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रामलीला मैदान में राहुल गांधी की रैली से पहले रात में हुआ खेला, कैमरे पर दिखाया तो रिपोर्टर की 'लिंचिंग' पर उतरे कांग्रेसी
खड़गे का पोस्टर फाड़ा, कांग्रेस का झंडा फेंका...राहुल गांधी की रामलीला मैदान वाली रैली से पहले रात के अंधेरे में खेला हुआ. इसे कैमरे पर जब रिपोर्टर ने एक्सपोज किया तो कांग्रेसी कार्यकर्ता भड़क गए. पत्रकार को सरेआम घेर लिया.
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रामलीला मैदान में वैसे तो कांग्रेसी कथित तौर पर 'मोहब्बत की दुकान' लगाने पहुंचे थे, लेकिन जब उनसे सवाल किया गया तो इसी दुकान से नफरत थोक के भाव निकलने लगी. रात के अंधेरे में जब NMF News का कैमरा ग्राउंड जीरो पर पहुंचा, तो इसी दुकान का असली और खौफनाक सच सामने आ गया. वही शाहीन बाग स्टाइल, तिलचट्टों और कट्टरपंथियों वाला स्वभाव! सवाल सिर्फ अपने मतलब का सुनना है, कुछ अलग पूछा तो गोदी मीडिया के नारे, हूटिंग, गाली-गलौज, मारपीट की कोशिश और फिर सरेआम लिंच करने की तैयारी.
रामलीला मैदान में राहुल गांधी की रैली से पहले, आधी रात को खेला!
दरअसल रैली से ठीक पहले, देर रात, NMF News के चर्चित रिपोर्टर 'A Se Aadii' सिर्फ यह पूछने गए थे कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने, तो जनता के लिए क्या करेंगे? लेकिन एक सीधे सवाल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पूरा 'सिस्टम हैंग' हो गया. सवाल का जवाब मानो दिया ही नहीं जा रहा था, उन्हें 'प्रधानमंत्री' शब्द सुनाई ही नहीं दिया, बल्कि उनका पूरा फोकस 'अगर' शब्द पर टिक गया कि 'अगर' क्यों लगाया? वो तो बनेंगे ही! यह वैसा ही था जैसे मॉक संसद में पूरी सरकार बना ली हो, खुद ही सवाल पूछ लिया हो और खुद ही अदालत बनकर फैसला भी सुना दिया हो.
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पत्रकार ने किया एक्सपोज तो लिंचिंग पर उतरे कांग्रेसी!
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ठीक इसी तरह, सवाल का जवाब देने के बजाय भीड़ एक हिंसक हुजूम बनकर रिपोर्टर पर टूट पड़ी. कैमरे बंद कराने की धमकियां, धक्का-मुक्की, कपड़े खींचना और 'गोदी मीडिया' का शोर...यह किसी लोकतांत्रिक रैली की तैयारी नहीं, बल्कि सरेआम एक पत्रकार की 'लिंचिंग' का लाइव ट्रेलर था. और दिलचस्प बात यह है कि यही लोग आए दिन दूसरों को लोकतंत्र, फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की आजादी) और इमरजेंसी आदि की दुहाई देते रहते हैं और दूसरों को 'गोदी मीडिया' का सर्टिफिकेट बांटते रहते हैं.
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हुआ यह कि एक तरफ तो लाखों रुपये बहाकर रामलीला मैदान को बड़े-बड़े पोस्टरों से पाट दिया गया, और दूसरी तरफ रैली के नाम पर दिहाड़ी कमाने वाले पार्किंग कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीन ली गई. जब रिपोर्टर ने इस सच का 'पोस्टमार्टम' किया और जवाबदेही तय करनी चाही, तो इन तथाकथित लोकतंत्र के रक्षकों का असली चेहरा बेनकाब हो गया. कैमरे के सामने चीखते-चिल्लाते और हाथापाई पर उतारू इन कार्यकर्ताओं ने खुद ही साबित कर दिया कि इनकी 'मोहब्बत की दुकान' में सिर्फ नफरत और गुंडागर्दी का 'मसाला' बिक रहा है. खुद ही देख लीजिए यह पूरा वीडियो.