×
जिस पर देशकरता है भरोसा

श्री लाडली जी महाराज मंदिर: श्रीकृष्ण के परपोते ने की थी स्थापना, जानें क्यों है लड्डूमार और लठमार होली के लिए विश्व प्रसिद्ध

मंदिर बरसाना की प्रमुख भानुगढ़ (ब्रह्मांचल) पहाड़ी की चोटी पर बना है, जिसे 'श्री जी मंदिर' या 'राधा रानी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है. इसी के साथ इसे 'बरसाने का माथा' भी कहा जाता है, और मंदिर की ऊंचाई लगभग 250 मीटर है.

श्री लाडली जी महाराज मंदिर: श्रीकृष्ण के परपोते ने की थी स्थापना, जानें क्यों है लड्डूमार और लठमार होली के लिए विश्व प्रसिद्ध
Advertisement

देश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक, होली का उत्सव अब बहुत नजदीक है. पूरे देश में 4 मार्च को रंग और गुलाल का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाएगा, लेकिन होली एक ऐसा त्योहार है जिसका उत्सव कई जगहों पर पहले से ही शुरू हो जाता है, जिनमें प्रमुख ब्रज की होली है, जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है.

'राधा रानी मंदिर' में होता लड्डूमार और लठमार होली का अनोखा उत्सव 

ब्रज के उन्हीं जगहों में से एक बरसाना के 'श्री लाडली जी महाराज मंदिर’, जिसमें लड्डूमार और लठमार होली का अनोखा उत्सव मनाया जाता है. यह प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित है, जो देवी राधा को समर्पित है. मंदिर में मुख्य रूप से श्री राधारानी (लाडली जी) और भगवान श्रीकृष्ण (लाल जी) की एक साथ पूजा की जाती है, इसलिए इसे 'श्री लाडली जी महाराज मंदिर' के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है शहर की प्रिय पुत्री और पुत्र.

मंदिर मुख्य रूप से अपने लोकप्रिय त्योहारों के लिए जाना जाता है

मंदिर बरसाना की प्रमुख भानुगढ़ (ब्रह्मांचल) पहाड़ी की चोटी पर बना है, जिसे 'श्री जी मंदिर' या 'राधा रानी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है. इसी के साथ इसे 'बरसाने का माथा' भी कहा जाता है, और मंदिर की ऊंचाई लगभग 250 मीटर है. मंदिर मुख्य रूप से अपने लोकप्रिय त्योहारों के लिए जाना जाता है, जिनमें राधाष्टमी, जन्माष्टमी, लड्डूमार और लठमार होली शामिल हैं. 

Advertisement

राधा-कृष्ण को 'छप्पन भोग' अर्पित किए जाते हैं

विशेष अवसरों पर मंदिर को खासतौर पर फूलों से सजाया जाता है और राधा-कृष्ण को 'छप्पन भोग' अर्पित कर उनकी भव्य आरती की जाती है.  इस मौके पर यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्तों और पर्यटकों का तांता लगता है, जो इस जगह की शोभा को कई गुणा बढ़ा देता है. 

श्रीकृष्ण के परपोते ने की थी मंदिर की स्थापना

मान्यता है कि राधा रानी मंदिर की स्थापना लगभग 5000 साल पहले राजा वज्रनाभ के द्वारा की गई थी, जो कि भगवान श्रीकृष्ण के परपोते थे. मंदिर का माहौल हमेशा 'राधा-राधा' के जाप से गूंजता रहता है और भक्तों को मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.

लड्डूमार होली में क्या होता है?

Advertisement

बरसाना की लड्डूमार होली में मंदिर के पुजारी और भक्त हवा में लड्डू फेंकते हैं, और लोग उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. 

बरसाना में क्यों होती है लठमार होली?

यह भी पढ़ें

वहीं, लट्ठमार होली में बरसाना की महिलाएं नंदगांव से आए पुरुषों पर लाठियों से प्रहार करती हैं और पुरुष खुद को ढाल से बचाने की कोशिश करते हैं. यह परंपरा श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम-लीलाओं से प्रेरित है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना राधा और उनकी सखियों को रंगने आते थे, तब राधा और उनकी सखियां उन्हें लाठियों से खदेड़ा करती थी. उसी परंपरा को जीवित रखने के लिए आज तक इस उत्सव को बरसाना में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो विश्वभर में प्रसिद्ध है. 

टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें