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होर्मुज संकट के बीच बड़ी राहत... 45000 टन LPG लेकर भारत की ओर बढ़ा सुपरटैंकर, गैस के बढ़ते दामों में मिल सकती है बड़ी राहत

ईरान-होर्मुज तनाव से एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है. 5 किलो सिलेंडर 261 रुपये और कमर्शियल 1000 रुपये महंगा हुआ है. पेट्रोल-डीजल पर भी असर की आशंका है. हालांकि 45000 टन एलपीजी लेकर एक भारतीय सुपरटैंकर के आने से राहत की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.

Image Source : Canva (Symbolic Photo)
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ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रहे तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में बढ़ी अनिश्चितता ने एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई को प्रभावित किया है. इसी बीच घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव भी बढ़ गया है. आम उपभोक्ताओं को रसोई गैस के बढ़ते दामों ने परेशान कर दिया है. जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक ऐसी ही रही तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.

एलपीजी सप्लाई पर वैश्विक संकट का असर

सरकारी आंकड़ों और बाजार रिपोर्टों के अनुसार ईरान युद्ध और होर्मुज जलमार्ग में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. इसी दबाव में सरकार ने 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में 261 रुपये की बढ़ोतरी की है. वहीं कमर्शियल सिलेंडर के दामों में करीब 1 हजार रुपये का इजाफा दर्ज किया गया है. इससे होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर सीधा असर पड़ा है. उपभोक्ताओं के बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है और लोगों में चिंता का माहौल है.

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भारत की ओर बढ़ता सुपरटैंकर

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इसी बीच ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत का एक 'सुपरटैंकर' कम से कम 45000 टन एलपीजी गैस लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर रहा है. इस जहाज को 'सर्व शक्ति टैंकर' बताया जा रहा है. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक यह टैंकर ओमान की खाड़ी से गुजरते हुए भारत की दिशा में बढ़ रहा है. शनिवार को यह लारक और केसम आइलैंड के पास देखा गया था. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टैंकर पूरी तरह होर्मुज को पार कर चुका है या नहीं. इसके भारत पहुंचने पर एलपीजी संकट में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाज

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रिपोर्ट्स के अनुसार फारस की खाड़ी में भारत के करीब 14 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं. इनमें से कुछ जहाजों ने होर्मुज जलमार्ग से बाहर निकलने की कोशिश की थी लेकिन ईरान की चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि कुछ टैंकर वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी बीच करीब 34 ईरान से जुड़े टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर आगे निकल चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक व्यापार के लिए चुनौती बनती जा रही है.

पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और हाल ही में यह 126 डॉलर तक पहुंच गई थीं. ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा. यदि सप्लाई संकट और गहराता है तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा. फिलहाल लोगों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार और सरकार के फैसलों पर टिकी हुई है.

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बताते चलें कि इस स्थिति को लेकर जानकारों का मानना है कि मौजूदा संकट केवल एक अस्थायी चुनौती नहीं है बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को भी दर्शाता है. भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. सरकार और तेल कंपनियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है ताकि सप्लाई को स्थिर रखा जा सके. आम लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे और गैस तथा ईंधन की कीमतों में राहत मिलेगी. फिलहाल सभी की निगाहें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और समुद्री सुरक्षा पर बनी हुई है.

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