पहले की पूजा, फिर खुद तोड़ा पुश्तैनी घर, CM मोहन यादव ने जहां लिया जन्म, उस पर क्यों चलाई कुदाल, इमोशनल Video वायरल
उज्जैन में पुस्तैनी घर तोड़े जाने से पहले CM मोहन यादव ने पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा, वे इसका कोई मुआवजा भी नहीं लेंगे. इसके बाद उन्होंने बुलडोजर चलाने का आदेश दिया.
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जिस घर में बचपन बीता, जहां के बरामदे में बचपन की खिलखिलाहट गूंजती है, जहां की दीवारों में बचपन की शरारतों के निशान हैं, उस पर हथौड़ा चलाना पड़ा तो दिल भारी होना लाजिम है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भी कुछ ऐसे ही हालात बन गए और उन्होंने खुद अपने पुश्तैनी घर पर कुदाल चलाई.
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा रास्ते में आ रहा था. जिसे हटाने के लिए CM मोहन यादव ने खुद कुदाल चलाया. इस दौरान वे भावुक भी हो गए. उन्होंने सांकेतिक रूप से खुद घर को तोड़ने के बाद बुलडोजर चलाने के आदेश दिए.
तोड़फोड़ से पहले पुश्तैनी घर की पूजा की
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले वहां जाकर अपने पैतृक घर में पूजा-अर्चना की. इसके बाद CM ने अपने पुश्तैनी मकान का एक हिस्सा तोड़ने के लिए खुद फावड़ा और हथौड़ा चलाया.
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा रास्ते में आ रहा था. जिसे हटाने के लिए CM मोहन यादव ने खुद कुदाल चलाया. इस दौरान वे भावुक भी हो गए. #MadhyaPradesh #Ujjain #ViralVideo pic.twitter.com/kYWLpWcAct
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दरअसल, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है. इसी सड़क चौड़ीकरण की जद में CM मोहन यादव का पैतृक मकान भी आ रहा था. सड़क चौड़ी करने के लिए उनके मकान का करीब 2.90 मीटर हिस्सा तोड़ा जा रहा है.
मोहन यादव ने शेयर की घर से जुड़ी यादें
अपने पुश्तैनी घर के बारे में बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, ‘जब मैंने 1982 में साइंस कॉलेज से अपना पहला चुनाव जीता (चाहे वह जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव हो, प्रेसिडेंट का चुनाव हो या विधायक का चुनाव) और उसके बाद मैंने जितने भी चुनाव लड़े, उन सभी का गवाह यह इलाका और यह घर रहा है.’
त्याग का बड़ा उदाहरण
उन्होंने कहा, अगर हम नेता बने हैं तो खुद उदाहरण बनना चाहिए. यह सच है कि हर किसी की एक जगह होती है जहां वे रहते हैं. पैदा होते हैं और अपना बचपन और जवानी बिताते हैं. हालांकि अगर समाज के लिए जरूरी हो, तो हमारे माता-पिता ने हमें ऐसी चीजों के लिए तैयार रहने के संस्कार दिए हैं. मोहन यादव ने कहा,
‘उज्जैन में यह आदर्श उदाहरण है कि लोग स्वेच्छा से अपने मकान को पीछे हटा रहे हैं. हमारे शहर की आबादी 8 लाख है लेकिन जब दुनियाभर से 30-40 करोड़ लोग यहां आएंगे तो किसी को कष्ट न हो इसके लिए हम अपनी तरफ से योगदान दें. उज्जैनवासियों के साथ मैं भी इस प्रक्रिया में शामिल हूं.’
इसी घर में मोहन यादव ने लिया जन्म
CM मोहन यादव ने कहा, यह मकान पिताजी ने अपनी मेहनत से बनाया था, जब हम आंख भी नहीं खोले थे तब से यह मकान है और इससे एक लगाव है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा, हमें खुशी है कि पूरे समाज के साथ पूरे मोहल्ले के लोग अपने-अपने आशियानों को तोड़ रहे हैं. इससे पूरे उज्जैन में बड़ा अच्छा संदेश जा रहा है. मैं अपनी पार्टी को भी धन्यवाद देता हूं.’
घर का मुआवजा नहीं लेंगे CM मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों ने अपने-अपने देवस्थान को पीछे हटाया और स्वेच्छा से इस पूरे अभियान का हिस्सा बने हैं. इसी से सरकार के प्रति लोगों का विश्वास बनता है. प्रधानमंत्री को भी धन्यवाद देना चाहूंगा, जिनकी वजह से राज्य में ऐसे बड़े-बड़े निर्णय हो पा रहे हैं. घर से बचपन की यादें जुड़ी हैं, थोड़ा भावुक क्षण है. इसके लिए माफी लेकिन कर्तव्य की वेदी पर हमें खुद को इन सारी बातों के लिए दृढ़ता से तैयार रखना चाहिए. हम सब इस बात के लिए तैयार हैं कि हमारे अपने 'अवंतिका' में लाखों वर्षों से आतिथ्य की परंपरा रही है. हम अपने घर का कोई मुआवजा नहीं लेंगे, इसकी जरूरत नहीं है. यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है.’
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