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EV Vs Petrol-Diesel: क्यों पिछड़ रही है इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री? जानिए दो बड़े कारण

सरकार EV को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इनके लिए सस्ती कीमत, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क और स्पष्ट नीतियां जरूरी हैं, तभी इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीजल से मुकाबला कर पाएंगे.

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20 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
07:12 AM )
EV Vs Petrol-Diesel: क्यों पिछड़ रही है इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री? जानिए दो बड़े कारण
Image Source: Social Media
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EV Vs Petrol-Diesel: देश में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा दे रही है. सरकार सब्सिडी दे रही है, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर धीरे-धीरे सुधर रहा है और ऑटो कंपनियां भी लगातार नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं. इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल वाहन अभी भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री काफी पीछे चल रही है. ई-रिक्शा, ई-बस और छोटे कमर्शियल व्हीकल्स में थोड़ी ग्रोथ जरूर दिख रही है, लेकिन यह ग्रोथ पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में बहुत कम है.

पेट्रोल वाहनों की तुलना में ईवी रजिस्ट्रेशन धीमा


EnviroCatalysts की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में जनवरी से सितंबर तक लगभग 2.7 लाख पेट्रोल दोपहिया रजिस्टर हुए, जबकि केवल 26,613 इलेक्ट्रिक दोपहिया ही रजिस्टर हुए. 2025 में पेट्रोल टू-व्हीलर बढ़कर 3.2 लाख हो गए, लेकिन इलेक्ट्रिक दोपहिया केवल 27,028 ही रहे.
चार-पहिया कारों में भी यही स्थिति है. पेट्रोल कारों की बिक्री सबसे ज्यादा रही, जबकि इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर केवल 3,848 से बढ़कर 9,905 तक पहुंची. खास बात यह है कि tourist class की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री और भी कम रही 2024 में 1,748 रजिस्ट्रेशन हुए थे, जबकि 2025 में सितंबर तक सिर्फ 466. इसका मतलब साफ है कि EV की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बहुत धीमी है.


थ्री-व्हीलर और बस सेगमेंट में थोड़ी बढ़त


थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक वाहन पिछले साल के 8,379 रजिस्ट्रेशन के मुकाबले 2025 में 11,331 रजिस्टर हुए. हालांकि, यात्री ई-ऑटो की संख्या थोड़ी घट गई.
ई-बसों की संख्या भी थोड़ी बढ़ी है, लेकिन डीजल बसों की बिक्री भी साथ-साथ बढ़ रही है. इसलिए कुल मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहन ग्रोथ उतनी बड़ी नहीं दिखती.

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ईवी बिक्री धीमी रहने के दो बड़े कारण


1. महंगे स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस


ई-ऑटो और कई इलेक्ट्रिक वाहनों में कंट्रोलर, मोटर और बैटरी की कीमत बहुत ज्यादा होती है. कई बार ये पार्ट्स 1 लाख रुपये से भी ज्यादा के होते हैं. यह खर्च आम वाहन मालिक या ऑटो ड्राइवर के लिए बहुत भारी पड़ता है.
इसके विपरीत CNG या पेट्रोल वाहन की मेंटेनेंस लागत काफी कम होती है. इसलिए लोग EV की जगह CNG या पेट्रोल गाड़ी लेना ज्यादा पसंद करते हैं.


2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतियों की कमी


EnviroCatalysts के विश्लेषक सुनील दहिया के अनुसार, भारत में EV बिक्री बढ़ाने के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क और स्पष्ट, स्थिर नीतियों की जरूरत है.
अभी कई शहरों में चार्जिंग स्टेशन कम हैं और सब्सिडी या नीतियों में बदलाव ग्राहकों को कंफ्यूज कर देते हैं. इससे लोग इलेक्ट्रिक वाहन लेने में हिचकिचाते हैं.
 
यानी साफ है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री धीमी होने के पीछे महंगे पार्ट्स, मेंटेनेंस का खर्च और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य कारण हैं.
भले ही सरकार EV को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इनके लिए सस्ती कीमत, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क और स्पष्ट नीतियां जरूरी हैं, तभी इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीजल से मुकाबला कर पाएंगे.

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