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अजित पवार के प्लेन क्रैश में जिस फीमेल पायलट शांभवी पाठक की गई जान, उसका क्या था धोनी से कनेक्शन! देखें अनदेखी तस्वीरें

महाराष्ट्र के बारामती प्लेन क्रैश में जिस यंग फीमेल पायलट शांभवी पाठक की जान चली गई उनकी प्रोफाइल चर्चे में है. उन्हें घर वाले चीनी था. वो अपनी दादी को दादू कहकर पुकारती थीं. उनकी तस्वीरें अब वायरल हो रही हैं.

Shambhavi Pathak (File Photos)/ Shambhavi Facebook
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महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई. बीती सुबह मुंबई से बारामती जा रहा चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में क्रैश हो गया. घना कोहरा और कम विजिबिलिटी (करीब 800 मीटर) को हादसे का मुख्य कारण बताया जा रहा है. विमान रनवे से फिसलकर खेत में गिर गया और देखते ही देखते आग का गोला बन गया. मृतकों में अजित पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी विदीप जाधव, पिंकी माली, पायलट सुमित कपूर और को-पायलट शांभवी पाठक शामिल थे.

पायलट शांभवी पाठक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली थीं और फिलहाल उनका परिवार दिल्ली में रह रहा था. शांभवी की बेहद कम उम्र में हुई विदाई ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. लोग उनके टैलेंट और अब तक की जर्नी को लेकर भावुक हैं और जानना चाहते हैं कि शांभवी का निजी जीवन, पढ़ाई और करियर कैसा रहा.

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शांभवी का परिवार छोटा लेकिन बेहद जुड़ा हुआ था. उनके घर में माता-पिता, एक भाई और दादी थीं. उनकी मां रोली शुक्ला की पढ़ाई क्राइस्ट चर्च कॉलेज से हुई थी, जबकि पिता भारतीय वायुसेना में थे, जिसके चलते उनकी देश-विदेश में पोस्टिंग होती रही. यह एक भरा-पूरा और खुशहाल परिवार था, जहां शांभवी की जिंदगी हंसी-खुशी गुजर रही थी.

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पिता की पोस्टिंग के कारण शांभवी ने भारत ही नहीं, बल्कि काबुल से लेकर कोरिया तक कई जगहों की यात्रा की. इस वजह से उन्हें कम उम्र में ही दुनिया को करीब से देखने और समझने का मौका मिला, जिसने उनके व्यक्तित्व और सोच को काफी विस्तार दिया.

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शांभवी के बारे में यह भी सामने आया है कि वह टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बहुत बड़ी फैन थीं. उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर धोनी के साथ करीब 13 साल पुरानी एक तस्वीर भी मिली है, जिसे उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए “Dhoniiiiiiiii” और इमोजी के साथ साझा किया था. यह तस्वीर 2011 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद के दौर की बताई जा रही है.

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कहा जा रहा है कि शांभवी ने अपना आखिरी मैसेज अपनी दादी को किया था, जिन्हें वह प्यार से “दादू” कहकर बुलाया करती थीं. आमतौर पर वह दादी को कभी-कभार ही मैसेज करती थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. प्लेन में सवार होने से पहले उन्होंने अपनी दादी को “गुड मॉर्निंग दादी” लिखा था, जो उनका आखिरी संदेश बन गया.

पिता के वायुसेना में होने की वजह से शांभवी में देश सेवा के प्रति गहरा लगाव था. भारतीय वायुसेना के अधिकारी की बेटी होने के नाते उनका सेना और सैनिकों से भावनात्मक जुड़ाव रहा.

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उन्होंने 2016 से 2018 के बीच ग्वालियर स्थित नंबर-1 एयरफोर्स बाल भारती स्कूल में पढ़ाई की थी और वह मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब की सदस्य भी थीं. हादसे के समय वह दिल्ली स्थित वीएसआर एविएशन (VSR Aviation/VSR Ventures) में पायलट के रूप में कार्यरत थीं और फर्स्ट ऑफिसर यानी को-पायलट की जिम्मेदारी निभा रही थीं.

बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली पायलट शांभवी पाठक का ग्वालियर से गहरा और अटूट रिश्ता था. एयरफोर्स अफसर की बेटी शांभवी ने देश के कई दिग्गजों को आसमान की सैर कराई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.

