बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू दास के हत्यारों का इलाज शुरू, आरोपी इमाम गिरफ्तार, तो दूसरे हमलावर की धरपकड़ जारी
बांग्लादेश में हिंदू दीपू दास की हत्या करने वालों का इलाज शुरू हो गया है. एक ओर जहां भीड़ को उकसाने वाले आरोपी इमाम की गिरफ्तारी हो गई है तो वहीं दूसरे हमलावरों का भी हिसाब अज्ञात लोगों द्वारा किया जा रहा है.
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बांग्लादेश में भीड़ द्वारा मार दिए गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के मामले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं. दीपू की ईशनिंदा के झूठे आरोप में हत्या कर दी गई थी. यह आरोप मैमनसिंह जिले की एक फैक्ट्री में काम करने वाले उसके एक मुस्लिम सहकर्मी ने लगाया था. यह भयावह घटना तब हुई जब दीपू पुलिस की सुरक्षा में था. इसी बीच दीपू के हत्यारों का इलाज अज्ञात हमलावरों द्वारा किया जा रहा है.
दीपू के हत्यारे को किसी अज्ञात हमलावर ने ठोका!
इसी बीच आपको बता दें कि दीपू के कातिलों का हिसाब होना शुरू हो गया है. एक ओर दीपू को मौत के घाट उतारने वाली भीड़ को उकसाने वाले इमाम पर भारत के दबाव में कार्रवाई हुई है तो वहीं दूसरे हमलावरों को लेकर भी ख़बरें आ रही हैं. कहा जा रहा है कि एक आरोपी अरबान अली को किसी Unknown Gunman ने गोली मार दी है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. अगर ऐसा होता है तो ये ठीक वैसा ही होगा जैसा पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों और आतंकियों के साथ हो रहा. यानी कि वो सो रहे होते हैं, बैठे रहते हैं, नमाज पढ़ रहे होते हैं और कोई आता है और आकर ठोक कर चला जाता है.
भीड़ को उकसाने वाले इमाम की हुई गिरफ्तारी
जहां तक इमाम की गिरफ्तारी की बात है तो आपको बता दें कि पुलिस ने दीपू दास को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले मुख्य आरोपी को दबोच लिया है. लेकिन, जब इस मुख्य आरोपी का चेहरा और उसकी सच्चाई सामने आई, तो हर कोई सन्न रह गया. दीपू दास का मुख्य हत्यारा और भीड़ को भड़काने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसी इलाके की एक मस्जिद का इमाम निकला, जिसने धर्म की आड़ में भीड़ को हैवान बना दिया था.
मैमनसिंह के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) अब्दुल्ला अल मामून ने इस बड़ी गिरफ्तारी का खुलासा करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी का नाम यासीन अराफात है. 25 वर्षीय यह आरोपी शेखबारी इलाके की एक स्थानीय मस्जिद में इमाम के तौर पर काम करता था. दीपू दास को जिंदा जला देने की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद से ही इमाम यासीन फरार चल रहा था.
मालूम हो कि दीपू चंद्र दास मैमनसिंह के भालुका में एक फैक्ट्री में काम करता था. वह एक गरीब मजदूर था. एक दिन किसी छोटी बात पर उसके मुस्लिम सहकर्मी ने उसे सबक सिखाने की ठान ली. इसलिए भीड़ के बीच उसने घोषणा की कि दीपू ने पैगंबर के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की है. बस इतना ही काफी था. इसके बाद उग्र भीड़ ने दीपू पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया. बाद में पुलिस ने उसे भीड़ से बचाकर हिरासत में ले लिया, यानी वह पुलिस की सुरक्षा में था.
इसके बाद दीपू ने पुलिस को पूरी घटना बताई और साफ कहा कि उसने पैगंबर के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की थी. उसने यह भी बताया कि यह सब उसके सहकर्मी की साजिश थी. बाद ये बात पुलिस की जांच में भी साबित हुई कि दीपू पर किया गया हमला सुनियोजित था और उस पर लगे आरोप बेबुनियाद थे.
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