'टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया...,' भारत-अमेरिका डील के बाद पाकिस्तान का छलका दर्द, ख्वाजा आसिफ बोले- हमने US के लिए ...
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद पाकिस्तान की नाराजगी खुलकर सामने आई है. नेशनल असेंबली में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर पाकिस्तान का 'इस्तेमाल कर छोड़ देने' का आरोप लगाया और तीखा बयान दिया.
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भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान पिछले वर्ष खुद को मजबूत स्थिति में मान रहा था. इसकी एक वजह भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर पैदा हुआ तनाव भी माना जा रहा था. इसी दौरान पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने अमेरिका से संपर्क बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी थीं. उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भी कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए, जिससे पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा. हालांकि, वैश्विक बाजार और तेजी से उभरती भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्व को देखते हुए अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी.
दरअसल, अब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर मुहर लगने के बाद पाकिस्तान का दर्द छलका है. इसके संकेत पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से मिले हैं. नेशनल असेंबली में बोलते हुए उन्होंने अमेरिका पर पाकिस्तान का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 'टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया' और काम निकलने के बाद उसे छोड़ दिया.
ख्वाजा आसिफ ने पूर्व सेना प्रमुखों पर लगाए आरोप
अपने संबोधन के दौरान ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के दो पूर्व सेना प्रमुखों जनरल जियाउल हक और जनरल परवेज मुशर्रफ पर भी निशाना साधा और उस दौर की नीतियों को मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार ठहराया. संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ जो विद्रोह खड़ा हुआ, वह अमेरिका की रणनीति का हिस्सा था. उस समय पाकिस्तान की सरकार ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए इसमें भागीदारी की, जिसे उन्होंने बड़ी भूल बताया. आसिफ ने आगे कहा कि उस संघर्ष को ‘जिहाद’ का नाम दिया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी. उनके मुताबिक, सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर जबरन कब्जा नहीं किया था, बल्कि वहां की तत्कालीन सरकार ने उसे आमंत्रित किया था. उन्होंने माना कि पाकिस्तान को उस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए था. पाकिस्तान के मंत्री ख्वाजा आसिफ का संसद में दिया गय वीडियो अफगानिस्तान की निर्वासित संसद की सदस्य मरियम सोलेमंखी ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया.
Khwaja Asif admits in Parliament that Pakistan rented itself out to the U.S. for war and was later discarded “like toilet paper”. Afghanistan was destroyed by policies now openly acknowledged in parliament. Millions suffered. Generations were lost. The world cannot look away now… pic.twitter.com/aEQjrm16ME
— Mariam Solaimankhil (@Mariamistan) February 10, 2026
अफगानिस्तान की लड़ाइयों का ख्वाजा आसिफ ने किया जिक्र
नेशनल असेंबली में संबोधन के दौरान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की धरती पर लड़ी गई दो लड़ाइयों में पाकिस्तान ने मजहब या इस्लाम की खातिर हिस्सा नहीं लिया था. उनके मुताबिक, इन संघर्षों में शामिल होने की असली वजह उस समय के शासकों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता और एक महाशक्ति की सराहना पाने की इच्छा थी. आसिफ ने कहा कि उस दौर में अमेरिका को संतुष्ट करने के लिए देश का पाठ्यक्रम तक बदल दिया गया और आज तक उसे पूरी तरह पूर्ववत नहीं किया जा सका. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी ताकतों को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने अपने इतिहास की व्याख्या तक बदल दी. आखिर में उन्होंने सवाल उठाया कि इन फैसलों का देश को क्या लाभ मिला.
अमेरिका ने हमें हमेशा छोड़ा : ख्वाजा आसिफ
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में वर्ष 2001 का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी पाकिस्तान से गंभीर भूल हुई. उनके अनुसार, अमेरिका का साथ देने के लिए पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा लिया. हालांकि बाद में अमेरिका अफगानिस्तान से वापस चला गया, लेकिन इसके दुष्परिणाम पाकिस्तान को भुगतने पड़े, जिनकी भरपाई संभव नहीं है. रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के समर्थन में हर संभव सहयोग दिया. युद्ध अभियानों के लिए अपना एयरस्पेस उपलब्ध कराया, कराची बंदरगाह का इस्तेमाल करने दिया और मानव संसाधन तक मुहैया कराए. उन्होंने सवाल उठाया कि बदले में पाकिस्तान को क्या हासिल हुआ. आसिफ का आरोप था कि अमेरिका ने अपने हित साधने के बाद पाकिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया.
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बताते चलें कि ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करता है. भारत-अमेरिका बढ़ती नजदीकियों के बीच पाकिस्तान के भीतर अब अतीत के फैसलों की खुली समीक्षा होती दिख रही है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस आत्ममंथन के बाद पाकिस्तान अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है.
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