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CJP के प्रदर्शन से पहले मुंबई पुलिस का एक्शन, अभिजीत दीपके हिरासत में! CJP बोली- अब होगा 'जेल भरो आंदोलन'

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके को मुंबई पुलिस ने मरीन ड्राइव के पास हिरासत में लिया. शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर CJP ने ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया.

Image Source: IANS (File)
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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (अभिजीत Dipke) को मुंबई पुलिस ने मरीन ड्राइव के पास कुछ देर के लिए हिरासत में लिया. दीपके वहां कुछ तख्तियों के साथ नजर आए थे. हालांकि, हिरासत के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया था. संगठन की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है. हालांकि, मुंबई पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी. पुलिस की ओर से सार्वजनिक जमावड़े से जुड़े प्रतिबंध, जरूरी अनुमति और ट्रैफिक व्यवस्था पर संभावित असर का हवाला दिया गया. अनुमति नहीं मिलने के बाद अभिजीत दिपके ने 'जेल भरो आंदोलन' शुरू करने की बात कही थी. ऐसे में यह संभव है कि बिना परमिशन प्रदर्शन करने सीजेपी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरते हैं तो कड़े तौर पर पुलिस की कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है. 

इस्तीफे की मांग पर अड़ी CJP

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दरअसल, मुंबई प्रेस क्लब में बातचीत के दौरान दिपके ने कहा कि उनका अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते. उन्होंने मुंबई के अलावा गोवा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भी आंदोलन आगे बढ़ाने की बात कही. CJP ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए हैं.

यह भी पढ़े: ‘क्या वाकई आपको इस हद तक जाने की जरूरत है’, CJP नेताओं को हाई कोर्ट की फटकार, BJP नेता के खिलाफ किया था पोस्ट

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SIR को लेकर भी उठे सवाल

CJP का आंदोलन मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आया है. संगठन इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है और इसे रोकने की मांग कर रहा है. वहीं, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि अलग-अलग राय और विचार संस्थागत चर्चा का सामान्य हिस्सा हैं तथा आयोग के आदेशों को कानूनी मान्यता प्राप्त है. सीजेपी के इतर देश में अन्य बड़े विपक्षी दल भी लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर तमाम प्रदर्शन कर रहे हैं. 

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बहरहाल, इस पूरे मामले ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है. फिलहाल CJP अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने पर कायम है, जबकि प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की अनुमति और कानून-व्यवस्था का पक्ष भी अहम बना हुआ है.

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