'खत्म हो रहा कानून का राज, पुलिस पर नहीं भरोसा...', बंगाल में चुनाव से पहले बुरी फंसीं ममता! ED के कोर्ट में बड़े आरोप

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सीएम ममता बनर्जी बुरी तरह कोर्ट के झमेले में फंसती नजर आ रही हैं. कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ED ने कानून का राज खत्म होने, धमकी, दबाव, पुलिस की राजनीतिक संलिप्तता जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

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18 Feb 2026
( Updated: 18 Feb 2026
04:02 PM )
'खत्म हो रहा कानून का राज, पुलिस पर नहीं भरोसा...', बंगाल में चुनाव से पहले बुरी फंसीं ममता! ED के कोर्ट में बड़े आरोप
Mamata Banerjee (File Photo)

बंगाल में आगामी चुनाव से पहले सीएम ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ED ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सीएम ममता, TMC, बंगाल पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. अपने हलफनामे में एजेंसी ने दावा किया कि जांच को बाधित करने के लिए प्रभाव, शक्ति और सुरक्षा तंत्र का दुरुपयोग किया गया, डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ हुई और राज्य में संवैधानिक मशीनरी का क्षरण हो चुका है.

वहीं ममता की तरफ से ED को Weaponize करने का आरोप लगाया गया, जिस पर ED की तरफ से ASG ने कहा कि ED को Terrorise करने की कोशिश हुई. आपको बता दें कि बंगाल में आई-पैक रेड मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी. अदालत में ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एजेंसी अपना जवाब दाखिल कर देगी.

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने, प्रभाव और शक्ति के दुरुपयोग तथा डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने दावा किया है कि जांच को प्रभावित करने के लिए सुरक्षा तंत्र का इस्तेमाल किया गया और राज्य में संवैधानिक मशीनरी के क्षरण जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है.

डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

ईडी का ने कोर्ट में डिजिटल साक्ष्यों के छेड़छाड़ को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. हलफनामे में कहा गया है कि आई-पैक कार्यालय में कंप्यूटर डेटा का बैकअप रोका गया, CCTV स्टोरेज डिवाइस हटाए गए और जांच से पहले डिजिटल रिकॉर्ड्स में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई. एजेंसी का कहना है कि यह महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संगठित तरीके से साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास है.

ईडी ने यह भी कहा है कि डिजिटल साक्ष्य की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. यदि बैकअप जानबूझकर रोका गया हो, स्टोरेज डिवाइस हटाए गए हों या लॉग फाइल्स डिलीट की गई हों, तो इससे अभियोजन की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है.

ममता की Z+ सुरक्षा के दुरुपयोग का आरोप

हलफनामे में यह आरोप भी लगाया गया है कि मुख्यमंत्री की Z प्लस सुरक्षा का इस्तेमाल जांच एजेंसियों और गवाहों पर दबाव बनाने के लिए किया गया. ईडी के अनुसार यदि सुरक्षा व्यवस्था का उपयोग जांच को प्रभावित करने के लिए किया गया हो, तो यह सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन का मामला बन सकता है.

ED को नहीं रहा बंगाल पुलिस पर भरोसा, CBI जांच की मांग

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर सवालों को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए. एजेंसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार को पक्षकार बनाया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

ममता बनर्जी का भी आया जवाब

दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में ईडी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालयों में तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा गोपनीय और चुनावी रणनीति का डेटा जब्त कर लिया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल जैसा है.

उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि पार्टी से संबंधित संवेदनशील डेटा वहां मौजूद है, वह स्वयं कार्यालय पहुंचीं. उनके अनुसार उनका उद्देश्य केवल गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रखना था और उन्होंने जांच में किसी प्रकार की बाधा नहीं डाली.

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अब इस संवेदनशील मामले में सभी पक्षों की दलीलें 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनी जाएंगी. अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि मामला जांच एजेंसी की कार्रवाई, राज्य सरकार की भूमिका और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े अहम सवालों को छूता है.

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