यूपी बोर्ड परीक्षा में सख्ती, नकल रोकने के लिए जैमर और कंट्रोल रूम की व्यवस्था
CM Yogi: बीते नौ वर्षों से लगातार बोर्ड नई-नई व्यवस्थाएं लागू कर रहा है, ताकि परीक्षा की पवित्रता बनी रहे और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो. वर्ष 2017 से शुरू हुई यह मुहिम अब एक मजबूत प्रणाली का रूप ले चुकी है, जिसका असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है.
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UP Board Exam 2026: यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को पूरी तरह नकलमुक्त बनाने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस बार भी बेहद कड़े और व्यापक इंतजाम किए हैं. बीते नौ वर्षों से लगातार बोर्ड नई-नई व्यवस्थाएं लागू कर रहा है, ताकि परीक्षा की पवित्रता बनी रहे और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो. वर्ष 2017 से शुरू हुई यह मुहिम अब एक मजबूत प्रणाली का रूप ले चुकी है, जिसका असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है.
18 फरवरी से 12 मार्च तक होंगी परीक्षाएं
इस साल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक आयोजित की जाएंगी. परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुरक्षा, निगरानी और प्रशासनिक स्तर पर कई नए और सख्त कदम उठाए गए हैं. परीक्षा केंद्रों से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं तक, हर स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि नकल की कोई गुंजाइश न बचे.
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कंट्रोल रूम से होगी प्रदेशभर की निगरानी
परीक्षाओं की सीधी निगरानी के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. इस कंट्रोल रूम से प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जाएगी. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या शिकायत की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा को भी कई स्तरों पर मजबूत किया गया है.
प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं में कड़ी सुरक्षा
नकल रोकने के लिए इस बार प्रश्नपत्रों में केंद्रवार कोडिंग की गई है, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत पकड़ा जा सके. सभी जिलों में हर विषय के प्रश्नपत्रों के रिजर्व सेट भी रखे गए हैं, ताकि किसी आपात स्थिति में परीक्षा प्रभावित न हो. उत्तर पुस्तिकाएं ए-फोर आकार में तैयार की गई हैं, जिनके हर पृष्ठ पर यूपी बोर्ड का लोगो और सूक्ष्म अक्षरों में यूपीएमएसपी अंकित है. इससे फर्जी उत्तर पुस्तिकाओं की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है.
संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त सतर्कता
पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी चार रंगों की उत्तर पुस्तिकाएं तैयार की गई हैं. संवेदनशील जिलों में सिली हुई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके. प्रयोगात्मक परीक्षाओं में पहली बार पोर्टल और मोबाइल एप के जरिए ऑनलाइन अंक अपलोड करने की व्यवस्था की गई, जिससे पारदर्शिता और बढ़ी है.
जैमर और विशेष निगरानी का नया प्रयोग
इस बार पहली बार 20 परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए जा रहे हैं, जिसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है. इसके अलावा 18 जिलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जहां सभी परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगरानी की जाएगी. पूरे प्रदेश में 222 अति संवेदनशील और 683 संवेदनशील परीक्षा केंद्र चिन्हित किए गए हैं.
आठ हजार से ज्यादा केंद्रों पर परीक्षा
प्रदेश भर में इस वर्ष 8,033 परीक्षा केंद्रों पर यूपी बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित होंगी. हाईस्कूल के 27.61 लाख और इंटरमीडिएट के 25.76 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे. कुल मिलाकर 53 लाख से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा देंगे. शासन स्तर पर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी हाल में गलत प्रश्नपत्र न खोला जाए और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो.
नकल शून्य का लक्ष्य
सरकार और शिक्षा परिषद का साफ लक्ष्य है कि परीक्षा में नकल को पूरी तरह खत्म किया जाए. इसके लिए सभी अधिकारियों, केंद्र व्यवस्थापकों और शिक्षकों को जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए गए हैं. इन सख्त व्यवस्थाओं के जरिए यूपी बोर्ड परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.
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