री हैं. ना पार्टी के अध्यक्ष हैं और ना ही एलओपी (LOP) हैं. वो क्या सिक्योरिटी लेकर घूमती हैं? उनके घर की सिक्योरिटी कितनी है? तुम तो कुछ भी नहीं हो. तब तुम्हें सिक्योरिटी मिल रही है. और संघ तो देश की सेवा कर रहा है.

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'संघ देश की सेवा कर रहा है'

देश से मतलब चाहे हिंदू हो, चाहे मुस्लिम हो, चाहे सिख हो, चाहे ईसाई हो. सबकी सेवा कर रहा है. आपदा में नहीं देखा उन्होंने कि यह मुसलमान है, यह हिंदू है, ये सिख है, ईसाई है. आपदा के अंदर नहीं देखा अंदर. जब महामारी आई थी तब नहीं देखा उन्होंने. कोरोना काल में नहीं देखा था कि हिंदू है, ये मुसलमान है, सिख है. जो सामने आ गया उसकी सेवा की. जो सेवादार हैं, जो सेवा करने वाले, स्वयंसेवक हैं. उनको नकार देना, कहीं ना कहीं अपनी मातृभूमि को नकार देना है. ऐसी कांग्रेस है. और मैं तो कहता हूं कांग्रेस को अब बैन करना चाहिए. जनता ने बैन कर दिया है. सरकार बैन कर दे उसको.

इस पर पत्रकार ने जब काउंटर सवाल किया कि आप इतना जो है उसकी अच्छाइयां बता रहे हैं तो कांग्रेस को तो कुछ कमी दिख रही होगी. वो तो जहर अगर बोल रहे हैं कि ये संगठन जहर है. इनके संगठनों को बंद कर देना चाहिए. एबीवीपी जो कहें कि स्कूलों में काम करती है. जो छात्र संगठन है. इन सबको बैन करने की बात कर रही है. जहर बता रही है. कुछ तो उसके दिमाग में होगा. कुछ तो देखा होगा उन्होंने.

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इसके जवाब में एहसान खान ने कहा कि पत्रकार महोदय आप युवा हो. आपकी आयु बहुत छोटी है. शायद आपने वो नहीं देखा ना. बंटवारा नहीं देखा ना? आपके दादा जी से अगर है तो पूछना, पिताजी से पूछना कि कैसे-कैसे लोगों को मारा गया था? क्या कसूर था उन हिंदुओं का जो इधर जा रहे थे? क्या कसूर था मुसलमानों का जो उधर जा रहे थे? ट्रेनें भर भर के आ रही थी लाशों की. क्या आपने बंटवारा किया? किस आधार पे बंटवारा किया आपने? बंटवारा क्यों किया आपने? आपने अपने सत्ता पाने के लिए? अपने लालच के लिए और कांग्रेस के जो तत्कालीन प्रधानमंत्री बने थे, क्या लालच था उनका? उन अंग्रेजों से क्या साठगांठ थी? और मुस्लिम लीग से क्या साठगांठ थी? क्यों तोड़ा देश को? क्यों बंटवारा किया और क्यों हिंदू मुस्लिम नरसंहार किया?
'मैं देश का मुसलमान, कांग्रेस को बैन करने की मांग करता हू'

यह जवाब दे कांग्रेस... नहीं तो कांग्रेस को बैन करने की मैं मांग करता हूं. इस देश का मुसलमान मैं मांग करता हूं, देश की सरकार मोदी जी से कहता हूं और अमित शाह से कहता हूं कि कांग्रेस को आजीवन बैन करना चाहिए. ये देश को तोड़ने वाली पार्टी है. ये हिंदू मुस्लिम का नरसंहार करने वाली पार्टी है. यह उस शाहबानो केस जो बेचारी गरीब महिलाएं थी जो अपने हक गुजारा भत्ता मांगने के लिए डिस्ट्रिक्ट न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक जाना पड़ा. उसका आदेश पलट दिया. यह तो ना बहन के हैं, ना बेटी के हैं, ना मुस्लिम के हैं, ना सिख के, ना ईसाई के हैं. ये सत्ता के लालची हैं. और सत्ता में इतने अंधे हो गए. इन्होंने हिंदुओं को मरवाया, मुसलमानों को मरवाया. बहन बेटियों का हक छीना. ऐसी राजनीतिक पार्टी इस देश में रहने के लायक नहीं है.

इतना ही नहीं, जब आगे सवाल हुआ कि देश में असली जहर कौन बो रहा है आपके हिसाब से? क्योंकि कांग्रेस की मानें तो आरएसएस बो रहा है. उसकी जड़ है जो है आरएसएस. आपके हिसाब से ये लगता है कि जो है कौन असली जहर बो रहा है यहां इस देश में?

