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मुस्लिम देश मलेशिया से PM मोदी ने ‘पाकिस्तान’ को दिया आतंकवाद पर सख्त संदेश, PM अनवर इब्राहिम के साथ हो गई डील!

अपने मलेशिया दौरे पर पीएम मोदी ने आतंकवाद पर दो टूक संदेश दिया. उन्होंने इसके खिलाफ साझा लड़ाई की वकालत की है. उन्होंने साफ-साफ कहा कि इस पर कोई भी डबल स्टैंडर्ड और कोई समझौता बर्दाश्त नहीं होगा. यहां से दिया गया मैसेज कई मायनों में अहम है.

PM Modi in Malaysia (X)
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प्रधानमंत्री मोदी का एक बड़ा और अहम मुस्लिम देश मलेशिया का दौरा काफी चर्चा में है. यहां पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दो टूक, सख्त और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “आतंकवाद पर न कोई डबल स्टैंडर्ड और न ही कोई समझौता बर्दाश्त होगा.” वैसे तो मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ संयुक्त बयान में पीएम मोदी ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन वैश्विक संदर्भ में इस बयान को सीधे तौर पर आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. मलेशिया से आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का सीधा संदेश उतना ही जरूरी था, जितनी इसके खिलाफ लड़ाई. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि अनवर इब्राहिम से पहले 2018 से 2020 के दौरान महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री रहते मलेशिया के साथ भारत के संबंध काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे.

मलेशिया से आतंकवाद पर पाकिस्तान को दो टूक संदेश, क्यों खास?

महातिर मोहम्मद ने अपने 1 साल 291 दिन के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ऐसे कई कदम उठाए, जिससे भारत नाराज हुआ. उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर अल-जज़ीरा की तर्ज पर एक अलग इस्लामी चैनल बनाने की कोशिश की थी, बल्कि भारत के लिए बेहद संवेदनशील कश्मीर मुद्दे पर भी खुलकर पाकिस्तान की वकालत की थी. उन्होंने इमरान खान के साथ मिलकर कई बार भारत को असहज करने की कोशिश की. हालांकि बाद के वर्षों में उनकी सत्ता चली गई. अब वही मलेशिया है, जो भारत के साथ हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है, यहां तक कि आतंकवाद के मुद्दे पर भी.

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आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जब भी आतंकवाद की चर्चा होती है, पाकिस्तान का नाम स्वतः सामने आ जाता है. ऐसे में पीएम मोदी का यह बयान उसे सीधी चोट के तौर पर माना जा रहा है. पाकिस्तान अक्सर किसी आतंकी घटना के बाद खुद यह सफाई देता रहा है कि उसका उससे कोई लेना-देना नहीं है.

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ऐसे में पीएम मोदी के इस बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उन्होंने यह बात मलेशिया की धरती से कही है. पाकिस्तान लंबे समय से मलेशिया को अपना करीबी इस्लामिक मित्र देश मानता रहा है. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, धार्मिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं. ऐसे में मलेशिया में खड़े होकर आतंकवाद पर “नो डबल स्टैंडर्ड, नो कंप्रोमाइज” का संदेश देना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने सहयोग को और मजबूत करेंगे. इसमें काउंटर टेररिज्म, इंटेलिजेंस शेयरिंग और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत-मलेशिया की बढ़ती साझेदारी दोनों देशों के लिए बेहद अहम है. पीएम मोदी ने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान आपसी भरोसे और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार से ही संभव है, जो संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता की ओर संकेत करता है.

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PM मोदी-अनवर इब्राहिम के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बातचीत की. इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग, रक्षा और सुरक्षा, क्लीन एनर्जी, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, स्किल डेवलपमेंट और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर चर्चा की.

PM मोदी के दौरे से गदगद हुए अनवर इब्राहिम

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प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पीएम मोदी और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है और वे सभी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद रखते हैं. वहीं पीएम मोदी ने मलेशिया में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत को यादगार बताया और कहा कि कुछ ही घंटों में मलेशियाई संस्कृति और जीवन शैली को जिस खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया, वह हमेशा स्मरणीय रहेगा.

पीएम मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में भारत-मलेशिया संबंधों में जो गति और गहराई आई है, वह प्रेरणादायक है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों की असली ताकत पीपल-टू-पीपल कनेक्शन है. भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक भारत और मलेशिया के बीच एक “लिविंग ब्रिज” की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने हाल ही में डायस्पोरा से हुई मुलाकात को भी बेहद खास अनुभव बताया.

आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर क्या बोले पीएम मोदी?

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत व मलेशिया की समृद्धि एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी इस यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत, मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और सहयोग के हर क्षेत्र में विस्तार चाहता है.

वहीं मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री मोदी को भरोसेमंद और सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हुई बैठकें और दस्तावेजों का आदान-प्रदान बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक हैं. उन्होंने बताया कि भारत और मलेशिया के संबंध 1957 से चले आ रहे हैं और 2024 में इन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया.

भारत के साथ किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा मलेशिया

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प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच 11 दस्तावेजों और एमओयू का आदान-प्रदान हुआ है, जिसमें सुरक्षा सहयोग और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं.

उन्होंने भारत के साथ व्यापार को 8.59 बिलियन डॉलर से आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई और भारतीय रुपये तथा मलेशियाई रिंगित में व्यापार को एक बड़ी उपलब्धि बताया. शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के शिक्षा संस्थानों ने पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है.

रूस-यूक्रेन जंग और शांति बहाली की मलेशियाई पीएम ने की तारीफ

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प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पर्यटन और कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत पर भी बल दिया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सच्चे मित्रों के बीच भरोसे और समझ का प्रतीक है. उन्होंने यूक्रेन-रूस संघर्ष और गाजा समेत वैश्विक शांति प्रयासों में भारत की भूमिका की भी सराहना की.

मलेशिया-भारत के रिश्ते को प्रगाढ़ करेगा पीएम मोदी का यह दौरा

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पीएम मोदी का यह दौरा भारत और मलेशिया के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता को और गहराई देने वाला माना जा रहा है, जो साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और भविष्य की समान आकांक्षाओं पर आधारित है.

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