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पोलैंड में तख्तापलट की कोशिश! सरकार ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के चीफ को हटाया, हिंसक प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति देश लौटे
पोलैंड में संवैधानिक ट्रिब्यूनल के चीफ को हटाने का विवाद गहरा गया है. सरकार ने इसके पीछे सरकार के खिलाफ साजिश करार दिया. वहीं इस फैसले के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. इसी बीच सेनेगल के दौरे पर राष्ट्रपति को रास्ते से ही स्वदेश लौटना पड़ा.
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पोलैंड में कथित तख्तापलट की कोशिशों के बीच विरोध-प्रदर्शन बढ़ गया है. सरकार के खिलाफ कथित साजिशों को लेकर पोलैंड के सुप्रीम कोर्ट चीफ को आधी रात को हटा दिया गया. उनके निलंबन ने हंगामा खड़ा कर दिया है. देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है, जिसके चलते पोलिश राष्ट्रपति कैरोल नाव्रोकी को अपनी विदेश यात्रा बीच में छोड़कर स्वदेश लौटना पड़ा.
कोर्ट चीफ के निलंबन पर पोलैंड में बवाल
यह कदम तब उठाया गया जब देश की संवैधानिक न्यायाधिकरण (टीके) के अध्यक्ष और उनके डिप्टी को सस्पेंड करने का आदेश प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की ओर से जारी किया गया. विपक्षी नेताओं ने इस कदम को "तख्तापलट" करार दिया, जबकि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कानून बहाल करने के प्रयासों का बचाव किया.
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इस्लामिस्टों-शरणार्थियों को अपने देश में घुसने नहीं देता है पौलैंड
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पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के शीर्ष न्यायाधीश को निलंबित किए जाने के बाद शुक्रवार रात को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. आपको बता दें कि टस्क बीते दिनों भारत के दौरे पर आए थे और उन्होंने भारत और पीएम मोदी की तारीफ की थी. यही बात कथित तौर पर पोलैंड के वामपंथियों को पसंद नहीं आई. टस्क को राइटविंगर पीएम माना जाता है. वो गर्व से कहते रहे हैं कि पोलैंड में एक भी आतंकवादी हमला नहीं होता है क्योंकि वो कट्टरपंथी इस्लामिस्टों और एक भी शरणार्थियों को अपने देश में घुसने नहीं देता है. कहा जाता है कि पोलैंड का स्टैंड ट्रंप को पसंद नहीं आ रहा है, इसलिए कथित तौर पर डीप स्टेट यहां एक्टिव हो गई है.
पोलैंड में बवाल के बीच राष्ट्रपति को लौटना पड़ा स्वदेश
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पोलिश न्यूज एजेंसी PAP के अनुसार, निलंबन के इन आदेशों ने अदालत के नेतृत्व को लेकर चल रहे लंबे विवाद को और गहरा कर दिया है. यह विवाद उन पांच जजों की स्थिति को लेकर भी है, जिन्हें संसद ने चुना था, लेकिन न्यायाधिकरण अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की ने उन्हें मामलों की सुनवाई करने से रोक दिया था. नाव्रोकी ने इन जजों को पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था. बाद में, इन पांचों जजों ने संसद में आयोजित एक समारोह में शपथ ली, जिसे नाव्रोकी और श्विएचकोव्स्की वैध नहीं मानते हैं.
टीके एक विशेष अदालत है जो पोलिश कानूनों की संवैधानिक वैधता पर फैसला सुनाती है. यह संस्था कई वर्षों से न्यायिक विवादों के केंद्र में रही है. पिछली सरकार, जिसका नेतृत्व 'लॉ एंड जस्टिस' (पीआईएस) पार्टी कर रही थी, पर आरोप लगा था कि उसने अपने वफादार जजों को नियुक्त करके इस संस्था का राजनीतिकरण कर दिया है.
क्या है विवाद की जड़?