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उनकी दादी ने बताया कि शांभवी अक्सर वीआईपी लोगों के साथ उड़ान भरा करती थीं और वह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली से बेहद प्रभावित थीं.

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दादी के अनुसार, परिवार में शांभवी का निकनेम ‘चीनी’ था. वह स्वभाव से बेहद मिलनसार, मेहनती और होनहार थीं, और हर किसी से आसानी से घुल-मिल जाती थीं.

इंजीनियरिंग छोड़कर पायलट बनने का उनका फैसला उनकी काबिलियत और जुनून को दर्शाता है. ग्वालियर के स्कूल से पढ़ाई करने और न्यूजीलैंड में ट्रेनिंग लेने के बाद वह एक शानदार वीआईपी पायलट बनीं, जो परिवार और देश दोनों के लिए गर्व की बात थी.

ग्वालियर के वसंत विहार (D-61) में रहने वाली उनकी दादी मीरा पाठक का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने शांभवी के साथ हुई अपनी आखिरी बातचीत को साझा करते हुए बताया कि वह हमेशा परिवार का ख्याल रखती थीं.

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कैप्टन शांभवी पाठक की शुरुआती पढ़ाई मुंबई से हुई थी. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिक्स और एविएशन साइंस में बीएससी की पढ़ाई की. इसके बाद वह न्यूजीलैंड चली गईं, जहां उन्होंने पायलट की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली.

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न्यूजीलैंड में उन्होंने न्यूजीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट अकादमी से कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग हासिल की. साल 2018 से 2019 के बीच उन्होंने यहां प्रोफेशनल फ्लाइंग के गुर सीखे. यहीं से उन्हें न्यूजीलैंड सिविल एविएशन अथॉरिटी का कमर्शियल पायलट लाइसेंस भी प्राप्त हुआ.

न्यूजीलैंड से ट्रेनिंग लेने के बाद शांभवी भारत लौटीं और डीजीसीए से कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल किया. उन्होंने ‘फ्रोजन एटीपीएल’ भी पूरा किया, जिसे एयरलाइन पायलट बनने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. इसके अलावा उनके पास फ्लाइट इंस्ट्रक्टर की रेटिंग भी थी, जिससे वह दूसरों को उड़ान की ट्रेनिंग देने के लिए भी योग्य थीं.

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अपने करियर में शांभवी ने विमान उड़ाने के साथ-साथ असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान उन्होंने नए पायलटों को ट्रेनिंग दी और कई लोगों को उड़ान के काबिल बनाया.

पायलट के लिए उड़ान के साथ-साथ सुरक्षा नियमों की समझ भी बेहद जरूरी होती है. शांभवी ने स्पाइसजेट से AVSEC यानी एविएशन सिक्योरिटी की ट्रेनिंग ली थी और A320 जेट से जुड़ी ओरिएंटेशन ट्रेनिंग भी सफलतापूर्वक पूरी की थी.

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अगस्त 2022 से वह VSR Ventures Pvt. Ltd. में फुल-टाइम फर्स्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं. यहां वह Learjet-45 जैसे हाई-परफॉर्मेंस बिजनेस जेट को उड़ाने की जिम्मेदारी संभालती थीं, जो आमतौर पर वीआईपी, उद्योगपतियों और विशेष यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

बिजनेस जेट सेक्टर में सैलरी अनुभव और कंपनी पर निर्भर करती है. Learjet जैसे जेट के फर्स्ट ऑफिसर को औसतन 3 से 4 लाख रुपये प्रति माह सैलरी मिलती है.

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अजित पवार के Learjet-45 की सह-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक भी बारामती में हुए इस दर्दनाक विमान हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल थीं.

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अजित पवार (66) महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े और प्रभावशाली चेहरों में से एक थे. वह कई बार उपमुख्यमंत्री रह चुके थे और सहकारी क्षेत्र, सिंचाई तथा ग्रामीण विकास में उनका अहम योगदान रहा. बारामती उनकी पारंपरिक सीट थी, जहां वह स्थानीय निकाय चुनावों के प्रचार के लिए जा रहे थे.

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