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सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ, लेकिन कुछ ही समय में छोड़नी पड़ी... मधुरिमा की कहानी क्यों हो रही वायरल?
31 साल की मधुरिमा ने 70 हजार रुपये की सरकारी बैंक नौकरी छोड़ दी. 2 साल की तैयारी के बाद मिली इस नौकरी में कथित तौर पर लंबे काम के घंटे और वॉशरूम ब्रेक न मिलने से वह मानसिक और शारीरिक परेशानी से जूझने लगीं. नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड भी भरना पड़ा.
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देश में सरकारी नौकरी को आज भी सुरक्षित करियर की पहचान माना जाता है. अच्छी सैलरी, नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा की वजह से लाखों युवा इसके लिए सालों तक तैयारी करते हैं. लेकिन अगर यही नौकरी मानसिक सुकून छीनने लगे, तो क्या सिर्फ अच्छी सैलरी के लिए उसे जारी रखना सही होगा? पश्चिम बंगाल की 31 वर्षीय मधुरिमा की कहानी इसी सवाल को सामने रखती है. उन्होंने करीब 70 हजार रुपये महीने की बैंक नौकरी छोड़ दी और इसके लिए 2 लाख रुपये का बॉन्ड भी भरा. उनका कहना है कि नौकरी के दौरान काम का दबाव इतना बढ़ गया था कि उनकी सेहत और निजी जिंदगी दोनों प्रभावित होने लगी थीं.
दो साल की तैयारी के बाद मिली थी बैंक की नौकरी
मधुरिमा ने मास्टर डिग्री के बाद IBPS परीक्षा की तैयारी में करीब दो साल लगाए. अक्टूबर 2022 में उनका चयन एक सरकारी स्वामित्व वाले बैंक में हुआ और उन्हें कर्नाटक के ग्रामीण इलाके की शाखा में पोस्टिंग मिली. शुरुआत में यह नौकरी उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसी थी. उन्हें करीब 70 हजार रुपये इन-हैंड वेतन के साथ HRA भी मिल रहा था. आर्थिक रूप से सबकुछ बेहतर दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ समय बाद काम का दबाव उनकी परेशानी की बड़ी वजह बन गया.
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12 घंटे से ज्यादा काम और छुट्टी की परेशानी
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मधुरिमा ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि वह कई बार रोजाना 12 घंटे से ज्यादा काम करती थीं और रविवार को भी बैंक जाना पड़ता था. उनके मुताबिक, छुट्टियां मंजूर नहीं होती थीं और कैश काउंटर पर लगातार काम करने के कारण उन्हें लंबे समय तक ब्रेक तक नहीं मिल पाता था. उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से उन्हें गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) की समस्या हुई. नौकरी के साथ निजी जिंदगी भी प्रभावित हुई. दिसंबर 2022 में शादी के कुछ ही समय बाद उन्हें दोबारा ट्रेनिंग के लिए लौटना पड़ा. ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय भाषा की परेशानी के बावजूद उन्हें बैंक बंद होने के बाद नए ग्राहक जोड़ने और खाते खुलवाने के लिए बाहर जाने का काम भी दिया जाता था. मधुरिमा ने एक वरिष्ठ अधिकारी पर मौखिक दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया और बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत HR से की थी.
मानसिक दबाव बढ़ा तो लिया नौकरी छोड़ने का फैसला
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लगातार काम के दबाव का असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा. मधुरिमा के अनुसार, वह काम खत्म होने के बाद अक्सर रोती थीं और बेहद थकान महसूस करती थीं. फरवरी 2024 में एक दोस्त की शादी में जाने के लिए छुट्टी नहीं मिलने की घटना के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया. मार्च 2024 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
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2 लाख का बॉन्ड भरा, फिर शुरू की नई जिंदगी
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नौकरी छोड़ना भी आसान नहीं था. मधुरिमा के मुताबिक, बैंक छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड भुगतान करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने LinkedIn और दूसरे माध्यमों से रिमोट जॉब तलाशनी शुरू की. आखिरकार उन्हें बेंगलुरु के एक स्टार्टअप में नौकरी मिली, लेकिन शुरुआत में उनकी सैलरी घटकर 35 हजार रुपये रह गई. यानी पुरानी नौकरी के मुकाबले करीब आधी. कम वेतन के बावजूद उन्हें नए काम में मानसिक सुकून मिला. अब वह Senior Customer Support Executive के तौर पर काम कर रही हैं और उनकी सैलरी बढ़कर करीब 60 हजार रुपये हो चुकी है. वह हैदराबाद में अपने पति के साथ रहती हैं और घर से काम करती हैं.
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बताते चलें कि मधुरिमा की कहानी सिर्फ सरकारी नौकरी छोड़ने की कहानी नहीं है. यह उस बहस को भी सामने लाती है कि करियर में पैसा और नौकरी की सुरक्षा जरूरी हैं, लेकिन काम का माहौल और मानसिक सुकून भी उतने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं. हालांकि, उनके अनुभव व्यक्तिगत हैं और इससे सभी सरकारी या बैंक नौकरियों के कार्यस्थल के बारे में कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.