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बंगाल चुनाव हारते ही बढ़ीं 'ममता' की मुश्किलें... अमित शाह को धमकी देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी पर FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. अभिषेक बनर्जी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा है. इस मामले में विधाननगर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. शिकायत में आरोप है कि चुनावी सभाओं के दौरान दिए गए उनके बयानों से तनाव फैलाने की कोशिश हुई।

Image Source: IANS
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब ममता बनर्जी के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो चुका है. एक तरफ तृणमूल कांग्रेस के अंदर से ही बगावत की आवाजें उठने लगी हैं. वहीं दूसरी तरफ टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं. चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसके बाद बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है.

भड़काऊ भाषण देने का लगा आरोप

जानकारी के मुताबिक, यह मामला विधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार ने 5 मई को बागुईआटी थाने में शिकायत दी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कई चुनावी सभाओं में ऐसे बयान दिए, जिनसे समाज में तनाव और दुश्मनी फैल सकती थी. शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि भाषणों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें कही गईं.

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पुलिस को सौंपे गए भाषणों के वीडियो

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राजीव सरकार ने पुलिस को दिए गए शिकायत पत्र के साथ अभिषेक बनर्जी के कई भड़काऊ भाषणों के वीडियो लिंक भी पुलिस को सौंपे हैं. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 15 मई को दोपहर करीब 2:45 बजे औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली. अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं.

जांच में जुटी पुलिस

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एफआईआर में कहा गया है कि अभिषेक बनर्जी के भाषणों में कथित तौर पर भड़काऊ और डर पैदा करने वाली बातें शामिल थीं, जो सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती थीं. पुलिस का यह भी कहना है कि चुनावी मंचों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ काफी आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया. फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सब-इंस्पेक्टर सोमनाथ सिंघा रॉय को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है.

टीएमसी के भीतर बढ़ी बगावत

दूसरी तरफ, चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पार्टी के कई नेता अब खुलकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं. यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व लगातार दबाव में नजर आ रहा है. हालात इतने बिगड़ गए कि टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने कई प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया.

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टीएमसी नेता ने बीजेपी से मांगी माफी

इन नेताओं में कोहिनूर मजूमदार, रिजु दत्ता और कार्तिक घोष जैसे नाम शामिल हैं. खास बात यह रही कि टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी समेत अन्य नेताओं से माफी तक मांग ली. उन्होंने दावा किया कि पहले उन पर सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया गया था. दत्ता ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने कई टीएमसी कार्यकर्ताओं की मदद की थी.

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बताते चलें कि बंगाल की राजनीति में इस समय हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं. एक तरफ टीएमसी के बड़े नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर उठ रही बगावत नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन चुकी है. आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति को और ज्यादा गर्मा सकता है.

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