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भारत में बहने वाली इस नदी को क्यों कहते हैं 'रक्त की नदी'? जानें इसके लाल रंग का रहस्य
ये नदी है लोहित नदी जो अपने समृद्ध इतिहास के लिए जानी जाती है। यहाँ का पूरा क्षेत्र अपनी बेदाग सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। ये जगह आपको इतनी शांत और लुभावनी लगेगी की आपका बार बार यहाँ आने का मन करेगा। अपने अनूठे रंग के लिए जानी जाने वाली लोहित नदी अपने सफर और प्रचंड वेग के लिए भी मशहूर है। तिब्बत की ऊंचाई से निकलकर असम के मैदानों तक का इसका रास्ता रोमांच और प्राकृतिक खूबसूरती से सराबोर है। आइए करीब से जानते हैं इस जादुई नदी के पूरे सफर को।
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भारत विविधताओं से भरा देश है जहाँ एक से बढ़कर एक स्तब्ध कर देने वाली जगहें आपको मिल जाएंगी। अरुणाचल प्रदेश की घनी, धुंध से घिरी घाटियों के बीच एक ऐसा दृश्य भी है जिसे देख कर आप चौंक जाएंगे। यहाँ बहती है एक ऐसी नदी जिसका रंग सामान्य नदी जैसा नहीं है। मौसम के आधार पर, इस नदी का पानी गेरूआ या लाल-नारंगी में बदल जाता है। जिस वजह से इसे एक अनोखा नाम दिया गया है - The River of Blood।
ये नदी है लोहित नदी जो अपने समृद्ध इतिहास के लिए जानी जाती है। यहाँ का पूरा क्षेत्र अपनी बेदाग सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। ये जगह आपको इतनी शांत और लुभावनी लगेगी की आपका बार बार यहाँ आने का मन करेगा। अपने अनूठे रंग के लिए जानी जाने वाली लोहित नदी अपने सफर और प्रचंड वेग के लिए भी मशहूर है। तिब्बत की ऊंचाई से निकलकर असम के मैदानों तक का इसका रास्ता रोमांच और प्राकृतिक खूबसूरती से सराबोर है। आइए करीब से जानते हैं इस जादुई नदी के पूरे सफर को।
लोहित नदी का सफर
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ये नदी तिब्बत की Zayal Chu पर्वत श्रृंखला से निकलती है और Anjaw जिले से भारतीय सीमा में प्रवेश करती है। इसके बाद Walong, Hawai और Tezu जैसे खूबसूरत स्थानों से गुज़रते हुए ब्रह्मपुत्र नदी में विलीन हो जाती है। लोहित नदी को रफ्तार और उग्र स्वभाव के लिए जाना जाता है। Mishmi hills को चीरती हुई जब ये नदी आगे बढ़ती है तो आस पास का पूरा क्षेत्र इसकी दहाड़ से गूँज उठता है।
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क्या है इसके नाम के पीछे का कारण?
आइए अब जानते हैं इसके अनोखे रंग और नाम के पीछे का कारण जो इसे रहस्यमयी बनाता है। लोहित नदी का ये रूप Geological और Mythological किस्सों का मेल है। लोहित घाटी और मिशमी पहाड़ियाँ लैटेराइट से भरपूर हैं। इस मिट्टी में iron की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है जिसकी वजह से भारी बारिश के बाद जब पहाड़ों से पानी नदी में आता है, तो ये अपने साथ इस मिट्टी को भी बहा ले आता है जो नदी के पानी को लाल रंग दे देती है।
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वहीं अगर पौराणिक कथाओं की बात करें तो इसे परशुराम कुंड की प्रसिद्ध कथा से जोड़ा गया है। भगवान परशुराम ने अपने पिता के आदेश पर अपनी माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया था। अपने इस पाप के प्रायश्चित और शुद्धि के लिए उन्होंने इसी नदी के तट पर स्नान किया था जिसके बाद इस नदी का पानी हमेशा के लिए लाल हो गया।
परमिट लेना है ज़रूरी
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अगर आप इस खूबसूरत जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको इनर लाइन परमिट (ILP) लेना अनिवार्य है। संवेदनशील इलाका होने के कारण अरुणाचल की सीमा लांघने के लिए यह दस्तावेज़ आपके पास होना ज़रूरी है। इसके साथ ही आपको प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) की भी आवश्यकता होती है। ये आपको दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और तेजपुर एयरपोर्ट से मिल जाएगा.