Advertisement
भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र कर अमेरिका ने मानी अपनी नाकामी? ट्रंप के मंत्री रुबियो ने वैश्विक व्यवस्था पर उठाए सवाल
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने UNGA में मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए. भारत-पाकिस्तान समेत बड़े विवादों का समाधान न कर पाने को लेकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए.
Advertisement
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया के कई देशों के बीच युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने वाले नेता के तौर पर पेश करते रहे हैं. हालांकि, अब उनके इन दावों पर उनकी ही सरकार के मंत्री और करीबी ने सवाल खड़े कर दिए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में ऐसा दावा किया है, जिसकी अब काफी चर्चा हो रही है.
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान मार्को रुबियो ने उस वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाया, जिसे खुद अमेरिका ने बनाया है और जिसमें भारत लंबे समय से बदलाव की मांग करता आया है. उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह निष्प्रभावी तक बता दिया. इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान का भी जिक्र किया.
रुबियो ने किस मुद्दे पर उठाया सवाल
Advertisement
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो ने अपने संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र समेत मौजूदा वैश्विक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई हैं और भारत-पाकिस्तान जैसे लंबे समय से चले आ रहे तनावों को सुलझाने में भी प्रभावी भूमिका निभाने में नाकाम रही हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संगठन अब ऐसे मुद्दों में भी दखल दे रहे हैं, जो उनके तय अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं. रुबियो ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से काफी आगे निकल चुकी है और दुनिया के बड़े संघर्षों को रोकने या उनका समाधान निकालने में सक्षम नहीं दिख रही. उन्होंने यह भी दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद कई देशों के नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रही है.
Advertisement
भारत-पाकिस्तान युद्ध की हुई चर्चा
Advertisement
रुबियो ने कहा कि अगर दुनिया में प्रभावी तरीके से काम करने वाली कोई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था होती, तो अलग-अलग देशों के बीच पैदा होने वाले कई तनावों को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता था. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर वैश्विक व्यवस्था होने पर थाईलैंड-कंबोडिया के बीच हुए संघर्ष और भारत-पाकिस्तान के विवाद जैसे मामलों से निपटने में मदद मिल सकती थी. लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नजर नहीं आता, जो इन बड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान निकाल सके. हालांकि, अपने बयान के बाद रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आलोचना या उस पर हमला करना नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी बात का उद्देश्य मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को उसके मूल उद्देश्यों और निर्धारित भूमिका की ओर वापस ले जाने की जरूरत पर जोर देना है.
क्या हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावों की सच्चाई?
रुबियो के इस बयान के बाद ट्रंप के उन दावों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं, जिनमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने का श्रेय खुद को दिया था. दरअसल, पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी कोशिशों से दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ. उन्होंने अलग-अलग मौकों पर इस दावे को दोहराया भी. हालांकि, भारत का रुख इस मामले में लगातार स्पष्ट रहा है. भारतीय पक्ष ने कई बार कहा है कि संघर्षविराम किसी तीसरे देश की मध्यस्थता का नतीजा नहीं था. भारत और पाकिस्तान के बीच DGMO स्तर पर हुई बातचीत के बाद दोनों पक्ष सीजफायर पर सहमत हुए थे. भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी बाहरी मध्यस्थ की भूमिका नहीं थी.
Advertisement
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि रुबियो के बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका की विदेश नीति और ट्रंप के भारत-पाकिस्तान सीजफायर से जुड़े दावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. वहीं, भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि दोनों देशों के बीच संघर्षविराम आपसी सैन्य बातचीत के जरिए हुआ था. ऐसे में रुबियो की टिप्पणी ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.