UP Election 2027: प्रतापगढ़ जिले की 7 विधानसभा सीटों का पूरा सियासी गणित, जानिए कौन-कहां से बना विधायक
प्रतापगढ़ को भारत की 'आंवला राजधानी' कहा जाता है। यहां बड़े पैमाने पर आंवले की खेती होती है. यहाँ 2022 के विधानसभा चुनाव में सभी 7 सीटों पर मिश्रित जीत का परिणाम देखने को मिला था.
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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें रामपुर खास, बाबागंज (सुरक्षित), कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी और रानीगंज शामिल हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन सात सीटों पर मिश्रित जीत का परिणाम देखने को मिला था. सपा से लेकर भाजपा और कांग्रेस तक को इन क्षेत्रों में जीत मिली थी.
रामपुर खास विधानसभा सीट
उत्तर प्रदेश की रामपुर खास विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' हैं. वे कांग्रेस की ओर से 18वीं विधानसभा में विधायक हैं. 2022 के चुनाव में कांग्रेस की आराधना मिश्रा मोना ने करीब 84,334 वोट प्राप्त कर भाजपा के नागेश प्रताप सिंह को 14,741 वोटों से हराया था. रामपुर खास उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से 244वीं सीट है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है. पिछले चुनाव में इस सीट पर लगभग 320,772 पंजीकृत मतदाता थे.
बाबागंज विधानसभा सीट
विनोद सरोज बाबागंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. 2022 के चुनाव में जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के विनोद सरोज ने करीब 67,282 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की और समाजवादी पार्टी के गिरीश पासी को 15,767 वोटों से हराया था. बाबागंज विधानसभा की 403 सीटों में से 245वीं सीट है. यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 319,665 पंजीकृत मतदाता थे.
कुंडा विधानसभा सीट
रघुराज प्रताप सिंह कुंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और 18वीं विधानसभा में जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2022 के चुनाव में जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के रघुराज प्रताप सिंह ने करीब 99,612 वोट प्राप्त कर समाजवादी पार्टी के गुलशन यादव को 30,315 वोटों से हराया था. कुंडा विधानसभा की 403 सीटों में से 246वीं सीट है. यह एक सामान्य सीट है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 357,938 पंजीकृत मतदाता थे.
विश्वनाथगंज विधानसभा सीट
जीत लाल पटेल विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जो 18वीं विधानसभा में अपना दल (सोनेलाल) का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2022 के चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) के जीत लाल पटेल ने करीब 86,829 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी और समाजवादी पार्टी के सौरभ सिंह को 48,052 वोटों से हराया था. विश्वनाथगंज विधानसभा की 403 सीटों में से 247वीं सीट है. यह एक सामान्य सीट है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 399,623 पंजीकृत मतदाता थे.
प्रतापगढ़ सदर विधानसभा सीट
राजेंद्र कुमार मौर्य प्रतापगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं और 18वीं विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2022 के चुनाव में भाजपा के राजेंद्र कुमार मौर्य ने करीब 89,762 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी. उन्होंने अपना दल (कामरावाड़ी) के कृष्णा पटेल को 25,063 वोटों से हराया था.
पट्टी विधानसभा सीट
प्रतापगढ़ विधानसभा की 403 सीटों में से 248वीं सीट है. यह एक सामान्य सीट है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 355,158 पंजीकृत मतदाता थे. राम सिंह पट्टी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और वे समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2022 के चुनाव में सपा के राम सिंह ने करीब 108,070 वोट प्राप्त करके भाजपा के राजेंद्र प्रताप सिंह को 22,051 वोटों से हराया था. पट्टी विधानसभा की 403 सीटों में से 249वीं सीट है. यह एक सामान्य सीट है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 366,452 पंजीकृत मतदाता थे.
रानीगंज विधानसभा सीट
राकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आरके वर्मा रानीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. वे समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2022 के चुनाव में सपा के राकेश कुमार वर्मा ने करीब 75,583 वोट प्राप्त कर भाजपा के अभय कुमार को 2,649 वोटों से हराया था. रानीगंज विधानसभा की 403 सीटों में से 250वीं सीट है. यह एक सामान्य सीट है. पिछले चुनाव में यहां लगभग 336,072 पंजीकृत मतदाता थे.
उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, आंवला उत्पादन और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है. इस जिले की स्थापना वर्ष 1858 में हुई थी. इसका प्रशासनिक मुख्यालय बेल्हा प्रतापगढ़ है. जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 3,730 वर्ग किलोमीटर है और यहां की आबादी लगभग 37 लाख है. यह प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आता है. इसके दक्षिण-पश्चिम में गंगा नदी बहती है और जिले के बीच से सई नदी गुजरती है. यहां मुख्य रूप से हिंदी और अवधी बोली जाती है.
राजा प्रताप बहादुर सिंह के नाम पर पड़ा प्रतापगढ़
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नाम का कारण भी इतिहास से जुड़ा है. 17वीं शताब्दी में 1628 से 1682 के दौरान स्थानीय राजा प्रताप बहादुर सिंह ने अरोर के पास एक किला बनवाया था, जिसका नाम 'प्रतापगढ़' रखा गया. इसी किले के नाम पर इस क्षेत्र और जिले का नाम प्रतापगढ़ पड़ा. स्वतंत्रता संग्राम और 1920 के किसान आंदोलन में भी इस जिले की बड़ी भूमिका रही है. प्रतापगढ़ को भारत की 'आंवला राजधानी' कहा जाता है. यहां बड़े पैमाने पर आंवले की खेती होती है और इससे बने उत्पाद जैसे मुरब्बा, कैंडी, च्यवनप्राश आदि देश-विदेश में भेजे जाते हैं.