किताब पर विवाद के बीच पूर्व सेना प्रमुख ने तोड़ी चुप्पी, शेयर किया पेंगुइन पब्लिकेशन का बयान, बताया-क्या है स्टेटस
पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश शेयर करने पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है. अब इस पूरे मामले पर पहली बार जनरल एमएम नरवणे ने प्रतिक्रिया दी है.
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पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. अप्रकाशित किताब के अंश शेयर करने पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है. अब इस पूरे मामले पर पहली बार जनरल एमएम नरवणे ने खुद प्रतिक्रिया दी है.
जनरल नरवणे ने खुद सोशल मीडिया पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का आधिकारिक बयान साझा किया है. जिसमें पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. प्रकाशक ने कहा कि इस किताब की कोई भी प्रति, चाहे वह प्रिंट हो या डिजिटल अभी तक जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है.
पेंगुइन इंडिया ने क्या कहा?
पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया ने कहा, ‘हमारे पास इस किताब के प्रकाशन का पूरा अधिकार है. पेंगुइन इंडिया ने कहा है कि हम ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये किताब अभी छपी नहीं है, किताब की कोई भी कॉपी या तो डिजिटल फॉर्मेट में या प्रिंट फॉर्मेट में प्रकाशित नहीं हुई है. न ही इसे डिस्ट्रीब्यूट किया गया है.’
This is the status of the book. https://t.co/atLtwhJvl0
— Manoj Naravane (@ManojNaravane) February 10, 2026
अपने इस पोस्ट में पूर्व सेना प्रमुख ने किताब की स्थिति क्लियर की, लेकिन राहुल गांधी इस किताब का हवाला देकर संसद में देश की सुरक्षा का मुद्दा रहे हैं. संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. किताब के अंशों में सेना के अभियानों और सरकारी फैसलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होने का दावा किया जा रहा था. जिसके बाद तगड़ी बहस छिड़ गई थी.
राहुल गांधी का पलटवार करते हुए सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया था कि राहुल उस किताब का हवाला दे रहे हैं जो प्रकाशित ही नहीं हुई. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने आगे कहा कि किसी भी फॉर्मेट या किसी भी प्लेटफॉर्म पर पुस्तक की मौजूदगी कॉपीराइट का उल्लंघन है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए. किताब की कोई भी कॉपी जो अभी सर्कुलेशन में है, चाहे पूरी हो या आधी, प्रिंट, डिजिटल, पीडीएफ, या किसी भी दूसरे फॉर्मेट में, ऑनलाइन या ऑफलाइन ये PRHI के कॉपीराइट का उल्लंघन है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए.
क्या था राहुल गांधी का दावा?
3 जनवरी को राहुल गांधी ने भारतीय सीमा पर चीनी घुसपैठ का दावा किया था. उन्होंने कहा था, 4 चीनी टैंक डोकलाम में भारत की धरती पर आ रहे थे. वे कुछ 100 मीटर ही दूर थे. राहुल ने आगे कहा, मैं यह बात एक मैगजीन के आर्टिकल के हवाले से कह रहा हूं. जिसमें पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब को कोट किया गया है. राहुल के इन गंभीर आरोपों पर बहस छिड़ गई. राजनाथ सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, राहुल उस किताब का हवाला दे रहे हैं जो अभी पब्लिश (प्रकाशित) ही नहीं हुई. इस पर राहुल ने कहा, यह किताब सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही.
‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ किताब क्या है?
एम एम नरवणे की किताब का नाम फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny) में उन्होंने अपने संस्मरण लिखे हैं. किताब में सेना से जुड़े अनुभव और 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव के बारे में लिखा है. साल 2023 में इस किताब के कुछ अंश मीडिया में प्रकाशित हुए थे. जिनमें सेना की एक्टिविटी, सररकार और प्लानिंग का जिक्र था. इन अंशों में यह संकेत भी मिला कि चीन के साथ टकराव के दौरान हालात उतने नियंत्रण में' नहीं थे. इन लेखों को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक डिसीजन से जुड़ा मामला पाया गया.
क्यों नहीं पब्लिश हो पाई नरवणे की किताब?
विवाद जनरल नरवणे की किताब के पब्लिश न होने पर भी है. दरअसल, नियमों के मुताबिक, जिन सैन्य अधिकारियों के पास संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां होती हैं, वे ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और रक्षा नियमों (A) Army Rules, 1954 के Section 21 के तहत आते हैं. इन नियमों के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद भी कोई अधिकारी बिना सरकारी अनुमति के ऐसी जानकारियां प्रकाशित नहीं कर सकता, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हों.
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए क्या हैं नियम?
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चूंकि किताब सेना से जुड़ी जानकारियों को साझा करती है ऐसे में कुछ केस में नियम रिटायर्ड कर्मचारियों पर भी लागू होते हैं. जैसे कोई व्यक्ति सुरक्षा/इंटेलिजेंस/सुरक्षा-सम्बंधित जानकारी प्रकाशित करना चाहता है तो उसे पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी. इसलिए जनरल नरवणे कि किताब का प्रकाशन अभी तक अधर में है. Four Stars of Destiny को लेकर रक्षा मंत्रालय का कहना है, जब तक किताब की सामग्री की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक इसे प्रकाशित न किया जाए.
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