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UP अब देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में, CM योगी का बड़ा बयान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की पहचान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था. इसके लिए केवल नौकरशाही नहीं, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था. इसका नुकसान देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य और राष्ट्रीय विकास दोनों को उठाना पड़ा.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की नौ वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने 'पहचान के संकट' से निकलकर देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि सुशासन, तकनीक, टीमवर्क और सकारात्मक कार्यसंस्कृति ने प्रदेश की छवि बदलने में अहम भूमिका निभाई है.
“सरकार और जनता के बीच प्रशासनिक तंत्र ही सबसे महत्वपूर्ण सेतु है”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार और जनता के बीच प्रशासनिक तंत्र ही सबसे महत्वपूर्ण सेतु है और जनता की धारणा उसी की कार्यशैली से तय होती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीजी सिटी, सुल्तानपुर रोड, लखनऊ में 22 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में करीब 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नए परिसर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे.
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इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी सरकार और आमजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण सेतु हैं. यदि यह सेतु मजबूत होगा तो योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और शासन के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक थी, लेकिन आज राज्य देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है.
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'पब्लिक परसेप्शन बदलना ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी'
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सरकार अपने कार्यों का कितना भी प्रचार करे, लेकिन उसकी वास्तविक छवि जनता की धारणा से तय होती है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी सरकार और आमजन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं. यदि यह सेतु मजबूत होगा तो सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और शासन के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ेगा.
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पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बनाई नई पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की पहचान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था. इसके लिए केवल नौकरशाही नहीं, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था. इसका नुकसान देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य और राष्ट्रीय विकास दोनों को उठाना पड़ा. उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने 'पहचान के संकट' से बाहर निकलकर नई कार्यसंस्कृति विकसित की है. आज प्रदेश सुरक्षा, सुशासन, निवेश, तकनीक के उपयोग और बड़े आयोजनों के सफल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से आम लोगों की समस्याओं का समाधान संभव हुआ है.
उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का उदाहरण देते हुए कहा कि सांसद रहते हुए उन्हें राशन वितरण में गड़बड़ियों की सबसे अधिक शिकायतें मिलती थीं. सरकार बनने के बाद ई-पॉस मशीनों के माध्यम से पारदर्शिता लाई गई, जिससे पात्र लाभार्थियों तक राशन पहुंचना सुनिश्चित हुआ और शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई. उन्होंने कहा कि गरीब का हक छीनने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना सरकार की प्राथमिकता रही है. तकनीक के इस्तेमाल और प्रशासनिक ईमानदारी के कारण अब जरूरतमंदों तक उनका अधिकार पहुंच रहा है.
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से की खास अपील
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से टीमवर्क और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता सामूहिक प्रयासों से ही संभव होती है. उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच और व्यक्तिगत कार्यशैली बेहतर परिणाम नहीं दे सकती. प्रशासनिक व्यवस्था में नवाचार, अनुभव और सकारात्मक दृष्टिकोण को साथ लेकर चलने से ही बेहतर शासन मॉडल विकसित किए जा सकते हैं.