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इस पर उन्होंने कहा कि जहर तो नहीं कहूंगा लेकिन हिंदुस्तान को, हिंदुस्तानियों को अपमान करने का काम अगर किसी ने किया है उसका नाम है कांग्रेस. सन 1971 का युद्ध हुआ. पाकिस्तान के दो बंटवारे के हिस्से कर दिए. लेकिन पीओके (PoK) नहीं लिया. हमारा हिस्सा था. हमारा अंग था. क्यों छोड़ दिया आपने? 90000 सैनिक (नब्बे हज़ार सैनिक)... पाकिस्तान के हमारे पास बंदी थे. हम चाहते तो पीओके को ले लेते. फ्री में छोड़ दिया. क्यों? अपनी जमीन नहीं ली. तो कहीं ना कहीं इस देश का नुकसान जो किया है वो कांग्रेस ने किया है.

धारा 370... आप हिंदुस्तान के कोई भी नागरिक कश्मीर में बगैर परमिट नहीं जा सकता था. जहां बलिदान हुए कश्मीर मुखर्जी (श्यामा प्रसाद मुखर्जी) वह कश्मीर हमारा है. यह नारा भाजपा देती है. जहां बलिदान हुए मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है. वो सारा का सारा है. क्यों क्यों बलिदान हुए थे? क्यों ना मारा गया था? क्योंकि वो बगैर परमिट चले गए थे. क्या देश के अंदर, हिंदुस्तान के अंदर एक भारत का भारतीय बगैर परमिट चला जाएगा उसको मार देंगे.

कांग्रेस का चरित्र, चेहरा, चरित्र अब देश ने देख लिया. आज देश एक सुनहरे हाथों में है. आज देश एक सच्चे चौकीदार के हाथ में है. आज देश एक सच्चे सनातनी के हाथ में है. आज देश एक सच्चे इंसान के हाथ में है. जिसने इन 12 वर्षों में दिखा दिया है कि सड़क मार्ग जाल बिछाना हो. उज्ज्वला की आज योजना देखो. जनधन खाते क्यों ना हो. स्वनिधि (एम सेबी) के माध्यम से नाले खोदने वाले, फूल बेचने वाले, ठेले बैठने वाले, पटरी पर बैठने वाले, कपड़ा धोने वाले, बाल काटने वाले की योजना लेके आए हैं. कहां थी कांग्रेस? किसने मना किया था? 70 वर्ष राज किया आपने. 60 वर्ष राज किया आपने. 65 वर्ष आपने राज किया. स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू ने राज किया. स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने राज किया. स्वर्गीय राजीव गांधी ने राज किया. मनमोहन सिंह ने राज किया. कहां थे आपके योजना के पिटारे? क्यों बंद कर रहे थे? क्यों नहीं दिया इस देश की जनता को?

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आप कहते थे आधी रोटी खाएंगे. इंदिरा को लाएंगे. गरीबी हटाएंगे ना. गरीबी हटी, गरीब हट गया. गरीब मिट गया. गरीब रुल गया. आज तो गरीब को योजना दी. आज घर-घर बैठे हैं. अनाज मिल रहा है गरीबों को. कम से कम उसके पास यह तो है कि मुझे रोजगार के साथ-साथ मेरे एक महीने का राशन घर बैठे मिल रहा है. आज बच्चे पढ़ा रहा है क्योंकि वो जो... जो इनकम थी जो कमा रहा है उससे सेव करके बच्चे पढ़ा रहा है. देश में योगदान दे रहा है. उसको राशन मिल रहा है. उसको मदद मिल रही है. कहां थे कांग्रेसियों? आपने तो लाल अनाज दिया था खाने के लिए हमारे को. जब भुखमरी पड़ी थी तो लाल अनाज खाने को दिया था देश को. वो देश को याद है.

'इमरजेंसी लगाने की क्या जरूरत थी? बताएं कांग्रेसी?'

आपातकाल क्यों लगाया? आज पूछ रहा हूं मैं आपके चैनल के माध्यम से. बताएं कांग्रेसी आपातकाल लगाने की क्या जरूरत थी? नसबंदी कराने की क्या जरूरत थी? उन देश के नागरिकों को क्यों जेलों में ठूंसा गया था? क्या कसूर था? क्या वो आतंकवादी थे? क्या वो देशद्रोही थे? क्या वो देश के नागरिक नहीं थे? कितने हिंदुओं को जेलों में ठोका? और वर्षों तक रहे. उनके माता-पिता बाहर मर गए. अभी तक वो यह सोच रहे हैं कि हम जिंदा होते तो कम से कम अपने पुण्यदान कर लेते.

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