अमृतसर से गिरफ्तार हुआ 'गद्दार'... सेना की गोपनीय जानकारी देने वाले लीक करने वाले जासूस को पंजाब पुलिस ने दबोचा

पंजाब के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने अमृतसर से पाकिस्तान को भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी भेजने के आरोप में किसान हरपाल सिंह को गिरफ्तार किया है. आरोपी पिछले एक साल से ISI के संपर्क में था. उसके पास से मोबाइल फोन और सीडी बरामद की गई है.

अमृतसर से गिरफ्तार हुआ 'गद्दार'... सेना की गोपनीय जानकारी देने वाले लीक करने वाले जासूस को पंजाब पुलिस ने दबोचा
Social Media (File Photo)

पंजाब के खुफिया तंत्र ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी रविवार देर रात पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल द्वारा की गई. आरोपी की पहचान हरपाल सिंह (Harpal Singh) के रूप में हुई है, जो अमृतसर जिले की अजनाला तहसील के सीमावर्ती इलाके का रहने वाला है और पेशे से किसान बताया जा रहा है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह बीते एक साल से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था और भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान भेज रहा था.

काफी समय से पुलिस जुटा रही थी जानकारी 

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पूरी तरह सीक्रेट ऑपरेशन के तहत की गई. खुफिया इनपुट मिलने के बाद स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने अमृतसर के खालसा कॉलेज इलाके में नाकेबंदी की. इसी दौरान 35 वर्षीय हरपाल सिंह को दबोच लिया गया. उसकी गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां पहले से नजर बनाए हुए थीं. लंबे समय से उसकी संदिग्ध हरकतों की जानकारी जुटाई जा रही थी, जिसके बाद सही समय पर कार्रवाई की गई. गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से एक सी.डी. और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है. शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि सी.डी. के भीतर भारतीय सेना से जुड़ा डाटा और सैन्य गतिविधियों की मूवमेंट से संबंधित जानकारियां मौजूद हैं. वहीं मोबाइल फोन में पाकिस्तान के कुछ संदिग्ध नंबर भी पाए गए हैं. इन नंबरों के जरिए ही वह आईएसआई के संपर्क में था और जानकारियां साझा करता था.

पूछताछ में पुलिस को मिली कई अहम जानकारी 

सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. इस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हरपाल सिंह किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसका नेटवर्क कितना बड़ा था. कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है. जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला एक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसे जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा. इसके बाद रिमांड हासिल कर उससे गहन पूछताछ की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जाएगी कि उसे सेना से जुड़ी जानकारियां कैसे और किस माध्यम से मिलती थीं. साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या वह किसी और व्यक्ति को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा था.

अब तक कई जासूस पकड़े गए 

यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर पंजाब के सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं. अमृतसर, पठानकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर जैसे जिलों से पहले भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले कई लोग पकड़े जा चुके हैं. खासतौर पर सीमा से सटे गांवों में रहने वाले कुछ लोग पैसों, लालच या अन्य प्रलोभनों के चलते आईएसआई (ISI) के जाल में फंस जाते हैं. धीरे-धीरे वे जासूसी नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं.

भारत-पाक तनाव के बाद बढ़ी सतर्कता 

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और भी बढ़ा दी गई थी. इसी दौरान कई जासूसों की गिरफ्तारी हुई, जिससे यह साफ हुआ कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी लगातार भारतीय सीमावर्ती इलाकों में अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इन गतिविधियों का मुख्य निशाना सेना की तैनाती, मूवमेंट और रणनीतिक जानकारी होती है. हरपाल सिंह की गिरफ्तारी को इसी सतर्कता का नतीजा माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सख्त की जाएगी. स्थानीय लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को दें. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पैसों या लालच के चक्कर में देश की सुरक्षा से समझौता करना न केवल अपराध है, बल्कि यह पूरे देश के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

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बताते चलें कि इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक दौर में जासूसी केवल सीमा पार से नहीं होती, बल्कि भीतर बैठे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं. ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और मजबूत खुफिया तंत्र ही देश की सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है.

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