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प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की मध्यमार्गी गठबंधन सरकार, जो 2023 के अंत में सत्ता में आई थी, ने लगातार अदालत के फैसलों की अनदेखी की है और इस संस्था की वैधता पर सवाल उठाए हैं. शुक्रवार को, उन पांच जजों में से एक, अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचांस्की को एक महीने के लिए उनके कर्तव्यों से निलंबित करने का आदेश जारी किया. न्यायाधिकरण के मुख्यालय के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए.
एक जज के रूप में अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए, कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने निलंबन के कानूनी आधार के रूप में पोलैंड के 'कॉमन कोर्ट्स के संगठन से जुड़े कानून' के अनुच्छेद 130 का इस्तेमाल किया. इस प्रावधान के तहत, किसी जज को अस्थायी रूप से उनके कर्तव्यों से हटाया जा सकता है, यदि "उन्हें कोई जानबूझकर किया गया अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा जाए, या यदि उनके द्वारा किया गया कृत्य ऐसा हो जिससे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचे या सेवा के महत्वपूर्ण हितों के लिए उन्हें तुरंत आधिकारिक कर्तव्यों से हटाना आवश्यक हो जाए."
सेनेगल से वापस लौटे राष्ट्रपति
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नाव्रोकी ने कहा कि वे वापस लौट रहे हैं क्योंकि "ऐसे समय में, राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है." वारसॉ में पुलिस के संवैधानिक न्यायाधिकरण (कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल) की इमारत में दाखिल होने के बाद, नावरोकी ने 'एक्स' पर इसकी जानकारी दी. बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कुछ चीजें फेंकना शुरू कर दिया था. न्यायाधिकरण के 'एक्स' प्रोफाइल पर एक संदेश पोस्ट किया गया, जिसमें कहा गया कि उनकी वेबसाइट पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है और श्विएचकोव्स्की ही इस संस्था के अध्यक्ष बने हुए हैं.
अदालत के प्रवक्ता ने कहा कि "कोई चाहे कुछ भी सोचे", संवैधानिक न्यायाधिकरण की कमान अभी भी श्विएचकोव्स्की के हाथों में है. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का दखल पहले से ही तय (सुनियोजित) था.
Didn't take Donald Tusk long did it? The globalist cunt is trying to drag Poland backwards. Look at Western Europe, fight to stop your great nation falling like us. https://t.co/7rECAfEKCM
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 30, 2026Advertisement
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कोरविन-पियोट्रोव्स्का, जिन्होंने न्यायाधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष का पद संभाला है, ने कहा कि उनके कदम "संवैधानिक रूप से बेहद जरूरी" थे. उन्होंने श्विएचकोव्स्की पर कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिसमें अदालत की 'जनरल असेंबली' (आम सभा) की बैठक न होने देना भी शामिल है.
संवैधानिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोलैंड की सरकार और राष्ट्रपति के बीच चल रहे गतिरोध का मुख्य केंद्र बन गई है. अदालत का गठन और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया, पिछली दक्षिणपंथी सरकार और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 'कानून के शासन' को लेकर हुए विवाद के प्रमुख मुद्दे थे. यूरोपीय आयोग ने पोलैंड में लोकतंत्र के कमजोर होने और न्यायपालिका के राजनीतिकरण के आरोपों के चलते, वहां दी जाने वाली अरबों यूरो की फंडिंग रोक दी थी.
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सरकार और कोर्ट में पंगा पुराना!
2023 के संसदीय चुनाव में, टस्क ने न्यायपालिका की निष्पक्षता बहाल करने का मुख्य वादा किया था. इसी चुनाव के बाद उनकी गठबंधन सरकार सत्ता में आई. टस्क ने कहा कि कानून के शासन को बहाल करना सरकार का कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि पिछली 'लॉ एंड जस्टिस' (पीआईएस) सरकार के दौरान वर्षों तक जो अराजकता रही, उसके बाद अब निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है.
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शुक्रवार शाम को उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है. पीआईएस के दौर में वर्षों तक चली अराजकता के बाद, यह एक कठिन और कभी-कभी कष्टदायक प्रक्रिया है, जिसके लिए निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है. इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है."