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राज्यसभा में विदाई का भावुक पल... PM मोदी ने आठवले को बताया ‘सदाबहार नेता’, बोले- आपकी कमी महसूस होगी

राज्यसभा से रिटायर हो रहे 37 सांसदों की विदाई पर नरेंद्र मोदी ने इसे भावुक क्षण बताया और कहा कि मतभेदों के बावजूद विदाई के समय सभी दलों में एकता और सम्मान की भावना दिखती है. राजनीति में नहीं होता फुल स्टॉप

राज्यसभा में विदाई का भावुक पल... PM मोदी ने आठवले को बताया ‘सदाबहार नेता’, बोले- आपकी कमी महसूस होगी
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संसद के सर्वोच्च सदन में बुधवार को उस समय भावुक माहौल देखने को मिला, जब राज्यसभा से रिटायर हो रहे 37 सांसदों की विदाई का अवसर आया. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में यह पल हमेशा भावुकता से भरा होता है, क्योंकि हर दो साल में ऐसे अवसर आते हैं जब साथ काम करने वाले साथी विदा लेते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में भले ही अलग-अलग मुद्दों पर बहस होती हो, कभी सहमति तो कभी असहमति बनती हो, लेकिन विदाई के समय सभी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक समान भाव महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की खूबसूरती है कि विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सम्मान और सहयोग की भावना बनी रहती है.

राजनीति में नहीं होता फुल स्टॉप

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पीएम मोदी ने विदा ले रहे सांसदों के भविष्य को लेकर भी आशावादी संदेश दिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीति में कभी फुल स्टॉप नहीं होता, बल्कि हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत देता है. कुछ सदस्य फिर से सदन में लौटेंगे, जबकि कुछ अपने अनुभवों के साथ समाज के अन्य क्षेत्रों में योगदान देंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि इन सभी का अनुभव देश के काम आता रहेगा. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं का विशेष उल्लेख भी किया. उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार और एच.डी.देव गौड़ा जैसे नेताओं की सराहना करते हुए कहा कि इनकी आधी से अधिक जिंदगी संसदीय कार्यों में बीती है. ऐसे अनुभवी नेताओं से नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए कि किस तरह समर्पण और अनुशासन के साथ सदन में काम किया जाता है.

आठवले के अंदाज पर गूंजे ठहाके

इस दौरान सदन में हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले. प्रधानमंत्री ने रामदास अठावले की खास अंदाज में तारीफ की. उन्होंने कहा कि आजकल सदन में हास्य का माहौल कम देखने को मिलता है, लेकिन आठवले जी अपनी व्यंग्य शैली से हमेशा माहौल को जीवंत बना देते हैं. उनके इस बयान पर सदन में ठहाके गूंज उठे, जिससे माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया.

उपसभापति हरिवंश की जमकर सराहना

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प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की भी खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि हरिवंश जी ने लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाया है. कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने सदन को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाई. इतना ही नहीं, वे सदन के बाहर भी देशभर में जाकर युवाओं को जागरूक करने का काम करते रहे हैं. प्रधानमंत्री ने हरिवंश को ‘कलम और कर्म दोनों में दक्ष’ बताते हुए उनकी कार्यशैली की प्रशंसा की. जब पीएम मोदी उनकी तारीफ कर रहे थे, तब हरिवंश जी हाथ जोड़कर विनम्रता से उनका अभिवादन करते नजर आए.

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इस पूरे कार्यक्रम के दौरान यह साफ नजर आया कि भारतीय लोकतंत्र में अनुभव, परंपरा और नई ऊर्जा का संतुलन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. विदाई के ये पल जहां भावुकता से भरे होते हैं, वहीं यह संदेश भी देते हैं कि जनसेवा का सफर कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि समय के साथ नए रूप में आगे बढ़ता रहता है.

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