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जो अमेरिका ना कर सका, भारत ने कर दिखाया! रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए पेश की 3 सूत्रीय पहल, यूरोप भी राजी!

रूस-यूक्रेन संघर्ष खत्म के लिए भारत ने तीन सूत्रीय पहल पेश की है. समुद्री जहाजों, खाद्य सप्लाई और ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है. इससे पहले अक्टूबर में भी भारत की ओर से सबसे ठोस शांति प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसका दोनों देशों ने समर्थन किया था.

Image Source: IANS
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जिस रूस-यूक्रेन संघर्ष को अमेरिका, यूएन, यूरोपीय देश खत्म नहीं कर पाए, उसे भारत कर सकता है. संभावना और मोदी सरकार की कोशिशें उसी दिशा में जा रही हैं. अक्टूबर की शुरुआत में भारत भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक नया तीन-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसे दोनों देशों ने स्वीकार भी किया था और रूस ने इसे अब तक का सबसे व्यापक प्रस्ताव करार दिया था और भारत की तत्परता की सराहना भी की थी.

इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की ओर से तीन सूत्रीय पहल की गई है. आपको बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को सीमित करने और उसके वैश्विक प्रभावों को कम करने के लिए भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों और यूरोप के साथ बातचीत कर रहा है. 

क्या है भारत की तीन सूत्रीय पहल?

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भारत ने जो तीन सूत्रीय पहल पेश की है, जिससे कि जंग का असर पूरी दुनिया, सप्लाई चेन, ऑयल ट्रेड आदि पर कम करना है. इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकना, काला सागर के रास्ते अनाज का निर्यात बहाल करना और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का रास्ता तलाशना शामिल है. 

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अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा, "भारत ने रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ संघर्ष के इन तीन पहलुओं पर चर्चा की है. भारत की कोशिश है कि ऐसे व्यावहारिक रास्ते निकाले जाएं, जिनसे युद्ध के बीच भी आम नागरिकों, वैश्विक व्यापार और खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति को नुकसान से बचाया जा सके."

भारत ने रूस, यूक्रेन के साथ-साथ यूरोप से भी की चर्चा?

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जयशंकर ने कहा, "हमने रूस के साथ बातचीत की है. यूरोप के साथ भी चर्चा की है और यूक्रेन से भी इन तीन पहलुओं पर बात हुई है. पहला, नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमला नहीं होना चाहिए. दूसरा, रूस और यूक्रेन दोनों से अनाज का निर्यात बहाल करने का रास्ता तलाशना है, क्योंकि काला सागर में इसका प्रवाह काफी कम हो गया है. तीसरा मुद्दा ऊर्जा से जुड़ा है."

ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकना सबसे टेढी खीर!

उन्होंने माना कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने का मुद्दा बाकी दोनों विषयों की तुलना में अधिक जटिल है, क्योंकि अलग-अलग पक्षों के लिए ऊर्जा ढांचे की परिभाषा अलग-अलग हो सकती है. विदेश मंत्री ने कहा, "ऊर्जा पर हमला नहीं करने का मुद्दा शायद सबसे जटिल है, क्योंकि अलग-अलग पक्ष इसे अलग-अलग तरह से देखते हैं. किसी के लिए ऊर्जा बुनियादी ढांचे का मतलब तेल रिफाइनरी है, तो किसी के लिए बिजली ग्रिड. ईंधन ले जाने वाले जहाजों से जुड़े मुद्दे भी हैं. इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि सभी पक्षों को एक साथ लाकर इन विषयों पर बातचीत की जा सके."

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अनाज निर्यात का मुद्दा भी काफी अहम!

अनाज निर्यात का मुद्दा भारत के लिए केवल रूस और यूक्रेन के बीच व्यापार तक सीमित नहीं है. इसका सीधा संबंध उन विकासशील देशों से भी है, जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए काला सागर क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं. जयशंकर ने कहा कि अनाज का मुद्दा ग्लोबल साउथ के लिए बड़ी चिंता है, क्योंकि इसके प्रमुख खरीदारों में विकासशील देशों की बड़ी संख्या शामिल है.

रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है भारत!

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भारत की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह दोनों पक्षों के साथ अपने उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के अलावा विदेश मंत्री ने भी मास्को और कीव का दौरा किया है. इस दौरान रूस और यूक्रेन दोनों के नेतृत्व के साथ संवाद जारी रखा गया है.

जयशंकर ने कहा, "प्रधानमंत्री ने दिल्ली में और उससे पहले बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत की थी. वह खुद पहले मास्को गए थे और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने कीव का दौरा किया और यूक्रेनी पक्ष के साथ संपर्क बनाए रखा है."

भारत ने अमेरिका को भी अपनी बातचीत और प्रयासों से अवगत कराया है. जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका की अपनी शांति मध्यस्थता पहल है और भारत उसके साथ समन्वय कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम इस मामले में अमेरिका के साथ भी समन्वय कर रहे हैं, क्योंकि उनकी अपनी शांति मध्यस्थता कर रहे हैं. विदेश मंत्री मार्को रूबियो को मोटे तौर पर पता है कि इस दिशा में क्या बातचीत चल रही है."

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भारत ने मध्यस्थता पर विस्तार से बताने से किया इनकार!

हालांकि, जयशंकर ने बातचीत की मौजूदा स्थिति और संभावित प्रगति के बारे में सार्वजनिक रूप से अधिक जानकारी देने से परहेज किया. उन्होंने कहा, "अभी मैं इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं कर सकता."

जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत का व्यापक संदेश भी इसी कूटनीतिक दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा. जयशंकर ने कहा, "दुनिया के सामने व्यापक प्रभाव डालने वाले दोनों बड़े संघर्षों का सैन्य समाधान नहीं हो सकता. इसके लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना जरूरी है और भारत अपनी ओर से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है."

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जी20 बैठक से इतर जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई.

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अक्टूबर में भी भारत ने दिया था रूस-यूक्रेन के बीच जंग खत्म करने का शांति प्रस्ताव!

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अक्टूबर में जब भारत ने रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष के समाधान का रास्ता दिया था और एक ठोस प्रस्ताव दिया था तो रूस ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान में योगदान देने की भारत की तत्परता के लिए आभार व्यक्त किया था. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसको लेकर कहा था कि रूस इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सुझाव देने की भारत की तत्परता की सराहना करता है. उन्होंने यह टिप्पणी मॉस्को में मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए की थी, जिसमें भारत द्वारा यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक नया तीन-सूत्रीय प्रस्ताव भेजे जाने की खबरों का जिक्र था.

रूस-यूक्रेन ने जंग खत्म करने के लिए भारत के प्रस्ताव का किया समर्थन!

उनका यह बयान यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा द्वारा भारत के संभावित युद्धविराम प्रस्ताव को कीव को प्राप्त चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताने के बाद आया था. श्री सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन युद्ध अभियानों, ऊर्जा और बंदरगाह अवसंरचना के साथ-साथ काला सागर को भी शामिल करने वाले युद्धविराम पर विचार करने के लिए तैयार है.

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वहीं सितंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी संघर्ष के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण की प्रशंसा की थी. उन्‍होंने कहा था कि पीएम मोदी के पास पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए बहुत अच्छे विचार हैं.

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रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. इस युद्ध में हजारों नागरिक मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. भारत ने इस संघर्ष को सुलझाने के लिए लगातार संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है.

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